मणिपुर में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) के स्थायी परिसर को काकचिंग स्थानांतरित किए जाने की संभावित योजना पर सियासी विवाद गहरा गया है। कांग्रेस ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि वर्षों की योजना, भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
इम्फाल: मणिपुर में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) मणिपुर के स्थायी परिसर को वर्तमान आवंटित स्थान से काकचिंग स्थानांतरित किए जाने की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। मणिपुर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए राज्य सरकार पर पहले से किए गए भूमि अधिग्रहण, आधारभूत ढांचे के विकास और सार्वजनिक संसाधनों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। इंफाल स्थित कांग्रेस भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व मुख्यमंत्री एवं एमपीसीसी अध्यक्ष ओकराम इबोबी सिंह ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में NIT मणिपुर के स्थायी परिसर के लिए व्यापक योजना बनाई गई थी। उन्होंने दावा किया कि परियोजना के लिए आवश्यक भूमि का विधिवत अधिग्रहण किया गया था और संबंधित राजस्व प्रक्रियाएं भी पूरी कर ली गई थीं।
341.5 एकड़ भूमि पहले ही की जा चुकी थी आवंटित
पूर्व मुख्यमंत्री इबोबी सिंह ने बताया कि वर्ष 2014-15 के दौरान NIT मणिपुर के स्थायी परिसर के लिए लगभग 341.5 एकड़ भूमि आधिकारिक रूप से आवंटित की गई थी। इस भूमि के रिकॉर्ड तैयार किए गए और प्रभावित भूमि मालिकों को नियमानुसार मुआवजा भी दिया गया। उन्होंने कहा कि इतने बड़े स्तर पर भूमि अधिग्रहण और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करने में काफी समय और संसाधन लगे थे। ऐसे में यदि अब परिसर को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाता है तो इससे पहले किए गए प्रयासों का महत्व कम हो जाएगा। इबोबी सिंह ने सरकार से स्पष्ट करने की मांग की कि जब स्थायी परिसर के लिए पर्याप्त भूमि पहले से उपलब्ध है तो उसे किसी अन्य जिले में स्थानांतरित करने की आवश्यकता क्यों महसूस की जा रही है।
पूर्व शिक्षा मंत्री ने भी उठाए सवाल
प्रेस वार्ता में पूर्व शिक्षा मंत्री मोइरांगथेम ओकेंद्रो ने भी प्रस्तावित स्थानांतरण पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा काकचिंग में NIT का स्थायी परिसर स्थापित करने संबंधी बयान कई सवाल खड़े करता है। ओकेंद्रो के अनुसार, वर्तमान स्थल पर जलभराव की समस्या केवल उस हिस्से तक सीमित थी जहां अस्थायी बैरक बनाए गए थे। उन्होंने कहा कि पूरे परिसर को अनुपयुक्त बताना वास्तविक स्थिति को सही ढंग से प्रस्तुत नहीं करता। उन्होंने बताया कि जब वर्ष 2014-15 में परियोजना की योजना बनाई गई थी, तब अस्थायी भवन केवल सीमित अवधि के लिए बनाए गए थे ताकि बाद में उसी परिसर में स्थायी इमारतों का निर्माण किया जा सके।
स्थायी निर्माण कार्य शुरू होने का दावा
पूर्व शिक्षा मंत्री ने दावा किया कि आवंटित भूमि पर स्थायी ढांचे के निर्माण की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी थी। उन्होंने कहा कि यदि निर्माण कार्य आगे बढ़ रहा था तो सरकार को पहले उसकी प्रगति की समीक्षा करनी चाहिए थी। उनका कहना था कि बिना विस्तृत तकनीकी मूल्यांकन और सार्वजनिक चर्चा के परिसर को दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने का निर्णय उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों में वर्तमान सरकार ने स्थायी परिसर के विकास को अपेक्षित गति नहीं दी और अब नए स्थान का प्रस्ताव सामने रखा जा रहा है।
कांग्रेस ने सार्वजनिक चर्चा की मांग की
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि NIT मणिपुर केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं बल्कि राज्य के तकनीकी शिक्षा विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजना है। इसलिए इससे संबंधित किसी भी बड़े निर्णय से पहले सभी हितधारकों से व्यापक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए।
पार्टी ने विशेष रूप से छात्र संगठनों, शिक्षाविदों और स्थानीय समुदायों से इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा करने की अपील की है ताकि भविष्य में किसी भी निर्णय का व्यापक प्रभाव समझा जा सके। कांग्रेस का मानना है कि यदि पहले से उपलब्ध भूमि और निर्माण कार्य का प्रभावी उपयोग किया जाए तो परियोजना को शीघ्र पूरा किया जा सकता है।
सरकार की ओर से क्या कहा गया?
राज्य सरकार की ओर से सामने आई जानकारी के अनुसार, वर्तमान स्थल पर जलभराव जैसी तकनीकी समस्याओं को देखते हुए वैकल्पिक स्थान पर विचार किया जा रहा है। हालांकि सरकार की ओर से विस्तृत आधिकारिक घोषणा या अंतिम निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है। सरकारी पक्ष का कहना है कि किसी भी परियोजना का उद्देश्य छात्रों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है और यदि तकनीकी कारणों से स्थान परिवर्तन आवश्यक होता है तो उस पर विचार किया जा सकता है।
NIT मणिपुर का महत्व
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) मणिपुर देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में शामिल है। यहां इंजीनियरिंग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जुड़े विभिन्न पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं। स्थायी परिसर बनने से आधुनिक प्रयोगशालाएं, छात्रावास, अनुसंधान सुविधाएं और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े शैक्षणिक संस्थान का स्थान तय करते समय भौगोलिक परिस्थितियों, बुनियादी ढांचे, पर्यावरणीय जोखिम, पहुंच और भविष्य की विस्तार क्षमता जैसे सभी पहलुओं का संतुलित मूल्यांकन आवश्यक होता है।
आगे क्या हो सकता है?
NIT मणिपुर परिसर के प्रस्तावित स्थानांतरण को लेकर अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा तेज होने की संभावना है। यदि सरकार इस दिशा में आगे बढ़ती है तो उसे तकनीकी रिपोर्ट, परियोजना की वर्तमान स्थिति और सार्वजनिक हित से जुड़े सभी पहलुओं को स्पष्ट करना होगा। वहीं विपक्ष इस मुद्दे को शिक्षा, सार्वजनिक निवेश और प्रशासनिक पारदर्शिता से जोड़कर सरकार से जवाब मांग रहा है। आने वाले दिनों में सरकार की आधिकारिक स्थिति और संभावित निर्णय पर सभी की नजर रहेगी।











