अमेरिकी कंपनी Marathon Fusion ने परमाणु तकनीक से पारे को सोने में बदलने का दावा किया है। कंपनी के मुताबिक, उसके प्रयोग की उत्पादन दर CERN से दस गुना अधिक रही। हालांकि, इसकी स्वतंत्र पुष्टि और बड़े पैमाने पर उत्पादन को लेकर सवाल बने हुए हैं।
Mercury to Gold: पारे से सोना बनाने की कोशिश सदियों से होती रही है। अब अमेरिका की एक टेक कंपनी ने दावा किया है कि उसने आधुनिक परमाणु तकनीक की मदद से ऐसा कर दिखाया है। सैन फ्रांसिस्को की Marathon Fusion ने 21 अक्टूबर 2026 को बताया कि सितंबर में किए गए प्रयोग में पारे से स्थिर सोना तैयार हुआ। लेकिन कंपनी ने कितना सोना बनाया और इस प्रक्रिया पर कितना खर्च आया, इसकी पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की है।
पारे से सोना बनाने का दावा कैसे सामने आया?
Marathon Fusion ने सोशल मीडिया पर अपने प्रयोग की जानकारी देते हुए कहा कि उसकी तकनीक ने यूरोपीय परमाणु अनुसंधान संस्थान CERN के 2025 में सामने आए रिकॉर्ड से दस गुना अधिक उत्पादन दर हासिल की है।
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कंपनी ने कुछ वैज्ञानिक माप भी साझा किए हैं। इनमें पारे के एक खास रूप से सोना बनने के संकेत मिलने की बात कही गई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह पता नहीं चलता कि प्रयोग में सोने की कुल कितनी मात्रा तैयार हुई।
इस दावे की अभी स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि भी नहीं हुई है। इसलिए इसे बड़े पैमाने पर सोना बनाने में मिली सफलता मानना जल्दबाजी होगी।
Nuclear Fusion से पारा सोने में कैसे बदलता है?
कंपनी जिस तकनीक पर काम कर रही है, उसे Nuclear Transmutation कहा जाता है। इसमें परमाणु के केंद्र की बनावट बदलकर एक तत्व को दूसरे तत्व में बदला जाता है।
इस प्रक्रिया में पहले Nuclear Fusion से तेज गति वाले न्यूट्रॉन पैदा किए जाते हैं। ये न्यूट्रॉन पारे के Mercury-198 नामक आइसोटोप से टकराते हैं। इस प्रतिक्रिया से रेडियोधर्मी Mercury-197 बन सकता है।
Mercury-197 समय के साथ बदलकर Gold-197 में परिवर्तित हो जाता है। Gold-197 सोने का स्थिर आइसोटोप है।
यहां समझने वाली बात है कि पारा सीधे Nuclear Fusion में शामिल होकर सोना नहीं बनता। Fusion से निकलने वाले न्यूट्रॉन इस बदलाव में मदद करते हैं। यानी सोना बनाने की असली प्रक्रिया परमाणु रूपांतरण है।
एक साल में दो टन सोना बनाने का अनुमान
Marathon Fusion के वैज्ञानिकों ने जुलाई 2025 में arXiv पर एक रिसर्च पेपर अपलोड किया था। इसमें अनुमान लगाया गया कि भविष्य का एक उपयुक्त Fusion Power Plant हर एक गीगावाट थर्मल पावर पर सालाना करीब दो टन सोना तैयार कर सकता है।
लेकिन यह आंकड़ा कंप्यूटर सिमुलेशन पर आधारित है। कंपनी ने अभी किसी चालू व्यावसायिक प्लांट में इतनी मात्रा में सोना तैयार करके नहीं दिखाया है।
कंपनी जिस छोटे रिएक्टर पर काम करने की बात कर रही है, उसकी प्रस्तावित Fusion क्षमता एक किलोवाट है। यह एक गीगावाट से दस लाख गुना कम है। ऐसे में प्रयोगशाला के नतीजों को सीधे औद्योगिक उत्पादन से नहीं जोड़ा जा सकता।
CERN के रिकॉर्ड से तुलना कितनी सही?
CERN ने 2025 में बताया था कि Large Hadron Collider में 2015 से 2018 के बीच लगभग 86 अरब सोने के परमाणु केंद्र बने थे।
सुनने में यह संख्या बड़ी लगती है, लेकिन सोने की कुल मात्रा सिर्फ 29 पिकोग्राम थी। इतना सोना सामान्य आंखों से दिखाई भी नहीं देगा।
इसके अलावा CERN का प्रयोग सोने के व्यावसायिक उत्पादन के लिए नहीं था। वहां परमाणु कणों के व्यवहार का अध्ययन किया जा रहा था।
Marathon Fusion ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि उसने अपनी उत्पादन दर की तुलना CERN के किस मापदंड से की है।
सोना तैयार होने के बाद भी कई मुश्किलें
इस तकनीक में सबसे बड़ी परेशानी सही प्रकार का पारा जुटाना है। प्राकृतिक पारे में Mercury-198 की हिस्सेदारी लगभग दस प्रतिशत होती है, जबकि कंपनी की गणना में 90 प्रतिशत तक शुद्ध Mercury-198 इस्तेमाल करने की बात है।
पारा जहरीला भी होता है। बड़ी मात्रा में इसके इस्तेमाल के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था जरूरी होगी।
एक और समस्या रेडियोधर्मिता है। उत्पादन के दौरान दूसरे रेडियोधर्मी पदार्थ भी बन सकते हैं। कंपनी के सिमुलेशन के अनुसार, तैयार मिश्रण को कुछ सुरक्षा मानकों तक पहुंचने में कई साल लग सकते हैं। इसकी सफाई और सुरक्षित भंडारण पर अतिरिक्त खर्च आएगा।
क्या इस तकनीक से सोना सस्ता हो जाएगा?
फिलहाल ऐसा कहना मुश्किल है। Marathon Fusion का अनुमान है कि भविष्य में बिजली बनाने वाले Fusion Plants सोना बेचकर अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं।
लेकिन अभी यह साबित होना बाकी है कि इस तरीके से तैयार सोना बाजार में बिकने लायक मात्रा और गुणवत्ता में बनाया जा सकता है।
इसके लिए कंपनी को प्रयोग की पूरी जानकारी, उत्पादन लागत और सोने की शुद्धता से जुड़े आंकड़े सामने रखने होंगे। स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह तकनीक केवल प्रयोगशाला तक सीमित रहेगी या भविष्य में सोना बनाने का नया तरीका बन सकेगी।










