नोबेल पुरस्कार विजेता रिचर्ड रॉबर्ट्स ने भारत में GM फसलों के इस्तेमाल का समर्थन किया है। उनका कहना है कि भारतीय वैज्ञानिक खुद बेहतर बीज विकसित कर सकते हैं। इससे विदेशी कंपनियों पर निर्भरता बढ़ना जरूरी नहीं है।
Tech: भारत में जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फसलों को लेकर चल रही बहस के बीच नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक सर रिचर्ड जॉन रॉबर्ट्स ने स्वदेशी रिसर्च को बढ़ावा देने की बात कही है। मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को भारत मंडपम में आयोजित एक विज्ञान सम्मेलन में उन्होंने कहा कि भारतीय लैब्स के पास अपनी तकनीक विकसित करने की क्षमता है। ऐसे में नई कृषि तकनीक अपनाने को विदेशी कंपनियों पर निर्भरता से जोड़ना सही नहीं है।
भारतीय लैब्स में तैयार हो सकती हैं बेहतर फसलें
रिचर्ड रॉबर्ट्स ने कहा कि भारत को कृषि में नई तकनीक अपनाने के लिए केवल विदेशी कंपनियों की तरफ देखने की जरूरत नहीं है। देश के रिसर्च संस्थान खुद ऐसी फसलें विकसित कर सकते हैं, जो किसानों की जरूरतों के हिसाब से बेहतर हों। इन पर तकनीकी अधिकार भी भारतीय संस्थानों के पास रह सकते हैं।
![]()
उनके मुताबिक, जेनेटिक इंजीनियरिंग को लेकर यह धारणा गलत है कि इस क्षेत्र में काम करने से किसी देश को विदेशी कंपनियों पर निर्भर होना ही पड़ेगा। उन्होंने इस आशंका को बेतुका बताते हुए भारतीय वैज्ञानिकों को घरेलू स्तर पर रिसर्च बढ़ाने की सलाह दी।
रॉबर्ट्स का मानना है कि खेती में सुधार के लिए नई वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल जरूरी है। खासकर ऐसे देशों में, जहां बड़ी आबादी की खाद्य जरूरतों को पूरा करना एक चुनौती है।
Bt कॉटन को बताया भारत का सफल उदाहरण
भारत में GM फसलों की चर्चा करते हुए रॉबर्ट्स ने Bt कॉटन का उदाहरण दिया। उन्होंने इसे भारतीय कृषि में एक सफल प्रयोग बताया। Bt कॉटन ऐसी कपास है, जिसमें कुछ खास कीटों से बचाव के लिए जेनेटिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
भारत में साल 2002 से Bt कॉटन की व्यावसायिक खेती की अनुमति है। हालांकि, खाद्य फसलों में GM तकनीक के इस्तेमाल को लेकर अभी भी नीतिगत और वैज्ञानिक स्तर पर बहस जारी है।
रॉबर्ट्स के बयान से यह सवाल फिर सामने आया है कि क्या भारत को दूसरी फसलों में भी इस तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशनी चाहिए।
CRISPR तकनीक से फसलों में कैसे हो सकता है सुधार?
वैज्ञानिक अब CRISPR जैसी तकनीक की मदद से पौधों के DNA में बदलाव कर सकते हैं। इससे फसलों में ऐसे गुण लाने की कोशिश की जाती है, जो किसानों के काम आ सकें। रॉबर्ट्स चाहते हैं कि भारत के वैज्ञानिक भी इस तकनीक पर ज्यादा काम करें और नई फसलें तैयार करने के लिए अपनी रिसर्च आगे बढ़ाएं।
GM फसलों से भोजन की जरूरतें पूरी करने में मिल सकती है मदद
रॉबर्ट्स के मुताबिक, GM फसलों को सिर्फ पैदावार बढ़ाने के नजरिए से नहीं देखना चाहिए। इसका संबंध लोगों तक पर्याप्त और पौष्टिक भोजन पहुंचाने से भी है।
भारत सहित कई विकासशील देशों में बड़ी आबादी के लिए भोजन की व्यवस्था करना एक अहम जिम्मेदारी है। रॉबर्ट्स का मानना है कि खेती से जुड़ी नई खोजें इस काम में मदद कर सकती हैं। हालांकि, किसी भी नई फसल को अपनाने से पहले उसकी सुरक्षा और किसानों पर पड़ने वाले असर को समझना भी जरूरी है।








