महिला वकीलों की सुरक्षा और सम्मान पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, अदालतों में बेहतर सुविधाओं के लिए केंद्र से मांगा जवाब

महिला वकीलों की सुरक्षा, सम्मान और अदालतों में बेहतर सुविधाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। केंद्र सरकार से इस मामले में जवाब मांगा गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने महिला वकीलों के लिए सुरक्षित, समान और अनुकूल कार्य वातावरण सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया है। अदालत ने कहा कि ऐसा माहौल बनाया जाना चाहिए, जिसमें महिला अधिवक्ता अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से और बिना किसी भेदभाव के निर्वहन कर सकें।

नई दिल्ली: भारत के सुप्रीम कोर्ट ने महिला वकीलों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और समान कार्य वातावरण सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने कहा कि न्याय व्यवस्था की मजबूती केवल न्यायिक फैसलों से नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों से भी तय होती है, जिनमें न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े पेशेवर काम करते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि महिला वकीलों के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षित कार्यस्थल की उपलब्धता किसी विशेष सुविधा का विषय नहीं, बल्कि उनके मौलिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने इस मुद्दे को देश की न्यायिक व्यवस्था में लैंगिक समानता और पेशेवर गरिमा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना है।

महिला वकीलों के लिए बेहतर कार्य वातावरण की जरूरत

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि पिछले कुछ दशकों में कानूनी पेशे में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ी है और यह न्यायिक क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि, केवल अवसर उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को सार्थक बनाने के लिए ऐसा वातावरण तैयार करना जरूरी है, जहां वे सुरक्षित, सम्मानपूर्वक और समान अवसरों के साथ अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकें।

अदालत ने कहा कि कार्यस्थल पर सुरक्षा, आवश्यक सुविधाएं और समान व्यवहार किसी भी पेशेवर माहौल के बुनियादी तत्व हैं और न्यायालय परिसर भी इससे अलग नहीं हो सकते।

बार रूम और बुनियादी सुविधाओं की कमी पर चिंता

यह मामला उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें देशभर की अदालतों, अधिकरणों और विभिन्न आयोगों में महिला वकीलों के लिए पर्याप्त सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया गया है। याचिका में कहा गया कि कई न्यायालय परिसरों में महिलाओं के लिए अलग बार रूम, विश्राम कक्ष, स्वच्छ शौचालय, चाइल्ड केयर सुविधाएं और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने इन चिंताओं को गंभीर मानते हुए कहा कि इन्हें केवल सुविधा और असुविधा के नजरिए से नहीं देखा जा सकता। ऐसे बुनियादी ढांचे का अभाव महिला वकीलों के पेशेवर जीवन और कार्य क्षमता पर सीधा प्रभाव डालता है।

महिला वकीलों की सुरक्षा और सम्मान पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, अदालतों में बेहतर सुविधाओं के लिए केंद्र से मांगा जवाब

अदालत परिसर केवल कार्यस्थल नहीं, दूसरा घर भी

सुप्रीम कोर्ट ने अपने अवलोकन में कहा कि अदालत परिसर केवल कानूनी कार्यवाही का स्थान नहीं है। वकील अपने पेशेवर जीवन का बड़ा हिस्सा अदालतों में बिताते हैं और कई बार यह उनके लिए दूसरे घर जैसा बन जाता है। पीठ ने कहा कि अधिकांश अधिवक्ता लंबे समय तक न्यायालय परिसर में रहते हैं। ऐसे में वहां सुरक्षित और आवश्यक सुविधाओं का होना अनिवार्य है। 

यदि महिला वकीलों के लिए बुनियादी व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं होंगी, तो यह उनके पेशेवर विकास में बाधा बन सकता है और कुछ मामलों में उन्हें इस पेशे में आगे बढ़ने से भी हतोत्साहित कर सकता है।

संविधान के अनुच्छेद 21 से जुड़ा मामला

सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 से जोड़ते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत के अनुसार, सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार केवल व्यक्तिगत स्वतंत्रता तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षित और गरिमापूर्ण कार्यस्थल भी इसका अभिन्न हिस्सा है। पीठ ने कहा कि महिला वकीलों के लिए आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था पहली नजर में संविधान के तहत प्रदत्त जीवन और गरिमा के मौलिक अधिकार से सीधे जुड़ी हुई है। इसलिए इस विषय को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

केंद्र और राज्यों से मांगा विस्तृत जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और संबंधित प्राधिकरणों को नोटिस जारी करते हुए इस संबंध में उनका पक्ष मांगा है। साथ ही, अदालत ने भारत के अटॉर्नी जनरल, विभिन्न राज्यों के महाधिवक्ताओं और केंद्र शासित प्रदेशों के सरकारी वकीलों से अगली सुनवाई में उपस्थित होकर इस मामले में सहायता करने का अनुरोध किया है। मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई को निर्धारित की गई है, जहां इस मुद्दे पर आगे की दिशा तय की जा सकती है।

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