दुबई में पढ़ने वाले 16 वर्षीय CBSE छात्र रायलन अनिल ने एथिकल हैकिंग के जरिए NTA के NEET पोर्टल में सुरक्षा खामी का पता लगाया। रिपोर्ट मिलने के बाद NTA ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पोर्टल की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की प्रक्रिया शुरू की।
New Delhi: कक्षा 12वीं के छात्र और एथिकल हैकर रायलन अनिल ने NEET री-एग्जाम पोर्टल की सुरक्षा जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण तकनीकी खामी का खुलासा किया। उन्होंने इस समस्या की जानकारी भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In और NTA को दी, जिसके बाद एजेंसी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कदम उठाए।
एथिकल हैकिंग के जरिए सामने आई सुरक्षा खामी
राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के लिए उपयोग किए जाने वाले ऑनलाइन पोर्टलों की सुरक्षा हमेशा महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में 16 वर्षीय रायलन अनिल ने NTA के री-NEET पोर्टल की जांच के दौरान एक संभावित सुरक्षा खामी की पहचान कर चर्चा बटोरी है।
रायलन के अनुसार उन्होंने 31 मई की रात पोर्टल की तकनीकी सुरक्षा का परीक्षण किया। इस प्रक्रिया में उन्हें करीब तीन घंटे का समय लगा। जांच के दौरान उन्होंने बैकएंड सिस्टम से जुड़ी एक कमजोरी को पहचाना, जो सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय हो सकती थी। उनका कहना है कि इस कमी के कारण पोर्टल की कुछ सुरक्षा परतों को बाईपास करने का जोखिम मौजूद था।
खामी की पहचान होने के बाद उन्होंने जिम्मेदार साइबर सुरक्षा शोधकर्ता की तरह संबंधित एजेंसियों को इसकी जानकारी दी। सबसे पहले इसकी रिपोर्ट भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In को भेजी गई और बाद में इस बारे में जानकारी साझा की गई।
कौन हैं रायलन अनिल?
रायलन अनिल दुबई में रहने वाले 16 वर्षीय छात्र हैं और वर्तमान में CBSE बोर्ड से कक्षा 12वीं की पढ़ाई कर रहे हैं। कम उम्र में ही उन्होंने साइबर सुरक्षा और एथिकल हैकिंग के क्षेत्र में अच्छी समझ विकसित कर ली है।
रायलन को कक्षा 8 से ही कंप्यूटर कोडिंग, लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम और साइबर सुरक्षा में रुचि रही है। उन्होंने किसी बड़े प्रशिक्षण संस्थान से पढ़ाई करने के बजाय ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, सुरक्षा चुनौतियों, साइबर गेम्स और बग बाउंटी प्रोग्राम्स के जरिए अपनी तकनीकी क्षमताओं को निखारा है।
उनका लक्ष्य भविष्य में साइबर सुरक्षा क्षेत्र में विशेषज्ञ बनना और Chief Information Security Officer (CISO) जैसे महत्वपूर्ण पद पर कार्य करना है। साइबर सुरक्षा के प्रति उनकी रुचि और सक्रियता ने उन्हें कम उम्र में ही पहचान दिलानी शुरू कर दी है।
NTA ने दिखाई तत्परता
रिपोर्ट मिलने के बाद NTA अधिकारियों ने रायलन से संपर्क किया और उनके इनपुट के लिए धन्यवाद दिया। जानकारी के अनुसार एजेंसी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक तकनीकी कदम उठाए।
रायलन का कहना है कि NTA की प्रतिक्रिया काफी तेज रही और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए संबंधित पोर्टल पर कार्रवाई की गई। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की सुरक्षा बनाए रखने के लिए एजेंसियां अब पहले की तुलना में अधिक सतर्क हैं।
बढ़ती डिजिटल व्यवस्था में साइबर सुरक्षा की अहम भूमिका
शिक्षा, भर्ती और सरकारी सेवाओं से जुड़े अधिकांश कार्य अब ऑनलाइन माध्यम से संचालित हो रहे हैं। ऐसे में लाखों छात्रों और उम्मीदवारों का डेटा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद रहता है। किसी भी प्रकार की तकनीकी कमजोरी डेटा सुरक्षा और गोपनीयता के लिए खतरा बन सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एथिकल हैकर्स और सुरक्षा शोधकर्ताओं की भूमिका ऐसे मामलों में बेहद महत्वपूर्ण होती है। ये विशेषज्ञ संभावित कमजोरियों की पहचान कर संस्थानों को समय रहते सतर्क करते हैं, जिससे साइबर हमलों और डेटा लीक जैसी घटनाओं को रोका जा सकता है।
रायलन अनिल का यह मामला दिखाता है कि सही दिशा में इस्तेमाल की गई तकनीकी जानकारी न केवल सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बना सकती है, बल्कि डिजिटल सिस्टम को अधिक भरोसेमंद बनाने में भी अहम योगदान दे सकती है।








