रामपुर की ऐतिहासिक रजा लाइब्रेरी का विस्तार कर इसे 43 एकड़ में विकसित किया जाएगा। परियोजना के तहत इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के अध्ययन, शोध और धरोहर संरक्षण केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी चल रही है।
रामपुर: देश की प्रतिष्ठित रजा लाइब्रेरी एवं संग्रहालय को जल्द ही नए स्वरूप में विकसित किया जाएगा। वर्तमान में किले के सीमित हिस्से में संचालित यह संस्थान पूरे 43 एकड़ परिसर में विस्तारित होगा। प्रस्तावित योजना के तहत लाइब्रेरी को वैश्विक अध्ययन, अनुसंधान, भाषा शिक्षा और सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम शुरू हो चुका है।
43 एकड़ में विस्तार की तैयारी
1774 में स्थापित रजा लाइब्रेरी एवं संग्रहालय देश की सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और बौद्धिक धरोहरों में गिनी जाती है। अब इसे व्यापक रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। वर्तमान में लगभग पांच एकड़ क्षेत्र में संचालित लाइब्रेरी को पूरे रामपुर किला परिसर की 43 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।
इस विस्तार योजना का उद्देश्य केवल भवनों का विस्तार करना नहीं है, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के अध्ययन और शोध केंद्र के रूप में विकसित करना है। यहां विभिन्न देशों और भाषाओं से जुड़े अध्ययन कार्यक्रम भी शुरू किए जाने की योजना है।
धरोहर संरक्षण और शोध को मिलेगा बढ़ावा
रजा लाइब्रेरी दुर्लभ पांडुलिपियों, ऐतिहासिक दस्तावेजों, चित्रकला और सुलेख संग्रह के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहां लगभग 17 हजार पांडुलिपियां संरक्षित हैं, जिनमें कई सदियों पुरानी अमूल्य धरोहरें शामिल हैं।
लाइब्रेरी में सातवीं से उन्नीसवीं शताब्दी तक की 500 से अधिक दुर्लभ कुरान प्रतियां सुरक्षित हैं। इनमें करीब 300 प्रतियां सोने के पानी से लिखी और सजाई गई हैं। ऊंट की खाल पर कूफी लिपि में लिखी सातवीं शताब्दी की एक दुर्लभ कुरान भी यहां संरक्षित है, जिसकी विश्व में केवल दो प्रतियां मौजूद बताई जाती हैं।
इसके अलावा फारसी भाषा में अनूदित और चित्रों से सुसज्जित रामायण, मंगोलिया के इतिहास से जुड़े दस्तावेज तथा 60 हजार से अधिक मुद्रित पुस्तकें भी इस संग्रह का हिस्सा हैं।
प्रशासनिक प्रक्रिया अंतिम चरण में
विस्तार परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए केंद्रीय लोक निर्माण विभाग और आईआईटी रुड़की द्वारा भवनों का सुरक्षा ऑडिट पूरा किया जा चुका है। संबंधित रिपोर्ट लाइब्रेरी प्रशासन और जिला प्रशासन को सौंप दी गई है।
परिसर में संचालित कुछ सरकारी संस्थानों और कार्यालयों को अन्य स्थानों पर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया भी जारी है। कई विभागों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं, जबकि आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करने की कार्रवाई भी चल रही है।
अंतरराष्ट्रीय पहचान की दिशा में बड़ा कदम
रजा लाइब्रेरी बोर्ड की अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की राज्यपाल Anandiben Patel ने अक्टूबर 2024 में पूरे किला परिसर को लाइब्रेरी के लिए उपलब्ध कराने का निर्णय लिया था। इसके बाद परियोजना की औपचारिक प्रक्रियाओं में तेजी आई।
अधिकारियों के अनुसार, सभी प्रशासनिक मंजूरियां मिलने और राज्य मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद लाइब्रेरी के नए स्वरूप की विस्तृत योजना लागू की जाएगी। इस परियोजना के पूरा होने पर रामपुर की रजा लाइब्रेरी न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर अध्ययन, शोध और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित हो सकती है।









