मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच अंबानी ने बदली रणनीति, अफ्रीका से ऑस्ट्रेलिया तक बढ़ाया फ्यूल एक्सपोर्ट

Reliance Industries ने मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच अफ्रीका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में फ्यूल एक्सपोर्ट बढ़ाया। O2C कारोबार का EBITDA 25,203 करोड़ रुपये पहुंचा।

पश्चिम एशिया में तनाव के कारण ईंधन सप्लाई प्रभावित होने के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अफ्रीका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया जैसे बाजारों में कारोबार बढ़ाया है। कंपनी की बाजार हिस्सेदारी करीब 50 प्रतिशत बढ़ी, जबकि O2C कारोबार का EBITDA रिकॉर्ड 25,203 करोड़ रुपये पहुंच गया।

बिजनेस न्यूज़: मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अपने ईंधन कारोबार की रणनीति बदल दी है। कंपनी ने पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन की सप्लाई अफ्रीका, यूरोप और भूमध्यसागरीय देशों की ओर बढ़ाई है। इससे इन बाजारों में उसकी हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत बढ़ी है। सितंबर तिमाही में रिलायंस के ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) कारोबार ने रिकॉर्ड कमाई दर्ज की। कंपनी ने कच्चे तेल की खरीद और माल ढुलाई के लिए भी नए रास्ते अपनाए हैं।

मिडिल ईस्ट में सप्लाई प्रभावित हुई तो रिलायंस ने बदले बाजार

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर दुनियाभर में तेल और गैस की सप्लाई पर पड़ रहा है। कई देशों में ईंधन की उपलब्धता प्रभावित हुई है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ी हैं। इसी बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपने निर्यात का रुख उन बाजारों की तरफ किया, जहां ईंधन की मांग ज्यादा है और सप्लाई कम पड़ रही है।

कंपनी ने पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका के साथ यूरोपीय देशों में पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात बढ़ाया है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, केन्या और तंजानिया में प्रीमियम ग्रेड के पेट्रोल के लिए नए कारोबारी अवसर तलाशे गए हैं। भूमध्यसागरीय बाजार में डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF की सप्लाई भी बढ़ाई गई है।

मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच अंबानी ने बदली रणनीति, अफ्रीका से ऑस्ट्रेलिया तक बढ़ाया फ्यूल एक्सपोर्ट

रिलायंस के सप्लाई और ट्रेडिंग कारोबार के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर श्रीनिवासन टुट्टागुंटा ने बताया कि भूमध्यसागरीय क्षेत्र में डीजल और जेट फ्यूल की सप्लाई कम होने से कंपनी को नए अवसर मिले। कंपनी की सितंबर तिमाही की प्रस्तुति के मुताबिक, बदली हुई निर्यात रणनीति से इन बाजारों में उसकी हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत बढ़ाने में मदद मिली।

रिलायंस के O2C कारोबार ने कमाए 25,203 करोड़ रुपये

रिलायंस इंडस्ट्रीज के सितंबर 2026 तिमाही के नतीजों में तेल से रसायन बनाने वाला कारोबार सबसे मजबूत हिस्सों में शामिल रहा। O2C कारोबार का EBITDA सालाना आधार पर करीब 68 प्रतिशत बढ़कर 25,203 करोड़ रुपये पहुंच गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह 15,008 करोड़ रुपये था।

इस कारोबार से कंपनी का रेवेन्यू भी करीब 44 प्रतिशत बढ़कर 2,31,601 करोड़ रुपये हो गया। ईंधन की ऊंची कीमतों और बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन से कंपनी को फायदा मिला।

EBITDA किसी कंपनी की ब्याज, टैक्स और मूल्यह्रास जैसे खर्चों से पहले की परिचालन कमाई को दर्शाता है। रिलायंस के लिए इस आंकड़े का रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचना महत्वपूर्ण है, क्योंकि O2C कारोबार उसके कुल रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा है।कंपनी के मुताबिक, कच्चे तेल की खरीद और तैयार उत्पादों की बिक्री में बदलाव करके बेहतर मार्जिन हासिल किया गया।

कच्चा तेल 41 प्रतिशत महंगा, रिफाइनिंग मार्जिन में भी उछाल

पश्चिम एशिया और रूस से जुड़े संघर्षों ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। सितंबर तिमाही में कच्चे तेल की कीमत सालाना आधार पर लगभग 41 प्रतिशत बढ़ी। वहीं, परिवहन में इस्तेमाल होने वाले ईंधन की कीमतों में 50 से 78 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई।

इस दौरान पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन के रिफाइनिंग मार्जिन भी बढ़े। गैसोलीन क्रैक, यानी पेट्रोल और कच्चे तेल की कीमतों के बीच का अंतर, लगभग 25 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। पिछले साल की समान अवधि में यह करीब 8.4 डॉलर था।

रिफाइनरियों के लिए यह अंतर महत्वपूर्ण होता है। जब तैयार ईंधन की कीमत कच्चे तेल के मुकाबले ज्यादा बढ़ती है, तो रिफाइनिंग कारोबार को बेहतर कमाई का मौका मिल सकता है। हालांकि, माल ढुलाई और कच्चे तेल की बढ़ती लागत भी मुनाफे को प्रभावित करती है।

25 जहाजों से सप्लाई, घरेलू LPG उत्पादन भी बढ़ाया

रिलायंस ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग में आई परेशानियों से निपटने के लिए अपनी माल ढुलाई व्यवस्था में भी बदलाव किया है। कंपनी ने 20 से अधिक अतिरिक्त जहाजों की व्यवस्था की, जिससे कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की ढुलाई में लगे जहाजों की संख्या करीब 25 हो गई।

कच्चे तेल की खरीद के लिए भी कंपनी ने अमेरिका, खाड़ी देशों और भूमध्यसागरीय क्षेत्र सहित अलग-अलग बाजारों का इस्तेमाल किया। इससे सप्लाई में रुकावटों के बावजूद रिफाइनरियों में कच्चे तेल की प्रोसेसिंग ऊंचे स्तर पर बनाए रखने में मदद मिली।

रिलायंस ने पहली बार दक्षिण अफ्रीका को कम सल्फर वाला विमान ईंधन भी सप्लाई किया। कंपनी को उम्मीद है कि इससे भविष्य में नए निर्यात अवसर मिल सकते हैं। इसके साथ घरेलू बाजार की मांग पूरी करने के लिए LPG का उत्पादन सामान्य स्तर के मुकाबले लगभग दोगुना किया गया।

रिलायंस के लिए यह तिमाही दिखाती है कि बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात में ईंधन की खरीद और बिक्री के नए बाजार तलाशना कितना महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने या वैश्विक कीमतों में बदलाव आने पर रिफाइनिंग मार्जिन भी बदल सकते हैं।

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