शेख हसीना के बाद बदला समीकरण, पाकिस्तान हुआ सक्रिय, जानिए पूरा मामला

भारत-बांग्लादेश तनाव के बीच पाकिस्तान ने ढाका में सक्रियता बढ़ाई है। असीम मुनीर और शहबाज शरीफ की रणनीति से बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता और कट्टरपंथ की आशंका

भारत-बांग्लादेश तनाव के बीच पाकिस्तान ढाका में प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। असीम मुनीर की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों को आशंका है कि इससे बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता और कट्टरपंथ बढ़ सकता है।

World News: दक्षिण एशिया की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। भारत और बांग्लादेश के बीच चल रहे तनाव के माहौल के बीच पाकिस्तान ने ढाका में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिशें तेज कर दी हैं। पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की रणनीति को लेकर आरोप लग रहे हैं कि वे बांग्लादेश को भी उसी रास्ते पर ले जाना चाहते हैं, जिस पर पाकिस्तान खुद चल चुका है। 

असीम मुनीर की भूमिका पर उठते सवाल

पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर को लेकर लगातार यह सवाल उठ रहा है कि वे सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में कट्टरपंथ को बढ़ावा देने की सोच पर काम कर रहे हैं। बांग्लादेश को लेकर भी यही आशंका जताई जा रही है। आरोप है कि मुनीर की नीति बांग्लादेश को आर्थिक रूप से कमजोर करने और वहां आतंकी सोच को बढ़ावा देने की दिशा में है। इस रणनीति के पीछे पाकिस्तान की पुरानी आदत मानी जा रही है, जिसमें वह अपने पड़ोसी देशों में अस्थिरता पैदा कर अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश करता रहा है।

पाकिस्तान-बांग्लादेश के रिश्तों में तेजी

हाल के महीनों में पाकिस्तान और बांग्लादेश के रिश्तों में तेजी से नजदीकियां बढ़ी हैं। यह नजदीकी सिर्फ कूटनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक स्तर पर भी दिखाई दे रही है। पाकिस्तान लगातार बांग्लादेश से दोस्ती की पहल कर रहा है और इसे क्षेत्रीय सहयोग का नाम दिया जा रहा है। लेकिन जानकारों का मानना है कि इसके पीछे पाकिस्तान की गहरी साजिश हो सकती है।

विदेश मंत्रियों की टेलीफोनिक बातचीत

इसी कड़ी में पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने बांग्लादेश के विदेश मंत्री मोहम्मद तौहीद हुसैन से फोन पर बातचीत की। इस बातचीत में दोनों देशों के संबंधों को और गहरा करने पर जोर दिया गया। पाकिस्तानी विदेश कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।

व्यापार और आर्थिक सहयोग पर फोकस

टेलीफोनिक बातचीत के दौरान व्यापार और आर्थिक सहयोग को खास तौर पर चर्चा का विषय बनाया गया। दोनों पक्षों ने कहा कि व्यापारिक संबंध मजबूत करने से दोनों देशों को फायदा होगा। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का खुद का आर्थिक हाल बेहद खराब है और ऐसे में उसका बांग्लादेश को आर्थिक सहयोग देना या उससे फायदा पहुंचाना संदेह के घेरे में आता है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था आईएमएफ और कर्ज पर टिकी हुई है, जबकि बांग्लादेश अब तक एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में देखा जाता रहा है।

क्षेत्रीय हालात पर भी हुई चर्चा

पाकिस्तान और बांग्लादेश के विदेश मंत्रियों ने मौजूदा क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी विचार विमर्श किया। इसमें क्षेत्रीय शांति और समृद्धि जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया। लेकिन आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान जब भी शांति की बात करता है, उसके पीछे अक्सर कोई न कोई राजनीतिक या रणनीतिक एजेंडा छिपा होता है।

शेख हसीना के बाद बदला समीकरण

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के 2024 में अपदस्थ होने के बाद से पाकिस्तान ने ढाका के साथ रिश्ते सुधारने पर खास जोर दिया है। शेख हसीना का रुख पाकिस्तान के प्रति हमेशा सख्त माना जाता था। उनके सत्ता से हटते ही पाकिस्तान ने मौके को भांप लिया और बांग्लादेश के नए सत्ता केंद्रों से संपर्क बढ़ाना शुरू कर दिया।

अगस्त 2024 के बाद से पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच राजनीतिक और सैन्य स्तर पर संपर्क बढ़ा है। दोनों देशों के नेताओं की यात्राएं और बैठकों की संख्या में इजाफा हुआ है। इसे पाकिस्तान की सोची समझी रणनीति माना जा रहा है, ताकि वह बांग्लादेश की नीति निर्धारण प्रक्रिया पर असर डाल सके।

कट्टरपंथ बढ़ने की आशंका

पाकिस्तान से बढ़ती नजदीकियों के बीच बांग्लादेश में कट्टर इस्लामवाद और अराजकता को लेकर चिंता बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का इतिहास बताता है कि जहां भी उसने अपने प्रभाव का विस्तार किया, वहां चरमपंथ और अस्थिरता बढ़ी है। बांग्लादेश में भी कुछ हालिया घटनाओं को इसी नजरिए से देखा जा रहा है।

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