आम आदमी पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह का ब्लॉगर अर्श नवाज के साथ एक व्लॉग इंटरव्यू इन दिनों चर्चा में है। इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने जिस स्कूल में पढ़ाई की, वह आरएसएस से जुड़ा था, तो संजय सिंह ने जवाब दिया कि आरएसएस के स्कूल में पढ़ने में क्या दिक्कत है?
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने अपनी स्कूली शिक्षा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), शिशु मंदिर और मौजूदा राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है। एक व्लॉग इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की पहचान केवल इस बात से तय नहीं होनी चाहिए कि उसने किस स्कूल में पढ़ाई की, बल्कि यह अधिक महत्वपूर्ण है कि वह सार्वजनिक जीवन में किन मुद्दों को उठाता है और किन सवालों के लिए संघर्ष करता है।
संजय सिंह का यह बयान ऐसे समय आया है, जब उनसे उनकी शिक्षा को लेकर सवाल किया गया कि उन्होंने जिस शिशु मंदिर में पढ़ाई की, क्या वह RSS से जुड़ा स्कूल था। इस पर AAP नेता ने कहा कि शिशु मंदिर को केवल एक संगठन से जोड़कर देखना सही नहीं है। उनके अनुसार, उनके साथ अलग-अलग पृष्ठभूमि के छात्र पढ़ते थे और उनका एक मुस्लिम सहपाठी भी था। उन्होंने कहा कि उनकी पढ़ाई की जगह से अधिक महत्वपूर्ण उनका वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण है।
‘मैं कहां से पढ़ा, इससे ज्यादा अहम है मेरे मुद्दे’
इंटरव्यू के दौरान संजय सिंह ने कहा कि किसी नेता का मूल्यांकन केवल उसके शैक्षणिक संस्थान या निजी पृष्ठभूमि के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता के सामने असली सवाल यह होना चाहिए कि कोई जनप्रतिनिधि किन समस्याओं पर आवाज उठा रहा है और लोगों के हित में क्या कर रहा है।
AAP सांसद ने कहा कि वह रोजगार, शिक्षा, सरकारी व्यवस्था और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते रहे हैं। उनके मुताबिक, राजनीतिक बहस को व्यक्ति की पृष्ठभूमि से आगे बढ़कर नीतियों, कामकाज और जनता की वास्तविक समस्याओं पर केंद्रित होना चाहिए।
आजादी के आंदोलन और RSS को लेकर भी साधा निशाना

संजय सिंह ने इंटरव्यू में RSS की भूमिका को लेकर भी तीखी राजनीतिक टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता आंदोलन में RSS की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल मौजूद हैं। AAP नेता ने RSS और उसके नेताओं के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को लेकर कई दावे किए और कहा कि किसी को भी देशभक्ति का प्रमाणपत्र देने का अधिकार किसी एक संगठन के पास नहीं होना चाहिए।
उन्होंने राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान से जुड़े मुद्दों पर भी RSS की आलोचना की। संजय सिंह ने कहा कि देशभक्ति का आकलन किसी संगठन की स्वीकृति से नहीं, बल्कि नागरिकों के काम और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता से होना चाहिए। हालांकि, ये टिप्पणियां संजय सिंह के राजनीतिक आरोप और दावे हैं। RSS की ओर से इन आरोपों पर अलग दृष्टिकोण और जवाब दिया जाता रहा है। ऐसे मामलों में ऐतिहासिक और राजनीतिक दावों को विभिन्न स्रोतों और पक्षों के नजरिये से देखना महत्वपूर्ण माना जाता है।
Gen-Z को लेकर नेताओं पर उठाए सवाल
संजय सिंह ने बातचीत के दौरान युवाओं और खासकर Gen-Z को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि युवा मतदाताओं को केवल सोशल मीडिया प्रचार या आकर्षक राजनीतिक संदेशों से प्रभावित होने के बजाय सरकारों और नेताओं के वास्तविक कामकाज का आकलन करना चाहिए। उन्होंने रोजगार और परीक्षा से जुड़े मुद्दों का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
AAP नेता ने आरोप लगाया कि युवाओं के सामने रोजगार और परीक्षा प्रणाली जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। उन्होंने युवाओं से ऐसे नेताओं और राजनीतिक दावों को लेकर सतर्क रहने की अपील की, जो उनके मुताबिक केवल प्रचार पर ज्यादा ध्यान देते हैं। संजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी राजनीतिक टिप्पणी करते हुए कहा कि युवा वर्ग को नेताओं के बयानों के साथ-साथ उनके काम और नीतियों का भी मूल्यांकन करना चाहिए।












