महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव: MLC सचिन अहीर शिंदे गुट में शामिल, उद्धव ठाकरे को एक और झटका

महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव हुआ है। MLC सचिन अहीर शिंदे गुट में शामिल हो गए हैं, जिससे उद्धव ठाकरे को एक और राजनीतिक झटका लगा है। जानें पूरा घटनाक्रम।

महाराष्ट्र की राजनीति से एक और बड़ी खबर सामने आई है, जिसमें उद्धव ठाकरे को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। शिवसेना (यूबीटी) के विधान परिषद सदस्य (MLC) सचिन अहीर ने पार्टी छोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने का फैसला किया है।

Maharashtra Political: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी घटनाक्रम देखने को मिला है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को तब झटका लगा जब पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधान परिषद सदस्य (MLC) सचिन अहीर ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने का फैसला किया। इस राजनीतिक बदलाव के तुरंत बाद शिंदे गुट ने उन्हें विधान परिषद के उपसभापति पद का उम्मीदवार बनाते हुए नामांकन भी दाखिल कर दिया है।

उद्धव ठाकरे खेमे से लगातार टूट

सचिन अहीर का यह कदम उद्धव ठाकरे गुट के लिए एक और बड़ा राजनीतिक नुकसान माना जा रहा है। पिछले कुछ समय से महाराष्ट्र की राजनीति में लगातार नेताओं के पाला बदलने का दौर जारी है, जिससे शिवसेना (यूबीटी) की स्थिति कमजोर होती दिख रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम राज्य में सत्ता संतुलन को और मजबूत तरीके से शिंदे गुट की ओर झुका सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम को एक बार फिर ‘ऑपरेशन टाइगर’ के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले भी इस रणनीति के तहत उद्धव ठाकरे गुट को बड़ा झटका लग चुका है, जब उनके कई सांसद और नेता शिंदे खेमे में शामिल हो गए थे। राजनीतिक हलकों में ‘ऑपरेशन टाइगर’ उस रणनीति के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें किसी पार्टी के विधायकों या सांसदों को संगठित तरीके से दूसरी पार्टी में शामिल कराया जाता है।

पहले भी टूट चुका है शिवसेना (यूबीटी) खेमे का आधार

इससे पहले लोकसभा में भी उद्धव ठाकरे गुट को बड़ा झटका लगा था, जब उनकी पार्टी के 9 में से 6 सांसद एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो गए थे। यह दलबदल महाराष्ट्र की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ माना गया, क्योंकि इससे शिवसेना (यूबीटी) की संसद में ताकत काफी कमजोर हो गई। भारतीय संविधान के दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के अनुसार, यदि किसी पार्टी के कम से कम दो-तिहाई सदस्य एक साथ अलग होकर किसी अन्य गुट में शामिल हो जाते हैं, तो उनकी सदस्यता पर कोई खतरा नहीं होता।

इसी नियम के तहत शिवसेना के 6 सांसदों के एक साथ जाने के बाद उनकी लोकसभा सदस्यता सुरक्षित रही। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना लगातार अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करती दिख रही है। हालिया घटनाक्रम से साफ संकेत मिलते हैं कि महाराष्ट्र की राजनीति में शिंदे गुट अब संगठनात्मक और संस्थागत दोनों स्तरों पर अपनी पकड़ बढ़ा रहा है।

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