Sikar में जिला जनसुनवाई के दौरान लोगों ने पेयजल संकट, बंद रास्ते और बस स्टॉप जैसी समस्याएं उठाईं। कलेक्टर आशीष मोदी ने फरियादियों को साथ बैठाकर शिकायतें सुनीं और अधिकारियों को तुरंत समाधान के निर्देश दिए।
सीकर: राजस्थान के सीकर जिले में आयोजित जिला स्तरीय जनसुनवाई के दौरान पेयजल संकट, सड़क मार्ग, अतिक्रमण और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़ी कई समस्याएं सामने आईं। जिला कलेक्टर आशीष मोदी ने आम लोगों की शिकायतें सुनते हुए संबंधित विभागों को मौके पर ही कार्रवाई के निर्देश दिए। जनसुनवाई के दौरान एक खास बात यह रही कि कलेक्टर ने फरियादियों को अपने पास बैठाकर उनकी समस्याएं विस्तार से सुनीं और अधिकारियों को समाधान के लिए जवाबदेह बनाया।
“तीन साल से नहीं मिल रहा पीने का पानी”
जनसुनवाई में सबसे प्रमुख मामला पिपराली रोड क्षेत्र से सामने आया, जहां निवासी हरिप्रसाद कुमावत ने पिछले तीन वर्षों से पीने के पानी की समस्या होने की शिकायत की। उन्होंने बताया कि इलाके में नियमित जलापूर्ति नहीं होने के कारण लोगों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
शिकायत सुनने के बाद जिला कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल मौके की रिपोर्ट पेश करने और समस्या के समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने साफ कहा कि लंबित समस्याओं को केवल कागजी कार्रवाई में नहीं उलझाया जाएगा, बल्कि उनका समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।
कलेक्टर बोले- “समस्या बताइए, बाकी बातों की जरूरत नहीं”
जनसुनवाई के दौरान एक परिवादी अपनी समस्या बताने के बजाय दूसरी बातें करने लगा, जिस पर कलेक्टर आशीष मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनसुनवाई का उद्देश्य केवल शिकायतों का समाधान करना है।
उन्होंने कहा, “यहां हम कागज आगे बढ़ाने नहीं, बल्कि समस्याओं का समाधान करने बैठे हैं। सीधे अपनी समस्या बताइए।”
कलेक्टर की इस सख्त लेकिन स्पष्ट कार्यशैली की वहां मौजूद लोगों ने सराहना की।
श्मशान घाट का रास्ता बंद होने की शिकायत
जनसुनवाई में नीमकाथाना क्षेत्र के छाजा की नांगल गांव निवासी रामस्वरूप यादव ने वर्षों पुराने रास्ते को बंद किए जाने की शिकायत दर्ज करवाई।
उन्होंने बताया कि प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान श्मशान घाट और पुराने कुएं तक जाने वाला पारंपरिक रास्ता बंद कर दिया गया है। इससे ग्रामीणों को अंतिम संस्कार और दैनिक उपयोग के लिए आने-जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

कलेक्टर ने इस मामले में संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी और रास्ते की स्थिति की जांच के निर्देश दिए।
बस स्टॉपेज की मांग लेकर पहुंचे ग्रामीण
खाचरियावास गांव के कई ग्रामीण निजी बसों के स्टॉपेज की मांग लेकर जनसुनवाई में पहुंचे। ग्रामीणों ने बताया कि नागौर से जयपुर जाने वाली बसें गांव से करीब दो किलोमीटर दूर से गुजरती हैं, जिससे बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव के पास बस स्टॉप निर्धारित करने की मांग की ताकि लोगों को आवागमन में सुविधा मिल सके।
अतिक्रमण और जल निकासी के मुद्दे भी उठे
जनसुनवाई में कई अन्य स्थानीय समस्याएं भी सामने आईं। बाबूलाल कुमावत ने खाचरियावास गांव में अतिक्रमण की शिकायत की और प्रशासन से कार्रवाई की मांग की।
वहीं सामाजिक कार्यकर्ता और ब्लड डोनर बीएल मील ने नवलगढ़ रोड पर जल निकासी की समस्या, हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र में सफाई व्यवस्था और कोलीड़ा गांव में फुटबॉल एकेडमी भवन में खेल गतिविधियां शुरू कराने को लेकर ज्ञापन सौंपा।
श्मशान भूमि में पानी की टंकी बनाने का प्रस्ताव
मनोज जाखड़ ने अमृतम् जलम् योजना के तहत कुड़ली गांव में पानी की टंकी बनाने की मांग रखी। उन्होंने सुझाव दिया कि गांव की श्मशान भूमि के पास टंकी का निर्माण किया जाए ताकि आसपास के लोगों को जलापूर्ति में सुविधा मिल सके।
इस पर कलेक्टर ने जलदाय विभाग के अधिकारियों को मौके का निरीक्षण कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए।
92 मामलों की हुई सुनवाई
जिला स्तरीय जन अभाव-अभियोग निराकरण समिति की इस बैठक में कुल 92 मामलों की सुनवाई की गई।
इनमें शामिल रहे:
- राजस्व विभाग से जुड़े मामले
- नगर निकाय संबंधी शिकायतें
- पेयजल और सड़क समस्याएं
- पुलिस और चिकित्सा विभाग के मुद्दे
- पंचायती राज और भू-अभिलेख मामले
- शिक्षा, खेल, सामाजिक न्याय और कृषि विभाग से जुड़ी शिकायतें
सभी उपखंड स्तरीय अधिकारी भी इस जनसुनवाई में वर्चुअल माध्यम से जुड़े रहे।
फरियादियों को पास बैठाकर सुनी समस्याएं
जनसुनवाई की सबसे अलग तस्वीर यह रही कि जिला कलेक्टर ने शिकायतकर्ताओं को दूर खड़े रहने के बजाय अपने पास कुर्सी पर बैठाकर उनकी बातें सुनीं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे आम नागरिकों को अपनी बात खुलकर रखने का मौका मिला और प्रशासनिक प्रक्रिया अधिक संवेदनशील दिखाई दी।
ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की चुनौती
सीकर जिले की इस जनसुनवाई ने एक बार फिर यह दिखाया कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में पेयजल, सड़क, परिवहन और सार्वजनिक सुविधाओं की समस्याएं अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ती आबादी और सीमित बुनियादी ढांचे के कारण छोटे शहरों और गांवों में इस तरह की समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं।
प्रशासनिक जवाबदेही पर जोर
जिला प्रशासन ने जनसुनवाई के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शिकायतों का समय पर निस्तारण किया जाए और लंबित मामलों को प्राथमिकता दी जाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की सार्वजनिक सुनवाई न केवल लोगों को अपनी समस्याएं रखने का मंच देती हैं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही को भी मजबूत करती हैं।












