नोएडा के फेज-1 थाना क्षेत्र में बैंक प्रबंधक पर कंपनी के खाते से एक करोड़ रुपये से अधिक की रकम कथित तौर पर निकालकर अपने परिचितों और रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर करने का आरोप लगा है। मामले में कंपनी के निदेशक की शिकायत पर कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने बैंक प्रबंधक समेत छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने FIR दर्ज करने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है।
मामला सेक्टर-2 स्थित हरित रियलटेक प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। कंपनी के निदेशक सौरभ राणा ने कोर्ट में शिकायत दाखिल कर आरोप लगाया कि नरेंद्र कुमार ने वर्ष 2014 के आसपास खुद को इंडियन बैंक का प्रबंधक बताते हुए कंपनी के निदेशकों से संपर्क किया था। शिकायत के मुताबिक उसने कंपनी का बैंक खाता खुलवाने और बैंकिंग से जुड़े दूसरे कामों में मदद करने का भरोसा दिलाया। इसके बाद धीरे-धीरे उसने कंपनी के निदेशकों का विश्वास हासिल कर लिया।
शिकायत में कहा गया है कि कंपनी के निदेशक बैंक से जुड़े कामों के लिए नियमित रूप से शाखा जाते थे। समय बीतने के साथ नरेंद्र कुमार कंपनी के बैंकिंग और लेखा संबंधी कामों में मदद करने लगा। आरोप है कि इसी भरोसे का फायदा उठाकर उसने कंपनी के हस्ताक्षर किए हुए चेक अपने पास रख लिए। उसने कंपनी के बैंकिंग काम को आसान बनाने और अकाउंटिंग में सहायता करने की बात भी कही थी।
कंपनी के निदेशक का आरोप है कि नरेंद्र कुमार ने बाद में अपनी पत्नी और अन्य परिचितों के खातों में रकम ट्रांसफर करानी शुरू कर दी। शिकायत के मुताबिक कंपनी के बैंक खातों से रकम केवल आरोपी के निजी खाते में ही नहीं गई, बल्कि कई दूसरे लोगों के खातों में भी ट्रांसफर की गई। कंपनी को इस कथित वित्तीय अनियमितता की जानकारी बाद में बैंक खातों और रिकॉर्ड की जांच के दौरान हुई।
बताया गया है कि अप्रैल 2026 में कंपनी ने अपने बैंक खातों और ऑडिट रिकॉर्ड का आंतरिक सत्यापन कराया। इसी जांच के दौरान कथित वित्तीय गड़बड़ी सामने आई। रिकॉर्ड की पड़ताल में अलग-अलग खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर किए जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद कंपनी की ओर से मामले को लेकर कार्रवाई की कोशिश की गई और अंततः कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।
पुलिस में दर्ज मामले के मुताबिक नरेंद्र कुमार के खाते में 61 लाख 41 हजार 484 रुपये ट्रांसफर किए जाने का आरोप है। इसके अलावा रेनू अग्रवाल के खाते में 10 लाख रुपये, मीनाक्षी श्योराण के खाते में 3 लाख रुपये, संजय चौहान के खाते में 8 लाख रुपये, लोकेंद्र कुमार के खाते में 5.10 लाख रुपये और राहुल कुमार के खाते में 16.50 लाख रुपये ट्रांसफर किए जाने की बात शिकायत में कही गई है। इन रकम को जोड़ने पर कुल राशि 1 करोड़ 4 लाख 51 हजार 484 रुपये बैठती है।
कंपनी की ओर से लगाए गए आरोपों के अनुसार, यह रकम अलग-अलग खातों में ऐसे समय ट्रांसफर की गई जब आरोपी कंपनी के बैंकिंग कामकाज से परिचित था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि बैंक प्रबंधक ने कंपनी के साथ बने विश्वास का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए किया। हालांकि, इन आरोपों की पूरी सच्चाई पुलिस की जांच और उपलब्ध बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
मामले में कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने बैंक प्रबंधक समेत छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कंपनी के खाते से रकम किन परिस्थितियों में ट्रांसफर हुई, इन लेनदेन में किस-किस व्यक्ति की भूमिका थी और अलग-अलग खातों में भेजी गई रकम का आगे क्या इस्तेमाल किया गया।
जांच में बैंक के लेनदेन रिकॉर्ड, चेक, खाते से जुड़े दस्तावेज और संबंधित लोगों के बैंक खातों की जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती है। पुलिस यह भी देख सकती है कि रकम ट्रांसफर करने के लिए किस माध्यम का इस्तेमाल हुआ और क्या सभी लेनदेन कंपनी की अनुमति से किए गए थे या नहीं। शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों से की जाएगी।
थाना प्रभारी धर्मेंद्र शुक्ला के अनुसार, मामले में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आरोपियों की भूमिका तय करेगी।
इस पूरे मामले में खास बात यह है कि कथित वित्तीय अनियमितता का खुलासा तत्काल नहीं हुआ, बल्कि कंपनी के स्तर पर बैंक खातों और ऑडिट रिकॉर्ड का सत्यापन किए जाने के बाद मामला सामने आया। शिकायतकर्ता का कहना है कि कई वर्षों तक आरोपी कंपनी के निदेशकों के संपर्क में रहा और बैंकिंग से जुड़े कामों में सहायता करता रहा। इसी दौरान उसने कंपनी के बैंक खातों तक पहुंच और लेनदेन से जुड़ी जानकारी हासिल की।
शिकायत के अनुसार, शुरुआत में कंपनी के निदेशकों को आरोपी पर भरोसा था। वह बैंकिंग कार्यों में सहयोग करता था और कंपनी के बैंक खाते से जुड़े कामों में मदद करता था। आरोप है कि इसी भरोसे के कारण उसे हस्ताक्षर किए हुए चेक तक उपलब्ध कराए गए। बाद में इसी व्यवस्था का कथित तौर पर दुरुपयोग करते हुए कंपनी के खाते से अलग-अलग खातों में रकम भेजी गई।
पुलिस के सामने अब यह भी महत्वपूर्ण सवाल होगा कि कंपनी के बैंक खाते से रकम ट्रांसफर करने के लिए किन दस्तावेजों या बैंकिंग माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। अगर चेक के जरिए लेनदेन हुआ है तो उनकी जांच की जाएगी और यदि डिजिटल बैंकिंग माध्यमों से रकम भेजी गई है तो संबंधित ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि रकम किस तारीख को, किस खाते में और किस प्रक्रिया के तहत पहुंची।
मामले में जिन अन्य लोगों के खातों में रकम पहुंचने का आरोप है, उनसे भी पुलिस पूछताछ कर सकती है। जांच का एक अहम हिस्सा यह होगा कि इन खाताधारकों को रकम भेजे जाने की जानकारी थी या नहीं। पुलिस यह भी जांच करेगी कि उनके और मुख्य आरोपी के बीच किस तरह का संबंध था और रकम ट्रांसफर होने के बाद उसे आगे कहीं भेजा गया या नहीं।
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बैंकिंग दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कंपनी के खाते से कितनी रकम और किस तरीके से निकाली गई। साथ ही जांच में यह भी सामने आएगा कि मामले में नामजद सभी लोगों की भूमिका क्या रही।
कंपनी की शिकायत में एक करोड़ रुपये से अधिक की रकम के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है। इसलिए यह मामला केवल बैंक खाते से रकम ट्रांसफर होने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बैंकिंग प्रक्रिया, कंपनी के आंतरिक नियंत्रण और कई अलग-अलग खातों में रकम पहुंचने की पूरी कड़ी की जांच की जानी है।
पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों पर अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल अदालत के आदेश पर FIR दर्ज होने के बाद मामले की विवेचना जारी है और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी।








