प्रदूषण और ठंडी हवा मिलकर सांस की बीमारियों वाले लोगों के लिए हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि PM2.5 और PM10 कण फेफड़ों में सूजन और हार्ट पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं। समय पर सावधानी, मास्क और डॉक्टर की सलाह से इस जोखिम को कम किया जा सकता है।
हार्ट अटैक का बढ़ता खतरा: दिल्ली और अन्य प्रदूषित शहरों में ठंडी हवा और बढ़ते वायु प्रदूषण ने सांस की बीमारियों वाले मरीजों में हार्ट अटैक के केस बढ़ा दिए हैं। डॉ. सुभाष गिरि, आरएमएल हॉस्पिटल के मेडिसिन डायरेक्टर के अनुसार, हवा में PM2.5 और PM10 कण फेफड़ों में सूजन और ऑक्सीजन की कमी पैदा कर हार्ट पर दबाव डाल रहे हैं। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि समय पर सावधानी, मास्क, एयर प्यूरीफायर और चिकित्सकीय मार्गदर्शन मरीजों को सुरक्षित रख सकता है।
प्रदूषण कैसे बढ़ा रहा हार्ट अटैक का खतरा
डॉ. सुभाष गिरि, आरएमएल हॉस्पिटल के मेडिसिन डायरेक्टर, बताते हैं कि हवा में PM2.5 और PM10 कण फेफड़ों में सूजन पैदा करते हैं। पहले से फेफड़ों की क्षमता कम होने वाले मरीजों में यह सूजन हार्ट पर अतिरिक्त दबाव डालती है। ऑक्सीजन की कमी और ब्लड प्रेशर अस्थिर होने से हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ जाता है। प्रदूषण शरीर में इन्फ्लेमेशन भी बढ़ाता है, जिससे ब्लड वेसल्स में ब्लॉकेज का खतरा होता है।

लक्षण और पहचान
सांस की बीमारी वाले मरीजों में हार्ट अटैक के लक्षण अक्सर सामान्य से अलग होते हैं। अचानक सांस फूलना, सीने में भारीपन, गर्दन या पीठ में दर्द, हाथों में कमजोरी, अत्यधिक थकान, चक्कर आना और असामान्य पसीना प्रमुख संकेत हैं। डॉ. सुभाष कहते हैं कि इन संकेतों को हल्के में लेने से गंभीर स्थिति बन सकती है, इसलिए समय पर डॉक्टर से संपर्क जरूरी है।
ठंड और प्रदूषण का कॉम्बिनेशन
डॉ. एल.एच. घोटेकर, लेडी हार्डिंग हॉस्पिटल, बताते हैं कि ठंड के मौसम में हवा भारी होती है और प्रदूषक जमीन के पास रह जाते हैं। ठंडी हवा फेफड़ों को सिकोड़ देती है और हार्ट की ब्लड वेसल्स सिकुड़ने लगती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर और हार्ट पर दबाव बढ़ता है। यही कारण है कि दिसंबर और जनवरी में हार्ट अटैक के केस बढ़ते हैं।
बचाव के उपाय
- प्रदूषण वाले दिनों में मास्क पहनें और लंबी यात्रा से बचें।
- घर में वेंटिलेशन बनाए रखें और एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें।
- ठंडी हवा में सुबह-शाम बाहर जाने से बचें।
- दवाइयां और इनहेलर समय पर लें।
- हल्की एक्सरसाइज करें, लेकिन ठंड और प्रदूषण में ओवरएक्सर्शन न करें।
- गंभीर लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल जाएं।
प्रदूषण और ठंडी हवा का कॉम्बिनेशन सांस की बीमारियों वाले लोगों के लिए गंभीर खतरा बन गया है। समय पर सावधानी, मास्क, एयर प्यूरीफायर और डॉक्टर की सलाह से हार्ट और फेफड़ों को सुरक्षित रखा जा सकता है।













