राजस्थान के किसानों के लिए अहम बदलाव, PM किसान सम्मान निधि लाभार्थियों को सरकारी गेहूं पर रोक

राजस्थान में 2.47 हैक्टेयर से अधिक भूमि वाले PM किसान सम्मान निधि लाभार्थियों को सरकारी गेहूं वितरण योजना से बाहर किया जाएगा। पात्रता डेटा मिलान जारी।

PM किसान सम्मान निधि योजना से जुड़े राजस्थान के हजारों किसानों को बड़ा झटका लग सकता है। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि जिन किसानों की भूमि जोत 2.47 हैक्टेयर से अधिक है, उन्हें सरकारी गेहूं वितरण योजना से बाहर किया जाएगा। विभाग जमीन रिकॉर्ड और पीएम किसान डेटा का मिलान कर पात्रता तय कर रहा है।

राजस्थान में PM किसान सम्मान निधि योजना से जुड़े उन किसानों पर सरकार कार्रवाई कर रही है, जिनकी भूमि जोत निर्धारित सीमा से अधिक है। नियमों के अनुसार 2.47 हैक्टेयर से ज्यादा भूमि वाले किसानों को गरीब वर्ग के बजाय आर्थिक रूप से सक्षम श्रेणी में रखा जाएगा, इसलिए उन्हें सरकारी गेहूं वितरण व्यवस्था से बाहर किया जा रहा है। 

विभाग वर्ष 2016 की कृषि भूमि रजिस्टर सूची और वर्तमान पीएम किसान डेटा का मिलान कर पात्रता निर्धारित कर रहा है।
Chittorgarh जिले में जिला रसद विभाग को 4,328 ऐसे किसानों की सूची मिली है जिनकी जोत वर्षों में बढ़ी है। जांच के बाद अपात्र किसानों को धीरे-धीरे अनाज वितरण सूची से हटाया जाएगा। राज्य सरकार का कहना है कि लाभ केवल उन्हीं को मिलेगा, जो वास्तव में पात्रता मानकों में आते हैं।

प्रदेशभर में शुरू हुई पात्रता की दोबारा जांच

राजस्थान में पीएम किसान और भू-अभिलेख डेटा का व्यापक मिलान अभियान जारी है। कई जिलों में सामने आया है कि बड़ी जोत वाले किसान गलत श्रेणी में राशन लाभ ले रहे थे। ऐसे किसानों को अब राहत योजनाओं से बाहर किया जाएगा, जबकि छोटे और सीमांत किसानों के लाभ में कोई बदलाव नहीं होगा। वर्ष 2016 की भूमि सूची और मौजूदा डेटा का मिलान कर विभाग अपात्र नाम हटाने की अंतिम प्रक्रिया में है। राज्य स्तर पर भी निगरानी जारी है ताकि किसी पात्र किसान को लाभ से वंचित न किया जाए।

राजस्थान के किसानों के लिए अहम बदलाव, PM किसान सम्मान निधि लाभार्थियों को सरकारी गेहूं पर रोक

 4,328 किसान जांच के दायरे में

चित्तौड़गढ़ जिले में पीएम किसान योजना से जुड़े 4,328 किसानों की सूची जारी की गई है, जिनकी भूमि जोत मानक सीमा से अधिक पाई गई है। राशमी, चित्तौड़गढ़, कपासन और गंगरार जैसे ब्लॉकों में सबसे ज्यादा संख्या में किसान जांच के दायरे में आए हैं। विभाग ने ब्लॉकवार डेटा मिलान शुरू कर दिया है, ताकि अपात्र किसानों की श्रेणी स्पष्ट हो सके।

जिला रसद विभाग के अनुसार 2016 के भू-अभिलेख और वर्तमान पीएम किसान डेटा का मिलान करते हुए यह पाया गया है कि कई किसानों की जोत वर्षों में बढ़ी है, लेकिन वे अब भी लाभार्थी सूची में शामिल हैं। इन मामलों की जांच अंतिम चरण में है और भूमि मानक से अधिक जोत वाले किसानों को योजनाओं से बाहर करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

लाभार्थी पात्रता पर सख्त निर्देश

राज्य सरकार ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि निर्धारित सीमा 2.47 हैक्टेयर से अधिक भूमि रखने वाले किसानों को अब पीएम किसान और सरकारी राशन लाभार्थी नहीं माना जाएगा। राज्य स्तर से प्राप्त सूची के आधार पर सभी जिलों में छंटनी अभियान चल रहा है। इस प्रक्रिया का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी अनाज और राहत योजनाओं का लाभ केवल सही पात्रों तक पहुंचे।

जिला रसद अधिकारी हितेष जोशी ने बताया कि चित्तौड़गढ़ में प्राप्त सूची के अनुसार प्रत्येक किसान का रिकॉर्ड पुनः सत्यापित किया जा रहा है। सरकार चाहती है कि आर्थिक रूप से सक्षम किसानों को लाभ से अलग किया जाए, जबकि छोटे और सीमांत किसानों को किसी भी योजना में बाधा न आए। यह कार्रवाई पारदर्शिता और सही पात्रता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की जा रही है।

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