उत्तराखंड के नैनीताल और भवाली में पिछले कई दिनों से चल रहा प्रसिद्ध नंदा देवी महोत्सव आज बुधवार को भव्य धार्मिक आयोजनों के साथ संपन्न होगा। महोत्सव के अंतिम दिन मां नंदा-सुनंदा की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी और डोला नगर भ्रमण के बाद विसर्जन किया जाएगा। समापन कार्यक्रम को लेकर नैनीताल में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए प्रशासन और परिवहन विभाग ने व्यवस्थाएं बढ़ा दी हैं। हल्द्वानी-काठगोदाम डिपो की ओर से नैनीताल रूट पर 19 बसों का संचालन किया गया है। इन बसों से दो-दो चक्कर लगवाए गए, ताकि बड़ी संख्या में नैनीताल जाने वाले यात्रियों को आवागमन में परेशानी न हो।
नंदा देवी महोत्सव का आयोजन 16 सितंबर से किया जा रहा था और बुधवार 23 सितंबर को इसका समापन होना है। महोत्सव के अंतिम दिन धार्मिक आस्था के साथ-साथ पारंपरिक शोभायात्रा मुख्य आकर्षण रहेगी। सुबह मां नंदा-सुनंदा की पूजा-अर्चना और आरती होगी। इसके बाद कन्या पूजन किया जाएगा और मां को भोग लगाया जाएगा। धार्मिक अनुष्ठानों के बाद मां नंदा-सुनंदा की प्रतिमाओं को डोले में विराजमान किया जाएगा। श्रद्धालु डोले को कंधों पर उठाकर नगर भ्रमण कराएंगे।
समापन दिवस पर नैनीताल पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संभावित संख्या को देखते हुए परिवहन व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया है। मंगलवार को ही हल्द्वानी बस स्टेशन पर नैनीताल जाने वाले यात्रियों की भीड़ देखने को मिली थी। बुधवार को महोत्सव का अंतिम दिन होने और शोभायात्रा के आयोजन के कारण यात्रियों की संख्या और बढ़ने की संभावना जताई गई है। इसी को देखते हुए हल्द्वानी-काठगोदाम डिपो ने इस रूट पर कुल 19 बसें लगाईं। एआरएम संजय पांडे के अनुसार इन बसों से दो-दो फेरे करवाए गए, जिससे अधिक से अधिक यात्रियों को नैनीताल पहुंचाया जा सके।
महोत्सव के अंतिम दिन मां नंदा-सुनंदा के डोले का नगर भ्रमण धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ शोभायात्रा में शामिल होते हैं। नगर भ्रमण के दौरान अलग-अलग स्थानों पर श्रद्धालु मां के दर्शन करते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। इसके बाद परंपरा के अनुसार प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। भवाली में भी सात दिन तक चले आयोजन के समापन पर मां नंदा-सुनंदा की प्रतिमाओं को नगर भ्रमण कराने के बाद शिप्रा नदी में विसर्जित किया जाएगा।
नैनीताल में अंतिम दिन होने वाले डोला भ्रमण के लिए इस बार रूट में भी बदलाव किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए डोले को अपर माल रोड से गुजारा जाएगा। प्रस्तावित मार्ग में डीएसए मैदान पार्किंग से जामा मस्जिद मल्लीताल, पुराना घोड़ा स्टैंड, अपर माल रोड, तल्लीताल डांठ और तल्लीताल बाजार सहित कई प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। इसके बाद डोला वापस तल्लीताल बाजार और अपर माल रोड होते हुए शहर के अन्य हिस्सों से गुजरेगा।
शोभायात्रा के दौरान शहर के प्रमुख बाजारों और धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ रहने की संभावना है। डोला बड़ा बाजार, जयलाल साह बाजार, खड़ी बाजार, जामा मस्जिद और नैना देवी मंदिर होते हुए गोलज्यू मंदिर और ठंडी सड़क की ओर जाएगा। यहां पूजा-अर्चना के बाद मां नंदा-सुनंदा की प्रतिमाओं का नैनी झील में विसर्जन किया जाएगा। आयोजन को देखते हुए प्रशासन और आयोजन समिति की ओर से सुरक्षा तथा यातायात व्यवस्था को लेकर तैयारियां की गई हैं।
महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और शहर में सुगम आवागमन को लेकर भी प्रशासन ने कदम उठाए हैं। नैनीताल, भवाली और भीमताल नगर क्षेत्रों में 23 सितंबर को स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र और विश्वविद्यालयों में एक दिन का अवकाश घोषित किया गया है। इसका उद्देश्य डोला विसर्जन और शोभायात्रा के दौरान संभावित भीड़ को देखते हुए छात्र-छात्राओं के आवागमन को सुरक्षित और व्यवस्थित रखना भी है।
नंदा देवी महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि कुमाऊं क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व भी है। हर साल महोत्सव के दौरान मां नंदा और सुनंदा की पूजा के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु नैनीताल और आसपास के क्षेत्रों में पहुंचते हैं। अंतिम दिन डोला यात्रा और विसर्जन के साथ कई दिनों से चल रहे धार्मिक कार्यक्रमों का समापन होता है। इस दौरान स्थानीय लोगों के साथ बाहर से आने वाले श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में शामिल होते हैं।
भवाली में भी महोत्सव के अंतिम दिन सुबह से धार्मिक कार्यक्रम होंगे। पूजा और आरती के बाद कन्या पूजन और भोग लगाया जाएगा। इसके बाद दोपहर में मां नंदा-सुनंदा की प्रतिमाओं को डोले में रखा जाएगा। भक्त डोले को कंधों पर उठाकर नगर भ्रमण कराएंगे। नगर भ्रमण के बाद शिप्रा नदी में प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा। महोत्सव समिति के अध्यक्ष मनीष साह ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील की है।
महोत्सव के दौरान मंगलवार को बच्चों के लिए फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। प्रतियोगिताओं में सफल प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इसके बाद अब बुधवार का दिन महोत्सव के सबसे महत्वपूर्ण दिनों में शामिल है, क्योंकि इसी दिन मां नंदा-सुनंदा की शोभायात्रा और विसर्जन के साथ आयोजन का विधिवत समापन होगा।
नैनीताल की भौगोलिक स्थिति और पहाड़ी मार्गों को देखते हुए अंतिम दिन परिवहन व्यवस्था का महत्व और बढ़ जाता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के एक साथ पहुंचने से बस स्टेशन और शहर के प्रवेश मार्गों पर दबाव बढ़ सकता है। इसी कारण हल्द्वानी से अतिरिक्त बसों की व्यवस्था की गई है। 19 बसों को दो-दो चक्कर लगाने के निर्देश के पीछे मुख्य उद्देश्य यही है कि यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन की पर्याप्त सुविधा मिल सके और नैनीताल जाने वालों को लंबे समय तक बस का इंतजार न करना पड़े।
महोत्सव के अंतिम दिन श्रद्धालुओं के साथ पर्यटकों की आवाजाही भी बढ़ सकती है। सितंबर के अंतिम सप्ताह में नैनीताल आने वाले पर्यटकों के लिए भी बुधवार का दिन शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को देखने का अवसर रहेगा। हालांकि भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए लोगों के लिए प्रशासन की ओर से निर्धारित यातायात व्यवस्था का पालन करना महत्वपूर्ण होगा।
नैनीताल जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार जिले में आपदा नियंत्रण के लिए 1077 हेल्पलाइन उपलब्ध है। पहाड़ी क्षेत्र में यात्रा के दौरान मौसम और सड़क की स्थिति को ध्यान में रखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
कुल मिलाकर नंदा देवी महोत्सव का अंतिम दिन नैनीताल और भवाली दोनों जगह धार्मिक आस्था, पारंपरिक शोभायात्रा और सांस्कृतिक उत्सव का केंद्र रहेगा। मां नंदा-सुनंदा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने की संभावना को देखते हुए परिवहन व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। हल्द्वानी-काठगोदाम डिपो की 19 अतिरिक्त बसें यात्रियों को नैनीताल पहुंचाने और वापस लाने में मदद करेंगी। सुबह पूजा-अर्चना और कन्या पूजन से शुरू होने वाला कार्यक्रम दोपहर की भव्य शोभायात्रा, नगर भ्रमण और अंत में प्रतिमा विसर्जन के साथ पूरा होगा।











