अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की रकम की गिनती को लेकर व्यवस्था में लगातार बदलाव किए जा रहे हैं। चढ़ावा चोरी के मामले की जांच और गणना प्रक्रिया में सामने आई अनियमितताओं के बाद अब मंदिर में रुपये गिनने वाले कर्मचारियों की पहचान, निगरानी और जिम्मेदारी को लेकर भी नई व्यवस्था तैयार की जा रही है। कर्मचारियों के लिए अलग ड्रेस निर्धारित करने के साथ उनकी भूमिका को स्पष्ट करने और रिकॉर्ड की जांच करने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य गणना प्रक्रिया में शामिल हर व्यक्ति की जिम्मेदारी तय करना और नकदी के एक चरण से दूसरे चरण तक पहुंचने की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है।
राम मंदिर में चढ़ावे की गणना का काम पहले बैंक और आउटसोर्स एजेंसी से जुड़े कर्मचारियों की मदद से कराया जाता था। जुलाई में भारतीय स्टेट बैंक ने फैसला लिया था कि आगे चढ़ावे की गिनती बैंक अपने कर्मचारियों से कराएगा और बाहरी कलेक्शन एजेंसी के अनुबंध को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। यह फैसला चढ़ावा चोरी के आरोपों और जांच में सामने आई प्रक्रिया संबंधी कमियों के बाद लिया गया था।
नई व्यवस्था में कर्मचारियों की भूमिका को अलग-अलग स्तर पर तय करने की तैयारी है। कौन कर्मचारी किस काम के लिए जिम्मेदार होगा, किसके पास नकदी रहेगी, कौन नोटों की गिनती करेगा, कौन निगरानी करेगा और रकम को बैंक तक पहुंचाने की प्रक्रिया में किसकी भूमिका होगी, इसका रिकॉर्ड रखने पर जोर दिया जा रहा है। इस तरह किसी भी चरण में रकम या प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने पर संबंधित कर्मचारी की भूमिका को आसानी से देखा जा सकेगा।
कर्मचारियों के लिए अलग पहचान वाली ड्रेस रखने की व्यवस्था भी इसी निगरानी व्यवस्था का हिस्सा मानी जा रही है। चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारियों को केसरिया रंग का जंपसूट पहनाने की बात सामने आई है। इससे गणना कक्ष में मौजूद कर्मचारियों की पहचान दूर से ही की जा सकेगी। साथ ही यह भी पता लगाया जा सकेगा कि कौन व्यक्ति गणना से जुड़ी ड्यूटी पर है और कौन बाहरी व्यक्ति है।
चढ़ावे की गणना वाले कमरे में प्रवेश और निकास को लेकर भी व्यवस्था को कड़ा किए जाने पर जोर है। जांच के दौरान यह बात सामने आई थी कि पहले प्रवेश और निकास के समय कर्मचारियों की जांच की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। एसआईटी की जांच में गणना प्रक्रिया और कर्मचारियों की तैनाती से जुड़े कई बिंदुओं की पड़ताल की गई थी।
कर्मचारियों के रिकॉर्ड की जांच भी नई व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताई जा रही है। गणना कार्य में लगाए जाने वाले कर्मचारियों की शैक्षणिक योग्यता, पहले की नौकरी और कार्य अनुभव सहित उनकी पृष्ठभूमि से जुड़े दस्तावेजों को देखा जा सकता है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि संवेदनशील नकदी गिनती के काम में लगाए गए प्रत्येक कर्मचारी का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।
गणना कक्ष में काम करने वाले कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने का मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और दानपात्रों में चढ़ावे के रूप में बड़ी मात्रा में नकदी आती है। पहले भी चढ़ावे की रकम की गिनती के लिए लगभग 40 कर्मचारियों की व्यवस्था होने की जानकारी सामने आई थी। जुलाई में प्रक्रिया में बदलाव करते हुए दो पालियों की जगह एक पाली में गणना और रविवार को साप्ताहिक अवकाश देने का फैसला भी किया गया था।
पहले गणना की व्यवस्था में बैंक, ट्रस्ट और कलेक्शन एजेंसी से जुड़े कर्मचारी शामिल रहते थे। जांच के दौरान सामने आया कि गणना कक्ष में नोटों की बंडलिंग और गिनती की जिम्मेदारी अलग-अलग कर्मचारियों के पास रहती थी, जबकि बैंक कर्मचारी निगरानी की भूमिका में होते थे। गिनती पूरी होने के बाद राशि का वाउचर बनाया जाता और रजिस्टर में उसका रिकॉर्ड दर्ज कर बैंक खाते में जमा कराया जाता था।
चढ़ावा चोरी के मामले में जांच एजेंसियों ने गणना कर्मियों से भी पूछताछ की थी। बाद में पुलिस की ओर से दाखिल आरोप पत्र में यह भी दर्ज किया गया कि गणना से जुड़े कुछ कर्मचारियों ने ही कथित चोरी की घटनाओं को सामने लाने में भूमिका निभाई थी। रिपोर्ट के अनुसार कर्मचारियों ने गणना कक्ष में हुई गतिविधियों से संबंधित वीडियो उपलब्ध कराए थे।
इस मामले की जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, पुराने रिकॉर्ड, बैंक से जुड़े दस्तावेज और चढ़ावे की गणना की प्रक्रिया को खंगाला गया। जून में एसआईटी ने ट्रस्ट पदाधिकारियों और गणना कर्मचारियों से पूछताछ की थी। जांच टीम ने यह समझने की कोशिश की कि दानपात्रों से निकलने वाली रकम किस-किस चरण से होकर गणना कक्ष और फिर बैंक खाते तक पहुंचती है।
नई व्यवस्था में कर्मचारियों की संख्या और ड्यूटी शिफ्ट को भी जरूरत के मुताबिक व्यवस्थित करने की बात है। सामान्य दिनों में कम संख्या में कर्मचारियों से काम चल सकता है, जबकि बड़े पर्वों और विशेष अवसरों पर चढ़ावे की मात्रा बढ़ने पर अतिरिक्त कर्मचारियों की जरूरत पड़ सकती है। बैंक के सामने ऐसी स्थिति में दूसरे स्थानों से कर्मचारियों की व्यवस्था करने की चुनौती भी बताई गई थी।
चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारियों के लिए अलग जंपसूट की व्यवस्था होने से सुरक्षा कर्मियों और पर्यवेक्षकों के लिए भी पहचान आसान हो सकती है। गणना कक्ष में मौजूद लोगों की संख्या, उनकी ड्यूटी का समय और जिम्मेदारी का रिकॉर्ड रखने से किसी घटना की स्थिति में जांच के दौरान संबंधित समय की जानकारी जुटाने में मदद मिल सकती है।
इसके साथ ही गणना प्रक्रिया में सीसीटीवी निगरानी, वीडियोग्राफी, दोहरी जांच और रकम के रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने जैसे उपायों पर भी जोर दिया गया है। जांच से जुड़े दस्तावेजों और रिपोर्टों में नकदी प्रबंधन के अलग-अलग चरणों की निगरानी को महत्वपूर्ण माना गया है।
राम मंदिर में चढ़ावे की व्यवस्था को लेकर जून से ही जांच का दौर चल रहा है। एसआईटी ने ट्रस्ट पदाधिकारियों, बैंक अधिकारियों और गणना से जुड़े कर्मचारियों से पूछताछ की। इसके बाद बैंक ने भी चढ़ावा गिनने की व्यवस्था में बदलाव का फैसला लिया। जुलाई में बैंक ने अपने कर्मचारियों से गणना कराने और बाहरी एजेंसी की भूमिका खत्म करने की जानकारी सामने आई थी।
अब कर्मचारियों की पहचान और जिम्मेदारी को और स्पष्ट करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। रिकॉर्ड की जांच से यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास होगा कि गणना जैसे संवेदनशील काम में तैनात व्यक्ति के बारे में पूरी जानकारी उपलब्ध हो। कर्मचारी की शैक्षणिक योग्यता और पूर्व रोजगार से जुड़ी जानकारी का सत्यापन होने पर नियुक्ति प्रक्रिया में भी जवाबदेही बढ़ सकती है।
इस पूरी व्यवस्था का सबसे अहम हिस्सा यह होगा कि चढ़ावे की रकम दानपात्र से निकलने के बाद बैंक खाते में जमा होने तक हर चरण का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध रहे। किस समय रकम निकाली गई, किस कर्मचारी ने उसे संभाला, किसने गिनी, किसने निगरानी की और किसके हस्ताक्षर से रकम बैंक में जमा हुई, इन सभी बिंदुओं को दर्ज करने से प्रक्रिया को ट्रैक करना आसान होगा।
राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती से जुड़ी व्यवस्था में बदलाव ऐसे समय हो रहा है, जब पिछले महीनों में कथित चढ़ावा चोरी का मामला जांच के केंद्र में रहा है। पुलिस ने इस मामले में आरोप पत्र दाखिल किया है और जांच में गणना कक्ष से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका तथा वहां की व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया है।
फिलहाल नई व्यवस्था का उद्देश्य गणना प्रक्रिया को अधिक नियंत्रित और जवाबदेह बनाना है। कर्मचारियों की अलग पहचान, उनकी जिम्मेदारी का निर्धारण, रिकॉर्ड का सत्यापन और नकदी की निगरानी जैसे कदमों से चढ़ावे की गिनती से जुड़ी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। आने वाले समय में पर्व और विशेष अवसरों पर बढ़ने वाले चढ़ावे के अनुसार कर्मचारियों की संख्या और शिफ्ट व्यवस्था में भी बदलाव किया जा सकता है।










