पुणे में MPSC अभ्यर्थियों का बड़ा प्रदर्शन, अध्यक्ष के इस्तीफे और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग

पुणे मे MPSC अभ्यर्थियों ने पेपर लीक और परीक्षा मे कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन किया छात्रो ने अध्यक्ष-सचिव के इस्तीफे और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की मांग

महाराष्ट्र में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और कथित पेपर लीक की जांच की मांग को लेकर MPSC अभ्यर्थियों ने पुणे में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आयोग के अध्यक्ष और सचिव के इस्तीफे, परीक्षा प्रक्रिया की जांच और संदिग्ध परीक्षाओं के फॉरेंसिक ऑडिट की मांग उठाई।

मुंबई: महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग यानी MPSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर पुणे में सोमवार को बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने, कथित प्रश्नपत्र लीक की निष्पक्ष जांच कराने और परीक्षा मूल्यांकन में सामने आई शिकायतों की समीक्षा की मांग की। अभ्यर्थियों ने ओंकारेश्वर मंदिर चौक से पुणे जिला कलेक्ट्रेट तक मार्च निकाला। वहां उन्होंने आयोग की कार्यप्रणाली और प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन से जुड़ी कई मांगें अधिकारियों के सामने रखीं। प्रदर्शनकारियों ने MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार और सचिव के इस्तीफे की मांग करते हुए आयोग में साफ छवि वाले अधिकारियों की नियुक्ति की मांग की। प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने कथित पेपर लीक, उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में गलतियों और भर्ती प्रक्रिया में संभावित अनियमितताओं को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की।

राजनीतिक नेताओं ने भी प्रदर्शन को समर्थन दिया

प्रदर्शन को विपक्षी नेताओं का भी समर्थन मिला। NCP (SP) विधायक रोहित पवार और कांग्रेस विधायक विश्वजीत कदम प्रदर्शन में शामिल हुए और अभ्यर्थियों की मांगों का समर्थन किया।

रोहित पवार ने कहा कि सरकार को छात्रों की मांगों पर कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आंदोलन किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं बल्कि MPSC अभ्यर्थियों की ओर से चलाया जा रहा प्रदर्शन है।

प्रदर्शन में अन्य राजनीतिक समर्थन भी सामने आया। हालांकि, अभ्यर्थियों की मुख्य मांग परीक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल करने और भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की है।

ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा को लेकर आठ दिन की मांग

अभ्यर्थियों ने ड्रग इंस्पेक्टर ग्रुप-B परीक्षा से संबंधित आपत्तियों पर MPSC से आठ दिन के भीतर जवाब देने की मांग की है। इसके साथ ही कथित अनियमितताओं की औपचारिक जांच शुरू करने की मांग भी की गई है।

ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा को लेकर प्रश्नपत्र लीक के आरोप सामने आने के बाद MPSC ने भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी थी और नई परीक्षा कराने की घोषणा की थी। मामले की जांच पुलिस स्तर पर भी चल रही है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े सवालों का स्पष्ट और सार्वजनिक जवाब दिया जाना जरूरी है, ताकि प्रभावित उम्मीदवारों के बीच भरोसा कायम हो सके।

2025 की राज्य सेवा और कृषि सेवा परीक्षाओं पर भी सवाल

प्रदर्शनकारियों ने केवल ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा तक अपनी मांग सीमित नहीं रखी। उन्होंने 2025 की राज्य सेवा मुख्य परीक्षा और कृषि सेवा परीक्षा में वर्णनात्मक उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में कथित गलतियों की भी जांच की मांग की।

अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि मूल्यांकन प्रक्रिया में गलतियां हुई हैं तो उनकी स्वतंत्र समीक्षा होनी चाहिए। उनका तर्क है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में छोटी सी गलती भी उम्मीदवारों के चयन और करियर पर सीधा प्रभाव डाल सकती है। इसीलिए प्रदर्शनकारी मूल्यांकन व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।

मुंबई क्राइम ब्रांच की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग

अभ्यर्थियों ने मुंबई क्राइम ब्रांच की ओर से MPSC को सौंपी गई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग भी की है।

ड्रग इंस्पेक्टर ग्रुप-B स्क्रीनिंग परीक्षा का प्रश्नपत्र कथित तौर पर परीक्षा से पहले कुछ उम्मीदवारों तक पहुंचने के आरोपों की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच कर रही है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि प्रश्नपत्र तक पहुंच कैसे बनी और उसे उम्मीदवारों तक किस तरह पहुंचाया गया।

अभ्यर्थियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने से मामले में पारदर्शिता बढ़ेगी और उम्मीदवारों को वास्तविक स्थिति समझने में मदद मिलेगी।

सात गिरफ्तारियों के बाद भी विवाद जारी

ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा पेपर लीक मामले में अब तक सात गिरफ्तारियों की जानकारी सामने आई है। शुरुआती कार्रवाई में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें MPSC के तीन अधिकारी शामिल थे। बाद में सातवीं गिरफ्तारी एक महिला उम्मीदवार की हुई, जिसने परीक्षा में सातवीं रैंक हासिल की थी।

जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि कथित रूप से लीक हुआ प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले उम्मीदवारों तक कैसे पहुंचा। पुलिस ने MPSC अधिकारियों और एक कोचिंग संस्थान से जुड़े लोगों की संभावित भूमिका की भी जांच की है।

जांच के दौरान एक MPSC अधिकारी का लैपटॉप भी बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, मामले में अंतिम जिम्मेदारी और दोष तय करना जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया का विषय है।

गिरफ्तार अधिकारियों के कार्यकाल की फॉरेंसिक जांच की मांग

प्रदर्शनकारियों ने गिरफ्तार MPSC अंडर सेक्रेटरी अभिजीत लेंडवे के कार्यकाल के दौरान आयोजित परीक्षाओं का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की है।

इसके अलावा उन्होंने लेंडवे और गिरफ्तार किए गए दो सहायक अनुभाग अधिकारियों—विश्वेश्वर दत्तात्रय नाकाटे और गोपाल भट्टू मराठे—के सेवा रिकॉर्ड और पदोन्नति से जुड़े मानदंडों की भी जांच की मांग की।

अभ्यर्थी यह जानना चाहते हैं कि संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारियों और कार्यप्रणाली की समीक्षा किस स्तर पर हुई तथा क्या परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े किसी अन्य मामले में भी अनियमितता की आशंका है।

उम्मीदवारों और बिचौलियों के संपर्क की जांच की मांग

प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर आरोपियों के संपर्क में रहे उम्मीदवारों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच की मांग भी रखी है।

इसके साथ ही उन्होंने संभावित बिचौलियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच और उन परीक्षाओं के संदिग्ध परिणामों की समीक्षा की मांग की, जिनको लेकर पहले से उम्मीदवारों ने सवाल उठाए हैं।

अभ्यर्थियों का कहना है कि जांच केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यदि किसी व्यापक नेटवर्क या प्रक्रिया की खामी के संकेत मिलते हैं तो संबंधित सभी परीक्षाओं की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।

25 अक्टूबर की ग्रुप-C परीक्षा पर भी नजर

प्रदर्शनकारियों ने 25 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित ग्रुप-C प्रारंभिक परीक्षा के लिए कड़े पारदर्शिता उपाय लागू करने की मांग की है।

उनका कहना है कि हालिया विवादों के बाद आगामी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, मूल्यांकन प्रक्रिया और परिणाम तैयार करने की व्यवस्था को मजबूत किया जाना चाहिए।

इसके अलावा अभ्यर्थियों ने स्टेनोग्राफर पद को दोबारा शुरू करने की मांग भी उठाई है।

MPSC अध्यक्ष ने इस्तीफे की मांग ठुकराई

MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार ने अपने इस्तीफे की मांग को खारिज किया है। उनका कहना है कि ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा से जुड़ा पेपर लीक उनके आयोग के अध्यक्ष पद का कार्यभार संभालने से पहले हुआ था।

भीमनवार के अनुसार, उन्होंने 18 फरवरी 2026 को अध्यक्ष पद की शपथ ली और 3 मार्च को कार्यभार संभाला, जबकि कथित पेपर लीक से जुड़ी घटना इससे पहले की है। उन्होंने कहा कि आयोग ने मामले को गंभीरता से लिया, पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और जांच शुरू कराई।

उन्होंने यह भी बताया कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए MPSC ने एक आंतरिक उच्चस्तरीय समिति गठित की है, जो सुरक्षा और रोकथाम के उपाय सुझाएगी।

सरकार ने भी बनाई उच्चस्तरीय समिति

महाराष्ट्र सरकार ने भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता, सुरक्षा और विश्वसनीयता की समीक्षा के लिए एक अलग उच्चस्तरीय समिति गठित की है। समिति छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, कोचिंग संस्थानों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव लेने वाली है।

सरकार की पहल का उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था में संभावित खामियों की पहचान करना और भविष्य में पेपर लीक तथा अन्य गड़बड़ियों को रोकने के लिए प्रणालीगत सुधार करना है।

पुणे में 7 से 10 सितंबर तक जिला कलेक्ट्रेट में एक विशेष प्रकोष्ठ के जरिए स्थानीय लोगों से सुझाव लेने की व्यवस्था भी की गई है। इसके अलावा 12 सितंबर को सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय में छात्रों से सीधे बातचीत की योजना है।

परीक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल करना चुनौती

MPSC विवाद ने महाराष्ट्र की प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एक ओर अभ्यर्थी स्वतंत्र जांच, जवाबदेही और अधिकारियों के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, वहीं आयोग और राज्य सरकार व्यवस्था में सुधार के लिए समितियां गठित करने की बात कह रहे हैं।

अब प्रदर्शनकारियों की नजर सरकार और MPSC की कार्रवाई पर है। खास तौर पर ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा से जुड़ी जांच, कथित मूल्यांकन त्रुटियों और आगामी ग्रुप-C परीक्षा में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लिए जाने वाले फैसले महत्वपूर्ण होंगे।

अंततः इस पूरे विवाद का सबसे अहम पहलू यही है कि महाराष्ट्र की भर्ती परीक्षाओं में उम्मीदवारों का भरोसा कैसे बहाल किया जाता है। निष्पक्ष जांच, स्पष्ट जवाबदेही और सुरक्षित परीक्षा प्रणाली ही इस भरोसे को मजबूत करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

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