भारतीय टीम के पूर्व कप्तान एमएस धोनी ने युवाओं को रोज कम से कम एक घंटा अपनी सेहत के लिए निकालने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि आजकल लोग फास्ट फूड ज्यादा खा रहे हैं, लेकिन शरीर से मेहनत कम कर रहे हैं। धोनी ने बच्चों को छोटी उम्र से ही खेलों से जोड़ने की बात भी कही।
स्पोर्ट्स न्यूज: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने युवाओं को अपनी सेहत का ध्यान रखने की सलाह दी है। लेखक और गीतकार जावेद अख्तर के साथ एक कार्यक्रम में बातचीत करते हुए धोनी ने कहा कि आजकल लोग अपने काम और दूसरी जिम्मेदारियों में इतने व्यस्त रहते हैं कि खुद के लिए समय ही नहीं निकाल पाते। उन्होंने कहा कि बच्चों को बचपन से ही खेलने की आदत डालनी चाहिए। वहीं, बड़े लोगों को भी रोज थोड़ा समय खेलकूद या कसरत के लिए जरूर निकालना चाहिए।
रोज एक घंटा अपनी सेहत के लिए निकालें
धोनी ने युवाओं से कहा कि दिन में 24 घंटे होते हैं। इनमें से कम से कम एक घंटा अपने शरीर के लिए जरूर निकालना चाहिए। उनका कहना है कि आज अपनी सेहत पर ध्यान देंगे, तो आगे चलकर इसका फायदा मिलेगा। उन्होंने बताया कि फिट रहने के लिए रोज जिम जाना जरूरी नहीं है। लोग क्रिकेट, फुटबॉल, बैडमिंटन या अपनी पसंद का कोई भी खेल खेल सकते हैं।
जरूरी यह है कि शरीर की थोड़ी मेहनत होती रहे। इसके साथ खाने-पीने का भी ध्यान रखना चाहिए। जरूरत से ज्यादा खाना और दिनभर बैठे रहना सेहत के लिए अच्छा नहीं है।
पहले लोग ज्यादा मेहनत करते थे, अब कम हो गई भागदौड़
धोनी ने पुराने समय और आज की जिंदगी के बीच फर्क भी बताया। उन्होंने कहा कि पहले लोगों को रोजमर्रा के काम करने के लिए काफी चलना-फिरना पड़ता था। कई काम हाथ से होते थे और लोगों को शारीरिक मेहनत भी ज्यादा करनी पड़ती थी। उस समय खाने में चावल, रोटी और दूसरी ऐसी चीजें ज्यादा होती थीं, जिनसे शरीर को ऊर्जा मिलती है। लोग मेहनत करके उस ऊर्जा का इस्तेमाल भी कर लेते थे। लेकिन अब हालात बदल गए हैं।
धोनी ने उदाहरण देते हुए कहा कि आज घर से बाहर निकलते ही ऑटो या कैब मिल जाती है। लोग गाड़ी से ऑफिस पहुंचते हैं और वहां घंटों कुर्सी पर बैठे रहते हैं। घर लौटने के बाद भी ज्यादा चलना-फिरना नहीं हो पाता। ऐसे में शरीर को पहले जितनी मेहनत करने का मौका नहीं मिलता।
फास्ट फूड और मीठी चीजें खाने वालों को दी सलाह
धोनी ने आजकल युवाओं में बढ़ रही फास्ट फूड खाने की आदत पर भी बात की। उन्होंने बताया कि जब वह छोटे थे, तब भारत में फास्ट फूड का चलन इतना ज्यादा नहीं था। लेकिन अब बर्गर, पिज्जा और दूसरी ऐसी चीजें लोगों के खाने का हिस्सा बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि ज्यादा मीठा और तला हुआ खाना खाने वालों को अपनी शारीरिक गतिविधियों पर भी ध्यान देना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति दिनभर बैठा रहता है और खाने-पीने में भी ध्यान नहीं देता, तो आगे चलकर उसकी सेहत पर असर पड़ सकता है।
धोनी के मुताबिक, आज कई लोग फिटनेस को लेकर जागरूक हुए हैं। हालांकि, अभी भी बहुत से लोग नियमित कसरत और खेलकूद के लिए समय नहीं निकालते।
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बच्चों को छोटी उम्र से ही खेलने दें
एमएस धोनी ने माता-पिता से भी बच्चों को खेलों में हिस्सा लेने के लिए बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि बच्चों का पूरा समय सिर्फ पढ़ाई में नहीं निकलना चाहिए। उन्हें मैदान में जाकर खेलने का मौका भी मिलना चाहिए। धोनी ने बैडमिंटन का उदाहरण देते हुए समझाया कि हो सकता है कोई बच्चा इस खेल में बहुत अच्छा हो, लेकिन अगर उसे कभी खेलने का मौका ही नहीं मिलेगा, तो उसकी काबिलियत का पता कैसे चलेगा?
धोनी ने माता-पिता को सलाह दी कि बच्चों को शुरू से ही अलग-अलग खेलों में हिस्सा लेने दें। हो सकता है किसी बच्चे को क्रिकेट पसंद हो तो किसी का मन फुटबॉल या बैडमिंटन में लगे। जब बच्चे मैदान पर उतरेंगे, तभी पता चलेगा कि उनकी दिलचस्पी किस खेल में है। धोनी ने यह भी कहा कि हर बच्चा आगे चलकर पेशेवर खिलाड़ी नहीं बन सकता, लेकिन बचपन से खेलने की आदत रहेगी तो बड़े होने पर भी उसे शारीरिक गतिविधियों के लिए समय निकालना आसान लगेगा।
30-35 साल की उम्र के बाद पता चलता है फिट रहने का फायदा
धोनी ने बातचीत में बढ़ती उम्र का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जवानी में लोग अक्सर अपनी सेहत के बारे में ज्यादा नहीं सोचते। लेकिन 30-35 साल के होते-होते शरीर में फर्क महसूस होने लगता है। ऐसे समय में पहले से बनी अच्छी आदतें काम आती हैं।
उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियों का उदाहरण दिया। धोनी ने कहा कि लोग दिनभर काम करते हैं, ताकि माता-पिता, पत्नी और बच्चों की जरूरतें पूरी कर सकें। इस भागदौड़ में वे खुद के लिए समय निकालना भूल जाते हैं। जबकि परिवार के साथ घूमने जाना हो या बच्चों के साथ खेलना हो, उसके लिए भी शरीर का साथ देना जरूरी है।
धोनी का कहना था कि खुद के लिए नहीं तो परिवार के लिए ही रोज थोड़ा समय फिटनेस को देना चाहिए। कमाई और दूसरी जिम्मेदारियों के बीच अपनी सेहत को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है।
मैदान पर हारना भी जिंदगी की सीख देता है
धोनी ने खेलों की एक और खास बात बताई। उनके मुताबिक, मैदान पर उतरने वाला हर खिलाड़ी जीतना चाहता है, लेकिन हर मुकाबला उसके पक्ष में नहीं जाता। कई बार अच्छी तैयारी के बावजूद हार मिलती है। ऐसे में खिलाड़ी को देखना पड़ता है कि उससे कहां गलती हुई और अगली बार क्या बेहतर किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि जीतने पर खुशी होना स्वाभाविक है, लेकिन हार मिलने पर खुद को संभालना भी आना चाहिए। खेलते-खेलते बच्चे यह समझने लगते हैं कि हर कोशिश में सफलता नहीं मिलती और एक हार से सब कुछ खत्म नहीं हो जाता। धोनी के अनुसार, मैदान पर मिला यह अनुभव आगे भी काम आता है। पढ़ाई हो, नौकरी हो या जिंदगी की कोई दूसरी परेशानी, अपनी गलती समझकर दोबारा कोशिश करने की आदत मुश्किल परिस्थितियों से निपटने में मदद करती है।









