शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने CM योगी को लिखा पत्र, गो-वंश सुरक्षा के दावों पर उठाए सवाल

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर राज्य में गो-वंश सुरक्षा को लेकर सरकार के दावों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जानिए उन्होंने

ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रदेश सरकार के बीच जारी तनातनी फिलहाल कम होती दिखाई नहीं दे रही है। शंकराचार्य ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर प्रदेश सरकार के पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह के उस दावे को चुनौती दी है।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में गो-वंश की सुरक्षा और गोकशी के मामलों को लेकर राज्य सरकार और धार्मिक नेतृत्व के बीच तनातनी बढ़ती जा रही है। हाल ही में ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर प्रदेश सरकार के पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह के दावों को चुनौती दी है।

पशुपालन मंत्री का दावा, शंकराचार्य ने दी चुनौती

पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह ने हाल ही में राज्य में गो-वंश को पूरी तरह सुरक्षित बताते हुए कहा था कि गोकशी की घटनाएं भ्रम और असत्य हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में गो-रक्षा कानून प्रभावी रूप से लागू हैं और किसी भी प्रकार की गो-हत्या या गोकशी की घटनाएं नहीं हो रही हैं। अब इस दावे को चुनौती देते हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर ज्योतिष्पीठ के प्रतिनिधियों को स्वतंत्र जांच और प्रमाण संकलन की अनुमति देने की मांग की है। 

शंकराचार्य का कहना है कि यदि राज्य सरकार और मंत्री का दावा सत्य है, तो उन्हें इस प्रक्रिया में पारदर्शिता दिखाने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में लिखा है, "यदि शासन के दावे सत्य हैं, तो इस अनुमति को देने में विलंब न करना चाहिए। अनुमति न देना इस बात का प्रमाण होगा कि मंत्री का वक्तव्य केवल वास्तविक स्थिति को छुपाने का प्रयास है।

गो-वंश की रक्षा केवल कागज़ों में नहीं

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का मानना है कि गो-वंश की सुरक्षा सिर्फ आंकड़ों और सरकारी रिपोर्टों में नहीं दिखनी चाहिए, बल्कि धरातल पर इसका स्पष्ट प्रमाण होना चाहिए। उनका कहना है कि वास्तविक स्थिति को साबित करने के लिए स्वतंत्र जांच आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि शासन सहयोग करता है, तो “दूध का दूध और पानी का पानी” होने में समय नहीं लगेगा। यानी वास्तविक स्थिति का खुलासा तुरंत हो सकता है।

यह पत्र प्रयागराज माघ मेले में स्नान को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद आया है। इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्णय और प्रशासनिक रवैये को शंकराचार्य ने बार-बार निशाना बनाया है। उन्होंने हाल ही में मुख्यमंत्री से हिंदू होने का सबूत भी मांगा था, जिससे दोनों पक्षों के बीच विवाद और बढ़ गया।

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