दिल्ली-एनसीआर के विकास को गति देने के उद्देश्य से आयोजित बहुप्रतीक्षित नेशनल कैपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड (National Capital Region Planning Board) की 42वीं बैठक मंगलवार को संपन्न हुई। इस बैठक में क्षेत्रीय विकास और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े कई अहम फैसलों पर सहमति बनी।
नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के भविष्य को लेकर मंगलवार को हुई नेशनल कैपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड (NCR Planning Board) की 42वीं बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। इस बैठक में पर्यावरण सुधार, ट्रांसपोर्ट सिस्टम के विस्तार और क्षेत्रीय विकास योजना 2041 को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। सबसे बड़ा निर्णय यह रहा कि एनसीआर का भौगोलिक दायरा घटाया नहीं जाएगा और इसे मौजूदा स्वरूप में ही बनाए रखा जाएगा।
बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री ने की, जबकि इसमें हरियाणा के मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini, उत्तर प्रदेश के नगर विकास मंत्री A.K. Sharma और राजस्थान के नगरीय विकास मंत्री Jhabar Singh Kharra सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
BS-1, BS-2 और BS-3 वाहनों पर बड़ा फैसला
बैठक में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सबसे अहम निर्णय वाहन उत्सर्जन मानकों को लेकर लिया गया। इसके तहत BS-1, BS-2 और BS-3 श्रेणी के वाहनों को धीरे-धीरे एनसीआर की सड़कों से हटाने पर सहमति बनी है। वहीं, BS-6 वाहनों को बढ़ावा देने की नीति को सख्ती से लागू किया जाएगा। सरकार की योजना के अनुसार, BS-4 वाहनों को एनसीआर से बाहर अन्य जिलों में बेचा जा सकेगा, लेकिन उन्हें वर्तमान क्षेत्र में सीमित किया जाएगा। इस कदम को प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है।
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रीजनल प्लान 2041 दो महीने में होगा जारी
केंद्रीय मंत्री ने जानकारी दी कि आने वाले दो महीनों में रीजनल प्लान 2041 को अंतिम रूप देकर जारी कर दिया जाएगा। इस योजना में शहरीकरण, परिवहन, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाने की रूपरेखा तय की गई है। यह योजना आने वाले दो दशकों में एनसीआर की बढ़ती आबादी और शहरी दबाव को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में एनसीआर की आबादी लगभग 7.5 करोड़ है, जो अगले 15 वर्षों में लगभग दोगुनी हो सकती है।
बैठक में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। इसके तहत मेट्रो सेवाओं और नमो भारत रेल नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। योजना के अनुसार, एनसीआर के प्रत्येक राज्य के चार प्रमुख शहरों को हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इस परियोजना के लिए लगभग 5000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इससे न केवल यात्रा समय कम होगा, बल्कि सड़क यातायात पर भी दबाव घटेगा।
बैठक में अरावली क्षेत्र को लेकर भी स्पष्ट नीति तय की गई। सरकार ने कहा कि फॉरेस्ट एरिया में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा और ग्रीन कवर बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह कदम पर्यावरण संतुलन और जलवायु सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।











