रॉबर्ट वाड्रा से जुड़े शिकोहपुर जमीन सौदे के मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राउज एवेन्यू कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है। ईडी ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और इसे पूरा करने के लिए उसे कुछ और समय की आवश्यकता है।
नई दिल्ली: रॉबर्ट वाड्रा से जुड़े गुरुग्राम के शिकोहपुर जमीन सौदे में मनी लॉन्ड्रिंग जांच अभी जारी है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर बताया कि मामले की जांच पूरी नहीं हुई है। एजेंसी ने अदालत से कुछ और समय देने का अनुरोध किया है, खासकर उन दस्तावेजों की सूची तैयार करने के लिए जिन्हें मामले में संबंधित आरोपियों को उपलब्ध कराया जाना है।
अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय की मांग स्वीकार कर ली है और मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर 2026 को निर्धारित की है। ईडी के मुताबिक, शिकोहपुर जमीन सौदे में रियल एस्टेट कंपनी DLF से जुड़े पहलुओं की जांच अभी जारी है।
ED ने कोर्ट से क्यों मांगा अतिरिक्त समय?
सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत को बताया कि मामले की जांच प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। एजेंसी ने कहा कि कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल जारी है और दस्तावेजों की सूची तैयार करने के लिए उसे अतिरिक्त समय की आवश्यकता है। ईडी ने करीब तीन सप्ताह का समय मांगा। एजेंसी के अनुसार, मामले से जुड़े दस्तावेज आरोपियों को उपलब्ध कराए जा चुके हैं और शेष औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए भी प्रक्रिया जारी है।
अदालत ने जांच एजेंसी को अतिरिक्त समय देते हुए अगली सुनवाई के लिए सितंबर की तारीख तय कर दी। इसका मतलब है कि फिलहाल इस मामले में जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।
क्या है शिकोहपुर जमीन सौदा?
यह मामला गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव में लगभग 3.53 एकड़ जमीन की खरीद से जुड़ा है। उपलब्ध मामले के विवरण के अनुसार, फरवरी 2008 में रॉबर्ट वाड्रा से जुड़ी कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने यह जमीन ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से करीब 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी थी। प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि जमीन खरीद के लिए किए गए भुगतान से संबंधित बिक्री दस्तावेजों में गलत जानकारी दी गई थी। एजेंसी का दावा है कि भुगतान के लिए दिखाया गया चेक एक अन्य कंपनी से जुड़ा था और उसे वास्तव में भुनाया नहीं गया।
इसके बाद जमीन के व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए लाइसेंस की प्रक्रिया शुरू हुई। ईडी का आरोप है कि इस प्रक्रिया में नियमों को दरकिनार कर तेजी से मंजूरी दिलाई गई। जमीन को व्यावसायिक उपयोग की अनुमति मिलने के बाद उसकी संभावित कीमत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

DLF से जुड़े लेनदेन पर ED की नजर
मामले का एक प्रमुख पहलू DLF से जुड़ा लेनदेन है। ईडी के अनुसार, जून 2008 में DLF ने इस जमीन को करीब 58 करोड़ रुपये में खरीदने पर सहमति जताई थी। इस तरह जमीन की खरीद और बाद के सौदे के बीच कीमत में बड़ा अंतर सामने आया। प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि DLF से प्राप्त रकम अपराध से हुई आय यानी ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ से संबंधित थी और बाद में इस धन का इस्तेमाल वाड्रा से जुड़ी कंपनियों के जरिए विभिन्न संपत्तियों और वित्तीय दायित्वों में किया गया।
इसी आधार पर ईडी ने मामले को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जोड़ा है। हालांकि, एजेंसी के आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं और अदालत में साबित होना बाकी है।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा समेत अन्य पर भी हुई थी कार्रवाई
शिकोहपुर जमीन मामले की पृष्ठभूमि कई वर्ष पुरानी है। 2012 में तत्कालीन IAS अधिकारी अशोक खेमका ने जमीन के म्यूटेशन को लेकर आपत्ति जताई थी और इस मामले में कार्रवाई की थी। इसके बाद 2018 में हरियाणा पुलिस ने रॉबर्ट वाड्रा, हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, DLF और अन्य संबंधित पक्षों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। FIR में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार जैसे आरोपों से जुड़े प्रावधान शामिल थे।
ईडी ने जुलाई 2025 में मामले में अभियोजन शिकायत दाखिल की थी। एजेंसी ने वाड्रा समेत कई लोगों और कंपनियों को आरोपी बनाया तथा उनसे जुड़ी 43 संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क करने की कार्रवाई भी की थी।










