महानगर की नई टीम में पदाधिकारियों का चयन करते समय कई नए चेहरों को मौका मिला है। इससे उन कार्यकर्ताओं में उत्साह है जो लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहते हुए जिम्मेदारी मिलने का इंतजार कर रहे थे। वहीं दूसरी तरफ पुराने पदाधिकारियों के बाहर होने से पार्टी के भीतर तरह-तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं।
भाजपा में संगठनात्मक जिम्मेदारियां आमतौर पर चुनावी राजनीति से अलग तरीके से देखी जाती हैं। पार्टी बूथ से लेकर मंडल, जिला और क्षेत्रीय स्तर तक संगठन को लगातार पुनर्गठित करती रहती है। इसका उद्देश्य संगठन को सक्रिय रखना और अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले कार्यकर्ताओं को अवसर देना होता है।
लेकिन गोरखपुर महानगर की नई सूची में बदलाव का प्रतिशत काफी अधिक होने के कारण इसे सामान्य बदलाव से बड़ा माना जा रहा है। 81 प्रतिशत पुराने चेहरों के बाहर होने की चर्चा ने क्षेत्रीय पदाधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। अब कई नेता यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि अगली सूची में किस तरह के बदलाव हो सकते हैं।
गोरखपुर भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। पूर्वांचल की राजनीति में गोरखपुर की अपनी अलग भूमिका है और संगठन के स्तर पर भी यहां की गतिविधियों पर प्रदेश नेतृत्व की नजर रहती है। ऐसे में महानगर संगठन में हुए बदलाव का असर क्षेत्रीय संगठन पर पड़ता है या नहीं, यह आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण होगा।
पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, संगठन में नए और सक्रिय कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाने की रणनीति पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने की कोशिश हो सकती है जो बूथ स्तर पर लगातार काम कर रहे हैं और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय हैं।
वहीं पुराने नेताओं के बीच यह चर्चा भी है कि महानगर की सूची में जगह नहीं मिलने का मतलब यह जरूरी नहीं कि उनका राजनीतिक महत्व समाप्त हो गया है। भाजपा में संगठन के अलग-अलग स्तर पर जिम्मेदारियां बदलती रहती हैं। कुछ नेताओं को दूसरी भूमिका दी जा सकती है, जबकि कुछ को आगामी चुनावी या संगठनात्मक गतिविधियों में जिम्मेदारी मिल सकती है।
नई सूची को लेकर सबसे ज्यादा नजर अब क्षेत्रीय टीम पर है। यदि क्षेत्रीय स्तर पर भी बड़े पैमाने पर बदलाव होता है तो यह संकेत माना जाएगा कि पार्टी संगठन में व्यापक स्तर पर नई टीम तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
इसके अलावा मंडल स्तर पर भी बदलाव की संभावना को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा शुरू हो गई है। महानगर की नई टीम के बाद यदि मंडलों में भी नए चेहरों को प्राथमिकता दी जाती है तो आने वाले समय में भाजपा के स्थानीय संगठन का चेहरा काफी बदल सकता है।
हालांकि अभी क्षेत्रीय टीम में बदलाव को लेकर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। इसलिए फिलहाल इसे संगठन के भीतर चल रही अटकलों के रूप में ही देखा जा रहा है। अंतिम फैसला प्रदेश नेतृत्व और संगठन की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
नई कार्यसमिति के गठन से एक और संदेश यह गया है कि पार्टी संगठन में पद केवल लंबे समय से जुड़े रहने के आधार पर नहीं बल्कि सक्रियता और संगठनात्मक कामकाज के आधार पर भी दिए जा सकते हैं। इससे युवा और नए कार्यकर्ताओं के बीच उम्मीद बढ़ी है।
वहीं वरिष्ठ नेताओं के लिए यह बदलाव संगठन में अपनी भूमिका को नए सिरे से तय करने का समय भी माना जा रहा है। कई पुराने पदाधिकारी अब पार्टी के दूसरे स्तरों पर जिम्मेदारी पाने की उम्मीद कर सकते हैं।
गोरखपुर महानगर की सूची आने के बाद अब पार्टी कार्यकर्ताओं की नजर क्षेत्रीय संगठन पर टिक गई है। अगर क्षेत्रीय टीम में भी बड़ा बदलाव होता है तो इसका असर पूर्वांचल के कई जिलों की संगठनात्मक संरचना पर पड़ सकता है।
फिलहाल भाजपा के अंदर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या गोरखपुर महानगर की नई टीम केवल स्थानीय स्तर का बदलाव है या प्रदेश नेतृत्व व्यापक संगठनात्मक फेरबदल की तैयारी में है। 81 प्रतिशत पुराने चेहरों के बाहर होने के बाद क्षेत्रीय स्तर पर बदलाव की अटकलों ने इस चर्चा को और तेज कर दिया है।
आने वाले दिनों में क्षेत्रीय पदाधिकारियों की नई सूची या संगठनात्मक बैठकों में लिए जाने वाले फैसलों से तस्वीर साफ हो सकती है। तब यह पता चलेगा कि महानगर की तरह क्षेत्रीय टीम में भी पुराने चेहरों की जगह नए कार्यकर्ताओं को कितनी प्राथमिकता दी जाती है।











