संसद बजट सत्र 2026 के तहत आज लोकसभा में कॉर्पोरेट कानून संशोधन विधेयक पेश होगा। इससे स्टार्टअप (startup) और छोटे उद्योगों को राहत मिलने की उम्मीद है और व्यापार माहौल बेहतर बनाने की दिशा में कदम बढ़ेगा।
New Delhi: संसद के बजट सत्र (Budget Session) 2026 के तहत आज का दिन काफी अहम माना जा रहा है। लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे फिर से शुरू होगी, जहां सरकार की ओर से एक महत्वपूर्ण कॉर्पोरेट कानून (Corporate Law) संशोधन विधेयक पेश किया जाएगा। इस विधेयक से खास तौर पर स्टार्टअप (startup) और छोटे उद्योगों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
लोकसभा में पेश होगा कॉर्पोरेट कानून संशोधन विधेयक
आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करेंगी। इस विधेयक में सीमित देयता भागीदारी अधिनियम, 2008 (Limited Liability Partnership Act, 2008) और कंपनी अधिनियम, 2013 (Companies Act, 2013) में बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है।
सरकार का मानना है कि इन बदलावों से व्यापार करने में आसानी यानी ease of doing business को और मजबूत किया जा सकेगा। खासतौर पर छोटे कारोबारियों और नए उद्यमियों को इससे सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।
स्टार्टअप और छोटे उद्योगों को कैसे मिलेगा फायदा
इस प्रस्तावित विधेयक का मुख्य उद्देश्य छोटे कारोबारों और स्टार्टअप के लिए नियमों को सरल बनाना है। अभी कई छोटे तकनीकी या प्रक्रियात्मक उल्लंघन भी आपराधिक श्रेणी में आते हैं, जिससे उद्यमियों को परेशानी होती है।
नए संशोधन के तहत ऐसे कई छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाकर नागरिक दंड (civil penalty) में बदलने की योजना है। इससे कंपनियों पर कानूनी दबाव कम होगा और वे अपने व्यवसाय पर ज्यादा ध्यान दे पाएंगी। इसके अलावा compliance (अनुपालन) से जुड़े नियमों को भी आसान बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं ताकि छोटे उद्योगों पर अनावश्यक बोझ कम हो सके।
वित्त विधेयक 2026-27 पर भी होगी चर्चा

आज के एजेंडे में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वित्त विधेयक (Finance Bill) पर चर्चा भी शामिल है। वित्त मंत्री लोकसभा में इस विधेयक पर विचार करने और इसे पारित करने का प्रस्ताव रखेंगी। यह विधेयक सरकार की आर्थिक नीतियों और योजनाओं को लागू करने के लिए जरूरी होता है। इसके जरिए टैक्स, खर्च और अन्य वित्तीय प्रावधानों को अंतिम रूप दिया जाता है।
कंपनी और एलएलपी कानून में बदलाव का महत्व
कंपनी अधिनियम, 2013 देश में कंपनियों के गठन, संचालन, प्रबंधन और विघटन को नियंत्रित करता है। वहीं सीमित देयता भागीदारी अधिनियम, 2008 साझेदारी आधारित व्यवसायों को सीमित देयता के साथ लचीलापन प्रदान करता है।
नए संशोधन के जरिए इन दोनों कानूनों को और व्यावहारिक और व्यापार के अनुकूल बनाने की कोशिश की जा रही है। इससे निवेश (investment) को बढ़ावा मिलने और कारोबारी माहौल बेहतर होने की उम्मीद है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल से मिल चुकी है मंजूरी
इस विधेयक को पहले ही केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) की मंजूरी मिल चुकी है। 10 मार्च को हुई बैठक में इसे हरी झंडी दी गई थी, जिसके बाद अब इसे संसद में पेश किया जा रहा है। इससे साफ है कि सरकार इस सुधार को जल्द लागू करना चाहती है ताकि उद्योग और व्यापार से जुड़े लोगों को जल्दी राहत मिल सके।
संसद सत्र की पिछली कार्यवाही का अपडेट
पिछले सप्ताह संसद की कार्यवाही में भी कई अहम घटनाएं हुईं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आठ विपक्षी सांसदों का निलंबन रद्द कर दिया था, जिन्हें अनुशासनहीनता के कारण निलंबित किया गया था। वहीं राज्यसभा में 20 राज्यों के 59 सदस्यों को विदाई दी गई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में इन सदस्यों के योगदान की सराहना की और कहा कि संसदीय लोकतंत्र में उनके कार्य को हमेशा याद रखा जाएगा।
इसके बाद संसद की कार्यवाही को 23 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया गया था, जो आज फिर से शुरू हो रही है। सरकार लगातार इस दिशा में काम कर रही है कि भारत में व्यापार करना और आसान बने। कॉर्पोरेट कानूनों में यह संशोधन उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।










