BRICS समिट से पहले भारत आएंगे पुतिन, मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक में व्यापार से Su-57 तक चर्चा

BRICS समिट से पहले पुतिन भारत आएंगे और PM मोदी से द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। व्यापार, स्थानीय मुद्रा भुगतान, Su-57, यूक्रेन युद्ध और ऊर्जा पर चर्चा संभव है।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत आएंगे। 11 सितंबर को PM मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक होगी। बातचीत में व्यापार, आर्थिक सहयोग, स्थानीय मुद्रा में भुगतान, Su-57 लड़ाकू विमान और यूक्रेन युद्ध जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं।

नई दिल्ली: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आएंगे। नई दिल्ली में BRICS नेताओं की बैठक से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी। बातचीत में व्यापार, आर्थिक सहयोग, रक्षा और यूक्रेन युद्ध जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं। रूस के राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने पुतिन की भारत यात्रा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ प्रस्तावित मुलाकात की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि रूस भारत को अपना रणनीतिक साझेदार मानता है और दोनों देशों के संबंध मॉस्को के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।

भारत 2026 में BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। नई दिल्ली में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को आयोजित होना है। इससे पहले 11 सितंबर को मोदी और पुतिन की द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है।

यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब भारत और रूस के बीच ऊर्जा, रक्षा, व्यापार और भुगतान व्यवस्था को लेकर सहयोग लगातार चर्चा में है। दोनों देशों के बीच संबंधों पर यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी देशों के रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों का भी प्रभाव पड़ा है।

व्यापार और आर्थिक सहयोग पर रहेगा जोर

मोदी और पुतिन की बैठक में द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग प्रमुख विषयों में रह सकता है। दोनों देश आपसी कारोबार बढ़ाने, निवेश के नए अवसर तलाशने और कंपनियों के लिए बाजार तक पहुंच आसान बनाने पर चर्चा कर सकते हैं।

भारतीय कंपनियां रूस के बाजार में अपना कारोबार बढ़ाने में रुचि रखती हैं। दूसरी ओर, रूस भी भारत में अपने उत्पादों और कारोबारी गतिविधियों का विस्तार करना चाहता है।

परिवहन और लॉजिस्टिक्स से जुड़े मुद्दे भी दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारत और रूस के बीच व्यापार बढ़ने के साथ भुगतान और सामान की आवाजाही के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर भी जोर बढ़ा है।

स्थानीय मुद्राओं में भुगतान बढ़ा

क्रेमलिन के अनुसार, भारत और रूस के बीच व्यापार में दोनों देशों की स्थानीय मुद्राओं का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। रूस का कहना है कि दोनों देशों के बीच अधिकांश भुगतान अब अपनी-अपनी करेंसी में किए जा रहे हैं।

पश्चिमी वित्तीय प्रतिबंधों के बाद भारत और रूस ने डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था विकसित करने की दिशा में काम किया है। रूस के मुताबिक, दोनों देशों के व्यापार का करीब 96 प्रतिशत हिस्सा अब स्थानीय मुद्राओं में हो रहा है। इस व्यवस्था में 22 रूसी और 17 भारतीय बैंक शामिल हैं।

हालांकि, 8 सितंबर को क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने स्पष्ट किया कि रूस डॉलर को समाप्त करने की नीति नहीं अपना रहा है। उनका कहना था कि मॉस्को भुगतान के अन्य विकल्पों को बढ़ाना चाहता है।

Su-57 लड़ाकू विमान भी रूस के एजेंडे में

मोदी-पुतिन वार्ता में रक्षा सहयोग भी महत्वपूर्ण विषय हो सकता है। क्रेमलिन के प्रवक्ता पेस्कोव के अनुसार, भारत को रूस के Su-57 लड़ाकू विमान की बिक्री का मुद्दा रूस के एजेंडे में शामिल है।

Su-57 रूस का पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है। इसे स्टील्थ क्षमताओं के साथ विकसित किया गया है, जिससे इसे रडार पर पहचानना अपेक्षाकृत कठिन होता है। विमान को हवा से हवा और हवा से जमीन पर मार करने वाले आधुनिक हथियारों के इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया गया है।

इसमें आधुनिक रडार, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमताएं भी शामिल हैं। ऐसे में Su-57 की संभावित बिक्री भारत-रूस रक्षा संबंधों में एक महत्वपूर्ण मुद्दा हो सकती है।

यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया का तनाव भी चर्चा में

द्विपक्षीय बैठक में रूस-यूक्रेन युद्ध की स्थिति पर भी बातचीत की संभावना है। 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस और पश्चिमी देशों, दोनों के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को संतुलित रखने की कोशिश की है।

भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखी, जबकि अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस पर कई प्रतिबंध लगाए। रूस भारत के लिए ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है।

फारस की खाड़ी में जारी तनाव भी दोनों नेताओं की बातचीत का संभावित विषय हो सकता है। रूस के अनुसार, पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र की घटनाओं का प्रभाव केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।

पुतिन की नौ महीने में दूसरी भारत यात्रा

पुतिन इससे पहले 4 दिसंबर 2025 को भारत आए थे। मौजूदा यात्रा नौ महीने के भीतर उनकी दूसरी भारत यात्रा होगी।

दिसंबर 2025 में दिल्ली पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एयरपोर्ट पर पुतिन का स्वागत किया था। इसके बाद दोनों नेता एक ही कार से प्रधानमंत्री आवास पहुंचे, जहां मोदी ने रूसी राष्ट्रपति के सम्मान में निजी रात्रिभोज का आयोजन किया था।

मोदी ने पुतिन को रूसी भाषा में लिखी भगवद्गीता भी भेंट की थी। अगले दिन दोनों नेताओं के बीच वार्षिक शिखर वार्ता हुई, जिसमें रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और आर्थिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई थी।

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भारत-रूस संबंधों की ऐतिहासिक नींव

भारत और रूस के संबंधों की मजबूत नींव सोवियत संघ के दौर में पड़ी थी। 9 अगस्त 1971 को भारत और सोवियत संघ ने शांति, मैत्री और सहयोग संधि पर हस्ताक्षर किए थे।

इसके बाद दोनों देशों के बीच रक्षा, उद्योग और तकनीक के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा। सोवियत संघ ने भारत के औद्योगिक विकास में भी योगदान दिया। भिलाई स्टील प्लांट को दोनों देशों के औद्योगिक सहयोग के प्रमुख उदाहरणों में गिना जाता है।

भारत ने सोवियत संघ और बाद में रूस से लड़ाकू विमान, टैंक, पनडुब्बियां और मिसाइल प्रणालियां खरीदीं। लंबे समय से चला आ रहा रक्षा सहयोग आज भी दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों का महत्वपूर्ण आधार है।

यूक्रेन युद्ध के बाद बढ़ा ऊर्जा सहयोग

2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस पर व्यापक प्रतिबंध लगाए। इसके बावजूद भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात जारी रखा।

रॉयटर्स के अनुसार, 2024 में भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 70 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। जुलाई 2026 में रूस भारत के कुल कच्चे तेल आयात का 50.83 प्रतिशत हिस्सा था। उस महीने भारत ने रूस से करीब 24.7 लाख बैरल कच्चा तेल प्रतिदिन खरीदा।

इससे रूस भारत के लिए प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हो गया। हालांकि, ऊर्जा कारोबार के साथ-साथ भुगतान व्यवस्था, परिवहन और पश्चिमी प्रतिबंधों से जुड़े जोखिम भी दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

BRICS में अब 11 सदस्य देश

BRICS प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का बहुपक्षीय समूह है। वर्तमान में इसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और इंडोनेशिया शामिल हैं।

शुरुआत में इस समूह में चार देश ब्राजील, रूस, भारत और चीन शामिल थे, इसलिए इसे BRIC कहा जाता था। BRIC नाम 2001 में गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ'नील ने इस्तेमाल किया था। बाद में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद इसका नाम BRICS हुआ और हाल के विस्तार के साथ सदस्य देशों की संख्या बढ़ी।

समूह का प्रमुख उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक सहयोग को मजबूत करना है।

14 साल बाद भारत में BRICS शिखर सम्मेलन

भारत करीब 14 साल बाद BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इससे पहले 2012 में नई दिल्ली में BRICS सम्मेलन आयोजित हुआ था।

इस बार सम्मेलन के मद्देनजर राजधानी दिल्ली में सुरक्षा और यातायात के व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। विभिन्न देशों के नेताओं की आवाजाही के दौरान कई प्रमुख मार्गों पर यातायात नियंत्रित किया जा सकता है।

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी कर संभावित डायवर्जन और प्रतिबंधों की जानकारी दी है। एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्रियों को वैकल्पिक मार्गों की जानकारी रखने और यात्रा से पहले ट्रैफिक अपडेट देखने की सलाह दी गई है।

मोदी-पुतिन बैठक ऐसे समय हो रही है जब भारत एक ओर रूस के साथ अपनी पारंपरिक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ा रहा है, वहीं अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के साथ भी अपने रणनीतिक संबंध मजबूत कर रहा है। BRICS शिखर सम्मेलन इस व्यापक कूटनीतिक संतुलन के बीच भारत की भूमिका को और महत्वपूर्ण बनाएगा।

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