अमृतसर: अमृतसर में ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने और यात्रियों को सुगम आवागमन उपलब्ध कराने के लिए एलिवेटेड कॉरिडोर का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। अमृतसर से सांसद गुरजीत सिंह औजला ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर एलिवेटेड कॉरिडोर से जुड़े प्रस्ताव पर चर्चा की। सांसद ने कहा कि यदि शहर में सिग्नल-फ्री कनेक्टिविटी विकसित होती है तो रोजाना आने-जाने वाले लोगों का सफर आसान होगा और ट्रैफिक जाम की समस्या भी कम की जा सकेगी।
मुलाकात के दौरान सांसद ने अमृतसर में बढ़ते यातायात दबाव और प्रमुख मार्गों पर लगने वाले जाम का मुद्दा केंद्रीय मंत्री के सामने रखा। उनका कहना है कि शहर में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जबकि कई प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव पहले से काफी अधिक है। ऐसे में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बेहतर सड़क बुनियादी ढांचे की आवश्यकता है।
औजला ने एलिवेटेड कॉरिडोर को शहर की ट्रैफिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण परियोजना बताया। उनके मुताबिक, यदि प्रमुख मार्गों को एलिवेटेड कनेक्टिविटी से जोड़ा जाता है तो वाहनों को बार-बार सिग्नल पर रुकना नहीं पड़ेगा। इससे यात्रा का समय कम हो सकता है और ईंधन की भी बचत होगी।
सांसद ने केंद्रीय मंत्री से कहा कि अमृतसर धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से देश के महत्वपूर्ण शहरों में शामिल है। यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। इसके अलावा शहर में रोजाना बड़ी संख्या में स्थानीय लोग काम, कारोबार, शिक्षा और अन्य कारणों से आवागमन करते हैं। ऐसे में शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है।
अमृतसर में कई प्रमुख सड़क मार्ग ऐसे हैं जहां दिन के व्यस्त समय में वाहनों का दबाव बढ़ जाता है। चौराहों पर सिग्नल के कारण वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। कई बार थोड़ी दूरी तय करने में भी काफी समय लग जाता है। सांसद का कहना है कि एलिवेटेड कॉरिडोर इस समस्या का एक प्रभावी समाधान बन सकता है।
औजला ने केंद्रीय मंत्री के साथ बातचीत में सिग्नल-फ्री कनेक्टिविटी की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना है कि यदि वाहनों के लिए निर्बाध मार्ग उपलब्ध हो तो शहर में यातायात की गति बेहतर हो सकती है। साथ ही प्रमुख चौराहों और सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव भी कम किया जा सकता है।
मुलाकात के दौरान सांसद ने परियोजना से जुड़े पहलुओं पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय का सहयोग मांगा। उनका कहना है कि केंद्र सरकार की मदद से इस तरह की परियोजना को आगे बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए तकनीकी अध्ययन, यातायात सर्वे और परियोजना की व्यवहार्यता जैसे पहलुओं पर काम करना जरूरी होगा।
एलिवेटेड कॉरिडोर बनने से शहर के उन हिस्सों को भी फायदा हो सकता है जहां रोजाना भारी ट्रैफिक रहता है। यदि मुख्य यातायात को ऊपरी मार्ग से निकाला जाता है तो नीचे की सड़कों पर स्थानीय यातायात के लिए जगह बढ़ सकती है। इससे शहर के अंदरूनी हिस्सों में भी आवागमन आसान होने की उम्मीद है।
सांसद ने यह भी कहा कि किसी भी बड़ी सड़क परियोजना को तैयार करते समय स्थानीय लोगों, व्यापारियों और यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है। परियोजना की डिजाइन इस तरह होनी चाहिए कि इससे शहर की मौजूदा सड़क व्यवस्था और स्थानीय यातायात पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
अमृतसर में ट्रैफिक सुधार की जरूरत को देखते हुए एलिवेटेड कॉरिडोर की चर्चा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शहर में धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ व्यावसायिक गतिविधियां भी बड़े स्तर पर होती हैं। प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ने के कारण शहर के विकास के साथ सड़क बुनियादी ढांचे को मजबूत करना जरूरी हो गया है।
सांसद के मुताबिक, सिग्नल-फ्री कनेक्टिविटी से केवल यात्रा का समय ही कम नहीं होगा, बल्कि बार-बार रुकने और फिर वाहन चलाने की स्थिति कम होने से ईंधन की खपत और प्रदूषण को भी नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
एलिवेटेड कॉरिडोर के प्रस्ताव पर आगे क्या निर्णय होगा, यह मंत्रालय स्तर पर होने वाली तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। परियोजना की लागत, मार्ग, जमीन की उपलब्धता, ट्रैफिक लोड और तकनीकी व्यवहार्यता जैसे कई पहलुओं का अध्ययन किया जाना जरूरी होगा।
औजला की केंद्रीय मंत्री से मुलाकात के बाद इस मुद्दे को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चा शुरू हो गई है। शहर के लोगों को उम्मीद है कि यदि परियोजना को मंजूरी मिलती है तो आने वाले वर्षों में ट्रैफिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
व्यस्त सड़कों पर लगने वाले जाम के कारण लोगों को रोजाना समय और ईंधन दोनों का नुकसान होता है। कई बार एंबुलेंस और जरूरी सेवाओं के वाहनों को भी जाम में फंसने की समस्या सामने आती है। ऐसे में निर्बाध यातायात व्यवस्था का महत्व और बढ़ जाता है।
एलिवेटेड कॉरिडोर के जरिए शहर के प्रमुख यातायात मार्गों को जोड़ने से लंबी दूरी के वाहनों को स्थानीय ट्रैफिक से अलग किया जा सकता है। हालांकि इसके लिए विस्तृत ट्रैफिक प्लानिंग जरूरी होगी, ताकि एलिवेटेड मार्ग के साथ-साथ नीचे की सड़कों पर भी यातायात सुचारु बना रहे।
सांसद ने मुलाकात के दौरान अमृतसर की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सड़क ढांचे के विस्तार पर जोर दिया। उनका कहना है कि शहर का विस्तार और वाहनों की बढ़ती संख्या आने वाले वर्षों में ट्रैफिक दबाव को और बढ़ा सकती है। इसलिए अभी से दीर्घकालिक समाधान तैयार करना जरूरी है।
केंद्रीय मंत्री के साथ हुई बैठक को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि एलिवेटेड कॉरिडोर के प्रस्ताव को लेकर मंत्रालय की ओर से आगे क्या प्रक्रिया शुरू की जाती है और परियोजना को लेकर तकनीकी स्तर पर क्या निष्कर्ष सामने आते हैं।
फिलहाल सांसद गुरजीत सिंह औजला ने एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के सामने अमृतसर की जरूरत रखी है। उनका कहना है कि सिग्नल-फ्री कनेक्टिविटी से शहर में सफर आसान होगा, ट्रैफिक दबाव घटेगा और लोगों को रोजाना आवागमन में राहत मिलेगी।












