मोदी-पजशकियान की बिश्केक में मुलाकात, युद्ध के बाद पहली बैठक; SCO समिट में जुटे 10 देशों के नेता

प्रधानमंत्री मोदी ने बिश्केक में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान से मुलाकात की। पश्चिम एशिया में जंग शुरू होने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली बैठक है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिश्केक में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान से द्विपक्षीय बैठक की। पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली मुलाकात है। दोनों नेता SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने किर्गिस्तान पहुंचे हैं।

बिश्केक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक ऐसे समय हुई है, जब पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और उसके क्षेत्रीय प्रभावों को लेकर पूरी दुनिया की नजरें बनी हुई हैं। युद्ध शुरू होने के बाद मोदी और पजशकियान की यह पहली आमने-सामने मुलाकात बताई जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए बिश्केक पहुंचे हैं। ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान भी सम्मेलन में भाग लेने के लिए किर्गिस्तान में मौजूद हैं। दोनों देशों के नेताओं की बैठक में द्विपक्षीय संबंधों के साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

पश्चिम एशिया के हालात के बीच हुई अहम मुलाकात

मोदी और पजशकियान की बैठक का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि पश्चिम एशिया में तनाव का असर ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, समुद्री मार्गों और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ रहा है। भारत के लिए ईरान के साथ संबंध रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।

ईरान भारत के लिए मध्य एशिया और उससे आगे के क्षेत्रों तक संपर्क बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाता है। दोनों देशों के बीच चाबहार बंदरगाह को लेकर सहयोग लंबे समय से भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

ऐसे में SCO सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं की बातचीत भारत-ईरान संबंधों के भविष्य और क्षेत्रीय परिस्थितियों पर साझा दृष्टिकोण को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन

किर्गिस्तान में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान समेत संगठन के 10 पूर्ण सदस्य देशों के नेता हिस्सा ले रहे हैं। इस सम्मेलन की थीम शांति, विकास और समृद्धि के लिए मिलकर आगे बढ़ना रखी गई है।

सम्मेलन में क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, व्यापार, ऊर्जा, परिवहन संपर्क और आतंकवाद से मुकाबले जैसे मुद्दों पर चर्चा केंद्र में रहने की उम्मीद है। अफगानिस्तान की स्थिति और मध्य एशिया में बदलते रणनीतिक समीकरण भी सदस्य देशों के लिए महत्वपूर्ण विषय हैं।

SCO आज यूरेशियाई क्षेत्र का एक प्रमुख बहुपक्षीय संगठन है। भारत के लिए यह मंच चीन, रूस, ईरान और मध्य एशियाई देशों के साथ एक ही मंच पर संवाद का अवसर उपलब्ध कराता है।

10 देशों का संगठन है SCO

शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना 15 जून 2001 को चीन के शंघाई शहर में हुई थी। शुरुआत में इसमें चीन, रूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल थे।

बाद में संगठन का विस्तार हुआ। भारत और पाकिस्तान 2017 में पूर्ण सदस्य बने। इसके बाद ईरान 2023 में और बेलारूस 2024 में पूर्ण सदस्य के रूप में संगठन में शामिल हुआ। वर्तमान में SCO के 10 पूर्ण सदस्य देश हैं।

संगठन का मूल फोकस क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोग पर रहा है। इसके एजेंडे में आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से मुकाबला करने के साथ आर्थिक, परिवहन, ऊर्जा और सांस्कृतिक सहयोग भी शामिल है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है SCO?

SCO भारत के लिए केवल एक सुरक्षा मंच नहीं है, बल्कि मध्य एशिया के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने का माध्यम भी है। मध्य एशियाई क्षेत्र तेल, गैस, यूरेनियम और कई महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों से समृद्ध है।

भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए इस क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है। इसके अलावा नई व्यापारिक और परिवहन कनेक्टिविटी विकसित करना भी भारत की प्राथमिकताओं में शामिल है।

मध्य एशिया तक बेहतर पहुंच भारत के लिए आर्थिक और रणनीतिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। अफगानिस्तान की स्थिति और आतंकवाद से जुड़े खतरों के मद्देनजर भी इस क्षेत्र के देशों के साथ लगातार संवाद भारत के हित में है।

आर्मेनिया के प्रधानमंत्री से भी मिले मोदी

SCO सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान से भी मुलाकात की। इस बैठक के दौरान दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों और सहयोग से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हुई।

बैठक के दौरान पाशिन्यान ने प्रधानमंत्री मोदी को आर्मेनिया आने का निमंत्रण भी दिया। भारत और आर्मेनिया के संबंध हाल के वर्षों में राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक स्तर पर लगातार आगे बढ़े हैं।

बिश्केक में मोदी की अलग-अलग नेताओं के साथ होने वाली द्विपक्षीय बैठकों को भारत की व्यापक कूटनीतिक पहुंच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि

SCO सम्मेलन में हिस्सा लेने के अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने बिश्केक में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने वहां भारतीय समुदाय के लोगों से भी बातचीत की।

विदेशों में भारतीय समुदाय के साथ प्रधानमंत्री की मुलाकातें भारत के लोगों से जुड़े संबंधों को मजबूत करने का एक अहम माध्यम रही हैं। बिश्केक में भारतीय समुदाय से बातचीत भी उनके दौरे के कार्यक्रम का हिस्सा रही।

2027 में पाकिस्तान में हो सकता है SCO सम्मेलन

किर्गिस्तान की अध्यक्षता के बाद SCO की अगली अध्यक्षता पाकिस्तान को मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। 2027 में संगठन का शिखर सम्मेलन पाकिस्तान में प्रस्तावित है।

यदि पाकिस्तान को मेजबानी मिलती है तो यह भारत-पाकिस्तान संबंधों के संदर्भ में भी SCO को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मंच बना सकता है। दोनों देश SCO के पूर्ण सदस्य हैं और संगठन के बहुपक्षीय कार्यक्रमों में एक साथ हिस्सा लेते हैं।

हालांकि, किसी भी बहुपक्षीय सम्मेलन में द्विपक्षीय मतभेदों के बजाय साझा क्षेत्रीय हितों और संगठन के एजेंडे पर चर्चा प्रमुख रहती है।

भारत-ईरान संबंधों पर भी नजर

मोदी और पजशकियान की बैठक ऐसे समय हुई है जब भारत और ईरान के संबंधों का महत्व कई स्तरों पर बढ़ा हुआ है। व्यापार, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय स्थिरता दोनों देशों के बीच सहयोग के प्रमुख क्षेत्र हैं।

भारत के लिए ईरान के चाबहार बंदरगाह का रणनीतिक महत्व विशेष रूप से बड़ा है। यह बंदरगाह भारत को पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया के बाजारों तक पहुंच बनाने का विकल्प देता है।

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत के लिए क्षेत्रीय संपर्क और ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता बनाए रखना महत्वपूर्ण है। ऐसे में ईरान के साथ उच्चस्तरीय संवाद को भारत की सक्रिय कूटनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।

SCO में शांति और विकास पर जोर

बिश्केक सम्मेलन की थीम शांति, विकास और समृद्धि पर केंद्रित है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में यह एजेंडा खास महत्व रखता है। पश्चिम एशिया का संघर्ष, यूरेशिया में सुरक्षा चुनौतियां, ऊर्जा संकट और वैश्विक व्यापार में बदलाव कई सदस्य देशों के लिए चिंता के विषय हैं।

भारत SCO के मंच पर आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, क्षेत्रीय संपर्क, आर्थिक विकास और स्थिरता जैसे मुद्दों को लगातार महत्व देता रहा है। मोदी की बिश्केक यात्रा इसी व्यापक कूटनीतिक प्रयास का हिस्सा है।

कुल मिलाकर, मोदी-पजशकियान की मुलाकात और SCO शिखर सम्मेलन भारत की पश्चिम एशिया और मध्य एशिया नीति के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम हैं। युद्ध के बाद दोनों नेताओं की पहली मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब क्षेत्रीय शांति, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक स्थिरता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहन चर्चा जारी है।

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