UNGA में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने गाजा की मानवीय स्थिति को लेकर ट्रंप के शांति दावे पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि मानवीय सहायता की पहुंच में पर्याप्त सुधार नहीं हुआ। व्हाइट हाउस ने ट्रंप की भूमिका और 20 सूत्री योजना का बचाव किया।
न्यूयॉर्क: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में गाजा की मानवीय स्थिति को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति संबंधी दावों पर सवाल उठाया। 22 सितंबर को अपने भाषण में मैक्रों ने कहा कि गाजा में मानवीय सहायता की स्थिति में पर्याप्त सुधार नहीं हुआ है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निष्क्रियता उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने मौजूदा स्थिति को ऐसी तस्वीर बताया जो पूरी दुनिया के लिए शर्म की बात होनी चाहिए।
मैक्रों की टिप्पणी ट्रंप के उसी दिन UNGA में दिए गए भाषण के कुछ घंटे बाद आई। ट्रंप ने अपने संबोधन में दावा किया था कि गाजा का युद्ध समाप्त हो गया है और उनके 20 सूत्री शांति कार्यक्रम ने संघर्ष को खत्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। व्हाइट हाउस ने बाद में ट्रंप के रुख का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने इजराइल और हमास के बीच युद्ध रोकने, बंधकों की रिहाई और गाजा के लिए अपनी शांति योजना को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई है।
मैक्रों ने गाजा की मानवीय स्थिति पर क्या कहा?
UNGA के मंच से मैक्रों ने कहा कि अगर गाजा में शांति का दावा किया जा रहा है, तो उसके साथ मानवीय सहायता की पहुंच भी दिखाई देनी चाहिए। उनके मुताबिक, घोषित शांति के बावजूद मानवीय पहुंच में वह बदलाव नहीं आया जिसकी जरूरत थी।
Reuters के अनुसार, मैक्रों ने विशेष रूप से कहा कि घोषित शांति के बावजूद गाजा में एक भी मानवीय गलियारा दोबारा नहीं खोला गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय गाजा की स्थिति के सामने निष्क्रिय रहता है, तो उसकी विश्वसनीयता का क्या अर्थ रह जाता है।
मैक्रों का यह बयान फ्रांस के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह संयुक्त राष्ट्र में उनका राष्ट्रपति के रूप में अंतिम संबोधन था। वह अगले वर्ष फ्रांस के राष्ट्रपति पद से हटने वाले हैं।
ट्रंप ने UN में गाजा पर क्या दावा किया था?
मैक्रों के भाषण से कुछ घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी UNGA को संबोधित किया था। अपने भाषण में ट्रंप ने गाजा में युद्ध समाप्त करने का दावा किया और कहा कि इससे बड़ी संख्या में लोगों की जान बची।
ट्रंप ने अपने संबोधन में अपने 20 सूत्री शांति कार्यक्रम को गाजा में आगे की व्यवस्था और पुनर्निर्माण के लिए आधार बताया। उन्होंने यह भी कहा कि जीवित बंधकों को वापस लाया गया है और मृत बंधकों के शव उनके परिवारों तक पहुंचाए गए हैं।
हालांकि, मैक्रों ने इसी दावे के संदर्भ में जमीन पर मानवीय स्थिति को लेकर सवाल उठाए। इस तरह एक ही UN मंच से गाजा की स्थिति को लेकर अमेरिका और फ्रांस की अलग-अलग व्याख्याएं सामने आईं।
व्हाइट हाउस ने मैक्रों की आलोचना का जवाब दिया
मैक्रों की टिप्पणी के बाद व्हाइट हाउस ने ट्रंप की भूमिका का बचाव किया। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने कहा कि ट्रंप ने इजराइल और हमास के बीच युद्ध समाप्त करने में भूमिका निभाई, सभी जीवित बंधकों की रिहाई सुनिश्चित की और मारे गए बंधकों के शव उनके परिवारों तक पहुंचाए।
उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप अब गाजा के लिए अपनी 20 सूत्री शांति योजना को लागू करने की दिशा में काम कर रहे हैं। व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया में यह भी कहा गया कि जहां दूसरे लोग केवल बयान दे रहे हैं, वहीं ट्रंप ने इस मुद्दे पर सीधे काम किया।
व्हाइट हाउस का यह पक्ष मैक्रों के उस आकलन से अलग है जिसमें उन्होंने शांति के दावे और गाजा में मानवीय सहायता की वास्तविक स्थिति के बीच अंतर पर जोर दिया।
मैक्रों ने फिलिस्तीन को मान्यता देने का मुद्दा उठाया
मैक्रों ने अपने भाषण में फिलिस्तीन को मान्यता देने के सवाल का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि एक साल पहले इसी UN मंच पर कई देशों ने फिलिस्तीन को मान्यता दी थी।
उन्होंने उस समय उठाई गई आलोचना का उल्लेख किया कि केवल किसी राज्य को मान्यता देना जमीन पर परिस्थितियों को नहीं बदलता। मैक्रों का सवाल था कि यदि गाजा में मानवीय संकट बना रहता है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय कार्रवाई नहीं करता, तो फिलिस्तीन की मान्यता का व्यावहारिक महत्व कैसे सुनिश्चित होगा।
फ्रांस ने पिछले वर्ष फिलिस्तीन को मान्यता देने का फैसला किया था। मैक्रों ने UN में इस फैसले का बचाव करते हुए मान्यता को जमीन पर राजनीतिक और मानवीय कार्रवाई से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया।

वेस्ट बैंक में हिंसा और बस्तियों का मुद्दा
मैक्रों ने गाजा के साथ वेस्ट बैंक की स्थिति को भी अपने भाषण का हिस्सा बनाया। उन्होंने वहां फिलिस्तीनियों के खिलाफ जारी हिंसा और उल्लंघनों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं फिलिस्तीनी राज्य के लिए संभावित राजनीतिक समाधान को और कठिन बना रही हैं।
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि वेस्ट बैंक में होने वाली हर घटना के लिए हमास को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। हालांकि, इस टिप्पणी को लेकर इजराइल में विरोध सामने आया है। इजराइली पक्ष से यह तर्क दिया गया कि हमास का वेस्ट बैंक में शासन नहीं है, लेकिन संगठन की वहां मौजूदगी और हमलों से जुड़ी गतिविधियां रही हैं। इसलिए इस मुद्दे पर मैक्रों के बयान और इजराइली प्रतिक्रिया को अलग-अलग पक्षों के रूप में देखना जरूरी है।
इजराइल की सुरक्षा और पड़ोसी देशों की संप्रभुता
मैक्रों ने इजराइल की सुरक्षा के सवाल पर भी बात की। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों की संप्रभुता का उल्लंघन इजराइल की दीर्घकालिक सुरक्षा को मजबूत करने के बजाय उसे कमजोर कर सकता है।
उनका तर्क था कि यदि क्षेत्रीय देशों की सीमाओं और संप्रभुता का सम्मान नहीं किया जाता, तो इससे भविष्य में इजराइल की सुरक्षा के सामने नए खतरे पैदा हो सकते हैं।
फ्रांस ने पिछले एक साल में वेस्ट बैंक में इजराइली बस्तियों से जुड़े मुद्दे पर अपना रुख अधिक सख्त किया है। Reuters के मुताबिक, पेरिस ने कुछ राष्ट्रीय प्रतिबंध लगाए हैं और इजराइली बस्तियों से आने वाले उत्पादों पर रोक लगाने की प्रक्रिया भी शुरू की है।
गाजा और वेस्ट बैंक का विवाद क्यों महत्वपूर्ण है?
गाजा पट्टी और वेस्ट बैंक इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष के दो प्रमुख क्षेत्र हैं। 1967 के युद्ध के बाद वेस्ट बैंक, पूर्वी यरुशलम और गाजा इजराइली नियंत्रण में आ गए थे। बाद में फिलिस्तीनी नेतृत्व ने इन क्षेत्रों को भविष्य के फिलिस्तीनी राज्य के हिस्से के रूप में देखा।
आज भी इन क्षेत्रों की स्थिति, सीमाएं, सुरक्षा व्यवस्था, बस्तियां और यरुशलम की स्थिति इजराइल-फिलिस्तीन विवाद के मुख्य मुद्दों में शामिल हैं।
इजराइल की सुरक्षा चिंताएं और फिलिस्तीनी राज्य की मांग के बीच संतुलन तलाशना अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के सामने लंबे समय से चुनौती रहा है।
समझौते में प्रमुख अड़चनें क्या हैं?
इजराइल और फिलिस्तीन के बीच स्थायी राजनीतिक समझौते के रास्ते में कई मुद्दे लगातार विवाद का कारण बने हुए हैं।
पहला मुद्दा—इजराइली बस्तियां: वेस्ट बैंक में इजराइली बस्तियों का विस्तार भविष्य की सीमा और संभावित फिलिस्तीनी राज्य की भौगोलिक निरंतरता से जुड़ा प्रमुख विवाद है।
दूसरा मुद्दा—यरुशलम: इजराइल और फिलिस्तीन दोनों यरुशलम को अपने राष्ट्रीय और राजनीतिक दावों से जोड़ते हैं।
तीसरा मुद्दा—सुरक्षा: इजराइल सुरक्षा और हमलों के खतरे को लेकर अपनी नीतियों को उचित ठहराता है, जबकि फिलिस्तीनी पक्ष सुरक्षा नीतियों और सैन्य कार्रवाई को अपने अधिकारों के लिए बाधा मानता है।
चौथा मुद्दा—फिलिस्तीनी राज्य: फिलिस्तीनी पक्ष स्वतंत्र राज्य की मांग करता है, जबकि इजराइली राजनीति में फिलिस्तीनी राज्य के स्वरूप और भविष्य को लेकर गहरा मतभेद है।
UNGA में गाजा पर बढ़ता अंतरराष्ट्रीय दबाव
इस वर्ष UN महासभा में गाजा और व्यापक मध्य पूर्व संकट प्रमुख मुद्दों में रहे। UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी अपने अंतिम महासभा संबोधन में गाजा सहित मध्य पूर्व के संघर्षों को समाप्त करने और मानवीय प्रतिक्रिया को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने इजराइल-फिलिस्तीन के लिए दो-राज्य समाधान के समर्थन को दोहराया।
तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन समेत अन्य नेताओं ने भी फिलिस्तीन और गाजा की स्थिति को अपने संबोधनों में प्रमुखता दी। इससे स्पष्ट है कि इस महासभा में गाजा का मानवीय संकट और फिलिस्तीनी राज्य का सवाल अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में बना हुआ है।
मैक्रों और ट्रंप के बयानों से क्या तस्वीर सामने आई?
UNGA में मैक्रों और ट्रंप के बयानों ने गाजा की मौजूदा स्थिति को लेकर दो अलग दृष्टिकोण सामने रखे। ट्रंप ने अपने 20 सूत्री कार्यक्रम और युद्ध समाप्त होने के दावे पर जोर दिया, जबकि मैक्रों ने मानवीय सहायता की पहुंच और जमीन पर स्थिति को शांति के दावे की कसौटी बताया।
इस विवाद का अगला महत्वपूर्ण पहलू यह होगा कि गाजा में मानवीय सहायता की पहुंच, सुरक्षा व्यवस्था, पुनर्निर्माण और राजनीतिक भविष्य को लेकर घोषित योजनाएं जमीन पर किस तरह लागू होती हैं।
फिलहाल UNGA के मंच से मैक्रों का संदेश यह रहा कि किसी भी शांति पहल का आकलन केवल राजनीतिक घोषणा से नहीं, बल्कि नागरिकों की स्थिति और मानवीय सहायता की वास्तविक पहुंच से भी किया जाना चाहिए। वहीं व्हाइट हाउस का कहना है कि ट्रंप की योजना के तहत युद्ध समाप्त करने, बंधकों की वापसी और गाजा के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।











