हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली क्षेत्र में फोरलेन टनल निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है। भट्ठाकुफर, चलौंठी और शांति विहार क्षेत्र में टनल निर्माण के दौरान कई घरों में दरारें आने की शिकायत सामने आई है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि निर्माण कार्य के बाद उनके मकानों और संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है, जिससे लोग अपने घरों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। इस मामले को लेकर 50 से अधिक प्रभावित परिवारों के प्रतिनिधियों ने पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह से मुलाकात कर नुकसान की भरपाई और भवनों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है।
प्रभावित परिवारों ने मंत्री के सामने अपनी समस्याएं रखते हुए कहा कि टनल निर्माण के कारण घरों में आई दरारों को केवल सामान्य क्षति मानकर छोड़ना उचित नहीं होगा। लोगों ने मांग की कि प्रभावित क्षेत्र के सभी मकानों और भवनों का वैज्ञानिक तरीके से सर्वे कराया जाए। सर्वे के दौरान यह पता लगाया जाए कि किन भवनों में कितनी क्षति हुई है और भविष्य में वहां रहने वाले लोगों के लिए किसी तरह का खतरा तो नहीं है। परिवारों का कहना है कि उन्हें अपने घरों की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है और केवल निरीक्षण या आश्वासन से समस्या का समाधान नहीं होगा।
मामले को गंभीरता से लेते हुए पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने प्रतिनिधिमंडल की बात सुनी और मौके से ही शिमला के उपायुक्त से फोन पर बातचीत की। मंत्री ने प्रभावित परिवारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तत्काल सर्वे और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। प्रशासन की ओर से पहले भी प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया जा चुका है और टनल निर्माण से जुड़े काम को लेकर जांच की जा रही है।
स्थानीय लोगों की ओर से निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। प्रतिनिधिमंडल ने आशंका जताई कि कहीं निर्धारित क्षमता से अधिक क्षमता वाली मशीनरी का इस्तेमाल तो नहीं किया जा रहा। लोगों ने सुरंग निर्माण में इस्तेमाल की जा रही मशीनों और उनकी क्षमता की जांच कराने की मांग की है। यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित मशीनरी के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग भी प्रभावित लोगों ने रखी है। हालांकि, मशीनरी के कारण ही मकानों में दरारें आई हैं, यह अभी जांच का विषय है और इसे अंतिम रूप से स्थापित नहीं किया गया है।
इससे पहले शिमला के समिट्री और आसपास के क्षेत्र में भी फोरलेन सुरंग निर्माण के दौरान कई भवनों में दरारें आने की शिकायत सामने आ चुकी है। 19 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, वहां करीब 12 भवन प्रभावित बताए गए थे और ढली-संजौली बाईपास सड़क पर भी दरारें दिखाई दी थीं। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच पूरी होने तक निर्माण कार्य रोकने के निर्देश दिए थे। प्रभावित क्षेत्र में कंपन की तीव्रता मापने के लिए उपकरण लगाए गए और भवनों की स्थिति की वीडियोग्राफी भी कराई जा रही है।
संजौली के प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों का कहना है कि टनल के ऊपर और आसपास बड़ी संख्या में रिहायशी भवन मौजूद हैं। ऐसे में सुरंग निर्माण से होने वाले कंपन या अन्य प्रभावों का भवनों की संरचना पर क्या असर पड़ रहा है, इसकी तकनीकी जांच बेहद जरूरी है। इससे पहले भी स्थानीय लोगों ने प्रशासन से निर्माण कार्य के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने की मांग की थी।
मामले को लेकर एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि निर्माण से होने वाले नुकसान के कारणों को लेकर अभी अलग-अलग पक्ष सामने आ रहे हैं। प्रभावित निवासी और उनके प्रतिनिधि टनल निर्माण को मकानों में आई दरारों से जोड़ रहे हैं, जबकि अंतिम कारण निर्धारित करने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक जांच जरूरी है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, प्रभावित क्षेत्र में जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की टीम ने भी संभावित कारणों का आकलन किया है, जबकि एनएचएआई ने संबंधित स्थान पर ब्लास्टिंग किए जाने के आरोपों से इनकार किया है।
इससे पहले जिला प्रशासन की टीम ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया था। अधिकारियों ने प्रभावित भवनों और आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण किया। प्रशासन की ओर से निर्माण कार्य को लेकर सावधानी बरतने और जांच के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय करने की बात सामने आई है। इससे प्रभावित लोगों को उम्मीद है कि सर्वे और तकनीकी जांच के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी और यह तय किया जा सकेगा कि भवनों में आई दरारों के पीछे वास्तविक कारण क्या है।
प्रभावित परिवारों की सबसे बड़ी मांग नुकसान की भरपाई को लेकर है। लोगों का कहना है कि यदि जांच में टनल निर्माण या उससे जुड़े कार्यों के कारण उनके मकानों को नुकसान पहुंचने की पुष्टि होती है तो उन्हें उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन और निर्माण कंपनी की ओर से पहले दिए गए आश्वासनों को जल्द लागू करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि घरों में आई दरारों के कारण उनकी संपत्ति की सुरक्षा और भविष्य में रहने की स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
बुधवार को शांति विहार में प्रभावित परिवारों की बैठक भी हुई, जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक में लोगों ने अब तक हुई प्रशासनिक कार्रवाई और निर्माण कार्य से जुड़ी स्थिति पर विचार किया। प्रभावित परिवार चाहते हैं कि सर्वे जल्द पूरा हो और प्रत्येक भवन की स्थिति का रिकॉर्ड तैयार किया जाए। इससे भविष्य में नुकसान के आकलन और मुआवजे से जुड़े मामलों में भी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
फोरलेन परियोजना शिमला के सड़क संपर्क और यातायात व्यवस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजना है, लेकिन इसके निर्माण के दौरान रिहायशी इलाकों की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों ने प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के सामने चुनौती बढ़ा दी है। फिलहाल प्रभावित परिवारों की मांग है कि निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन हो, मकानों का विस्तृत सर्वे कराया जाए और यदि जांच में निर्माण कार्य से नुकसान की पुष्टि होती है तो प्रभावित लोगों को नियमानुसार राहत और मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।










