पूर्व मंत्री एन. रघुवीरा रेड्डी ने छात्रों और युवाओं से प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के खिलाफ एकजुट होने की अपील की। उन्होंने NEET प्रभावित छात्रों को न्याय, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और आंध्र प्रदेश-तेलंगाना के बीच जल प्रबंधन पर समन्वय की मांग की।
कुरनूल: आंध्र प्रदेश के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता एन. रघुवीरा रेड्डी ने छात्रों और युवाओं से प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं के खिलाफ एकजुट होकर लंबे समय तक आंदोलन चलाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य और देश की परीक्षा व्यवस्था में भरोसे को प्रभावित करती हैं।
कुरनूल स्थित जिला कांग्रेस पार्टी कार्यालय में रविवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में रघुवीरा रेड्डी ने केंद्र और राज्य सरकारों से प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि परीक्षा में अनियमितताओं से प्रभावित छात्रों को न्याय मिलने तक अपनी आवाज उठाते रहना चाहिए।
पेपर लीक के खिलाफ छात्रों को संगठित होने की अपील
रघुवीरा रेड्डी ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाएं युवाओं के लिए रोजगार और बेहतर भविष्य का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे में प्रश्नपत्र लीक होने से उन छात्रों के साथ अन्याय होता है, जो महीनों और वर्षों तक मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं।
उन्होंने विशेष रूप से NEET प्रश्नपत्र लीक मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे प्रभावित विद्यार्थियों को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रहना चाहिए। उनके अनुसार, परीक्षा प्रणाली में किसी भी तरह की गड़बड़ी से केवल एक परीक्षा प्रभावित नहीं होती, बल्कि लाखों परिवारों की उम्मीदें और युवाओं का भविष्य इससे जुड़ा होता है।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की। साथ ही परीक्षा संचालन में तकनीकी सुरक्षा, निगरानी और जवाबदेही बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग
कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकारों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। यदि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले लीक हो जाता है तो पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठता है।
उनके मुताबिक, सरकारों को ऐसी व्यवस्था तैयार करनी चाहिए जिसमें प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचने और परीक्षा आयोजित होने तक हर चरण की निगरानी की जा सके।
उन्होंने कहा कि युवाओं को यह भरोसा होना चाहिए कि उनकी मेहनत का मूल्यांकन निष्पक्ष तरीके से होगा। परीक्षा में पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।
NEET विवाद का जिक्र
रघुवीरा रेड्डी ने NEET प्रश्नपत्र लीक के आरोपों से प्रभावित छात्रों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि मेडिकल शिक्षा में प्रवेश के लिए होने वाली परीक्षा देश के लाखों विद्यार्थियों के करियर से जुड़ी होती है।
उन्होंने मांग की कि जिन विद्यार्थियों को कथित पेपर लीक या परीक्षा में अनियमितताओं के कारण नुकसान उठाना पड़ा, उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुना जाए। उन्होंने कहा कि छात्रों की समस्याओं का समाधान केवल आश्वासन से नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई के माध्यम से किया जाना चाहिए।
उनका कहना था कि युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए राजनीतिक दलों और सरकारों को परीक्षा व्यवस्था में सुधार को प्राथमिकता देनी चाहिए।
अल नीनो के प्रभाव पर भी चिंता
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रघुवीरा रेड्डी ने मौजूदा जलवायु परिस्थितियों का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि अल नीनो के प्रभाव से मौसम और जल संसाधनों पर गंभीर दबाव पैदा हो सकता है।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से बदलती जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तत्काल कदम उठाने की अपील की। उनके अनुसार, किसानों, ग्रामीण क्षेत्रों और पानी पर निर्भर आबादी को मौसम में होने वाले बदलावों का सीधा असर झेलना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकारों को संभावित जल संकट से निपटने के लिए पहले से तैयारी करनी चाहिए और उपलब्ध जल संसाधनों का वैज्ञानिक एवं संतुलित तरीके से इस्तेमाल सुनिश्चित करना चाहिए।
श्रीशैलम जलाशय को लेकर दोनों राज्यों से बातचीत की मांग
रघुवीरा रेड्डी ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों से श्रीशैलम जलाशय के पानी के इस्तेमाल को लेकर आपसी बातचीत करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों को मिलकर इस मुद्दे पर निर्णय लेना चाहिए और ऐसे समय में जल संसाधनों का उपयोग प्राथमिकताओं के आधार पर किया जाना चाहिए, जब पानी की उपलब्धता पर दबाव बना हुआ है।
उन्होंने सुझाव दिया कि जलाशय के पानी को बिजली उत्पादन के लिए इस्तेमाल करने से पहले मौजूदा जल स्थिति का आकलन किया जाए। उनका तर्क था कि यदि जल संसाधनों पर दबाव है तो पानी के इस्तेमाल को लेकर दोनों राज्यों के बीच समन्वय जरूरी है।
कृत्रिम बारिश की संभावना तलाशने का सुझाव
पूर्व मंत्री ने जल संकट से निपटने के लिए क्लाउड सीडिंग यानी कृत्रिम बारिश की संभावना तलाशने का सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि यदि मौसम और वैज्ञानिक परिस्थितियां अनुकूल हों तो सरकारें इस तकनीक की व्यवहारिकता पर विचार कर सकती हैं।
क्लाउड सीडिंग के जरिए बादलों में कुछ पदार्थों का इस्तेमाल करके बारिश की संभावना बढ़ाने का प्रयास किया जाता है। हालांकि, इसकी सफलता मौसम संबंधी परिस्थितियों पर निर्भर करती है। रघुवीरा रेड्डी ने इसे संभावित जल संकट से निपटने के लिए उपलब्ध विकल्पों में से एक के तौर पर देखने की बात कही।
आंध्र प्रदेश विधानसभा में जल संकट पर चर्चा की मांग
रघुवीरा रेड्डी ने कहा कि आंध्र प्रदेश विधानसभा का सत्र सोमवार से शुरू होने वाला है। उन्होंने सरकार से अपील की कि सदन में अल नीनो के संभावित प्रभाव, जल संसाधनों की स्थिति और श्रीशैलम जलाशय से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा कराई जाए।
उनके मुताबिक, जल संकट केवल पर्यावरण से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि इसका असर कृषि, बिजली उत्पादन, पेयजल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। इसलिए विधानसभा में इस विषय पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता है।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि जल संसाधनों के प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक योजना तैयार की जाए ताकि बदलते मौसम और कम वर्षा जैसी परिस्थितियों में लोगों को कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
वाईएसआर कांग्रेस विधायकों से विधानसभा पहुंचने की अपील
कांग्रेस नेता ने वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के विधायकों से भी विधानसभा सत्र में शामिल होने और जनता से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि विधानसभा लोकतांत्रिक चर्चा का महत्वपूर्ण मंच है और सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों को जनता से जुड़े सवालों को प्रभावी तरीके से उठाना चाहिए। परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, जल संकट और मौसम संबंधी चुनौतियां सीधे आम लोगों और युवाओं को प्रभावित करने वाले मुद्दे हैं।
रघुवीरा रेड्डी ने कहा कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर जनहित के विषयों पर चर्चा और समाधान तलाशना जरूरी है।
युवाओं के भविष्य और जल सुरक्षा पर जोर
रघुवीरा रेड्डी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दो प्रमुख मुद्दे प्रमुखता से सामने आए—युवाओं के भविष्य की सुरक्षा और जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन। उन्होंने परीक्षा पेपर लीक को युवाओं के साथ होने वाला गंभीर अन्याय बताया और सरकारों से कठोर कार्रवाई की मांग की।
दूसरी ओर, उन्होंने अल नीनो और जल संसाधनों पर संभावित दबाव को देखते हुए आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई।
उनका कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जल संसाधनों का जिम्मेदार इस्तेमाल दोनों ही लंबे समय के लिए महत्वपूर्ण हैं। एक तरफ सरकारों को यह सुनिश्चित करना होगा कि छात्रों की मेहनत निष्पक्ष परीक्षा प्रक्रिया के जरिए आगे बढ़े, वहीं दूसरी ओर पानी जैसे सीमित संसाधन का उपयोग भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस नेता नागा मधु यादव, क्रांति नायडू, लक्ष्मी नरसिम्हा और अन्य पार्टी नेता भी मौजूद रहे। रघुवीरा रेड्डी के बयानों के बाद पेपर लीक, परीक्षा सुधार और जल प्रबंधन से जुड़े मुद्दे आंध्र प्रदेश की राजनीतिक चर्चा में प्रमुखता से उठने की संभावना है।










