चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी घोटाले में सात महीने से फरार नगर निगम अकाउंटेंट अनुभव मिश्रा ने विशेष सीबीआई अदालत में सरेंडर किया। सीबीआई को सात दिन का रिमांड मिला है और उससे घोटाले में अन्य लोगों की भूमिका पर पूछताछ होगी।
चंडीगढ़: 116.84 करोड़ रुपये के स्मार्ट सिटी घोटाले में सात महीने से फरार नगर निगम के अकाउंटेंट अनुभव मिश्रा ने गुरुवार को सीबीआई की विशेष अदालत में सरेंडर कर दिया। अदालत में पेशी के बाद सीबीआई ने उसे हिरासत में लिया और पूछताछ के लिए सात दिन का रिमांड हासिल किया। जांच एजेंसी उससे कथित वित्तीय अनियमितताओं, डिजिटल लेनदेन और अन्य आरोपितों की भूमिका को लेकर पूछताछ करेगी।
थाईलैंड भागने का आरोप, कोर्ट में किया सरेंडर
सीबीआई के मुताबिक, घोटाले की जांच शुरू होने की जानकारी मिलने के बाद अनुभव मिश्रा देश छोड़कर थाईलैंड चला गया था। जांच एजेंसी का कहना है कि उसे लगातार ट्रैक किया जा रहा था और उसके विदेश जाने की जानकारी भी सीबीआई को मिल गई थी।
सीबीआई के अनुसार, लगातार नोटिस जारी किए जाने के बावजूद मिश्रा जांच में शामिल नहीं हुआ। पिछले सप्ताह अदालत ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी किए थे। इसके बाद भारत लौटकर उसने गुरुवार को सीबीआई की विशेष अदालत में सरेंडर किया।
सीबीआई को सात दिन का रिमांड
अदालत में सीबीआई ने मिश्रा की हिरासत मांगते हुए कहा कि उससे घोटाले और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका के बारे में पूछताछ जरूरी है। अदालत ने सीबीआई को सात दिन का रिमांड दे दिया।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि मिश्रा केवल आउटसोर्स कर्मचारी था और उसे घोटाले की जानकारी नहीं थी। वकील ने उसे मामले में बलि का बकरा बनाए जाने की बात भी कही। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
बैंक अधिकारी से संपर्क और डिजिटल साक्ष्यों की जांच
सीबीआई ने अदालत को बताया कि अनुभव मिश्रा और आईडीएफसी बैंक के अधिकारी तथा सह-आरोपित अभय कुमार के बीच लगातार संपर्क था। जांच के दौरान दोनों के बीच हुई कई चैट भी सामने आई हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार, मिश्रा का मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी स्मार्ट सिटी के बैंक खाते से लिंक मिले हैं। इसी आधार पर सीबीआई उसके रिमांड के दौरान डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल करेगी।
सीबीआई WhatsApp चैट, कॉल डिटेल, डिजिटल लेनदेन, फर्जी एफडी और बैंक रिकॉर्ड में मिली विसंगतियों को लेकर पूछताछ करेगी। संबंधित बैंक खातों में हुए लेनदेन की भी जांच की जाएगी।
ऐसे हुआ था 116.84 करोड़ रुपये का घोटाला
मार्च 2026 में सामने आए इस मामले में अनुभव मिश्रा को भी मुख्य आरोपितों में शामिल किया गया है। आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए आईडीएफसी बैंक में जमा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की बड़ी रकम को डायवर्ट कर करोड़ों रुपये का गबन किया गया।
शुरुआत में मामले की जांच चंडीगढ़ पुलिस कर रही थी, लेकिन बाद में इसे सीबीआई को सौंप दिया गया। जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि इतनी बड़ी वित्तीय जिम्मेदारी एक आउटसोर्स कर्मचारी को किस प्रक्रिया के तहत सौंपी गई।
सीबीआई के मुताबिक, आरोपितों ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में फर्जी एफडी तैयार कर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के फंड को निकाला। इसके बाद रकम को शेल कंपनियों में ट्रांसफर किया गया और बाद में रियल एस्टेट में निवेश किए जाने का आरोप है।
अब अनुभव मिश्रा के रिमांड के दौरान सीबीआई इस पूरे वित्तीय नेटवर्क, बैंक लेनदेन और अन्य आरोपितों से उसके कथित संबंधों की जांच करेगी।










