महाराष्ट्र सदन घोटाले में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल को बड़ी राहत मिली है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के मामले के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मामले में भी कोर्ट ने उन्हें निर्दोष करार दे दिया है।
मुंबई: महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में आज एक बड़ी खबर सामने आई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल को महाराष्ट्र सदन घोटाले से जुड़े मामलों में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) दोनों मामलों में राहत मिल गई है। विशेष कोर्ट ने भुजबल समेत अन्य आरोपियों को निर्दोष करार देते हुए मनी लॉन्ड्रिंग केस से भी बरी कर दिया।
स्पेशल कोर्ट का अहम फैसला
स्पेशल कोर्ट के जज सत्यनारायण नवंदर ने महाराष्ट्र सदन घोटाले के मामले में महत्वपूर्ण आदेश सुनाया। कोर्ट ने कहा कि जब इस मामले में कोई प्रेडिकेट ऑफेंस (मूल अपराध) बनता ही नहीं है, तो ED के मनी लॉन्ड्रिंग केस की कोई कानूनी वैधता नहीं रहती। इस आधार पर, कोर्ट ने भुजबल और अन्य आरोपियों की डिस्चार्ज अर्जी मंजूर कर दी, जिससे उन्हें पूरी तरह से कानूनी सुरक्षा मिल गई।
कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि मूल अपराध सिद्ध नहीं होने पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस टिक नहीं सकता, क्योंकि मनी लॉन्ड्रिंग केवल उस अपराध से जुड़ी होती है जो पहले से साबित हो। इस निर्णय ने छगन भुजबल को एक और बड़ी राहत प्रदान की है।

ACB केस में पहले ही मिली थी राहत
इससे पहले, महाराष्ट्र सदन घोटाले से जुड़े एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के केस में भी भुजबल को राहत मिल चुकी थी। ACB की जांच में अदालत ने कई आरोपों पर अड़े रहकर उन्हें दोषमुक्त किया था। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उसी ACB केस को आधार बनाकर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया। लेकिन अब कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब मूल अपराध ही साबित नहीं होता, तो मनी लॉन्ड्रिंग का केस कानूनी रूप से टिक नहीं सकता।
विशेष कोर्ट का यह फैसला छगन भुजबल के लिए राजनीतिक और कानूनी दोनों ही दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसे राजनीतिक गलियारों में NCP के लिए भी बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
छगन भुजबल की कानूनी लड़ाई
छगन भुजबल महाराष्ट्र में लंबे समय से राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं और उन्हें कई मामलों में जांच का सामना करना पड़ा है। महाराष्ट्र सदन घोटाले में उनके खिलाफ आरोप लगे थे कि उन्होंने सदन में फर्जी और अवैध लेन-देन के जरिए सरकारी धन का दुरुपयोग किया। हालांकि, अदालत ने लगातार यह स्पष्ट किया कि इन आरोपों का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिलता। ACB और ED दोनों मामलों में भुजबल ने अदालत में अपनी पक्ष रखकर अपनी निर्दोषता साबित की।
अब विशेष कोर्ट के फैसले के बाद भुजबल और उनके परिवार को एक बड़ा सांस लेने का मौका मिल गया है, साथ ही उनकी राजनीतिक छवि भी मजबूत बनी है।









