Shubhanshu Shukla: दूसरे ग्रहों पर इंसान कैसे रहेंगे? भारतीय अंतरिक्ष यात्री ने दिखाया भविष्य का B.H.E.E.M कॉन्सेप्ट

Shubhanshu Shukla ने IISc में विकसित B.H.E.E.M कॉन्सेप्ट साझा किया, जो मंगल जैसे ग्रहों पर मॉड्यूलर आवास बनाने की कल्पना पेश करता है। जानें कैसे काम करेगा यह

भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने सोशल मीडिया पर एक खास पोस्ट साझा की है, जिसमें उन्होंने पृथ्वी से बाहर इंसानों के दूसरे ग्रहों पर रहने की संभावनाओं की परिकल्पना पेश की।

नई दिल्ली: इंसान लंबे समय से पृथ्वी से बाहर जीवन की संभावनाओं की तलाश कर रहा है। चंद्रमा और मंगल जैसे खगोलीय पिंडों पर भविष्य में मानव मिशनों की योजनाओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर इंसान वहां लंबे समय तक रहना चाहे तो उसके लिए सुरक्षित आवास कैसे तैयार किए जाएंगे। भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने इसी चुनौती से जुड़ी अपनी सोच साझा करते हुए भविष्य के अंतरिक्ष आवास की एक झलक दिखाई है।

शुभांशु शुक्ला ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि अंतरिक्ष में उनकी ट्रेनिंग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा केवल उड़ान और शारीरिक तैयारी तक सीमित नहीं था। उन्हें भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों से जुड़े अकादमिक शोध पर भी काम करने का अवसर मिला। इसी दौरान उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि पृथ्वी से बाहर उतरने के बाद इंसानों के रहने की व्यवस्था कैसी हो सकती है।

B.H.E.E.M में दिखी दूसरे ग्रहों पर घर की कल्पना

शुभांशु शुक्ला ने B.H.E.E.M (Bharatiya Habitable Expandable Extraterrestrial Habitat) का जिक्र करते हुए बताया कि भविष्य में पृथ्वी के बाहर इंसानों के लिए रहने योग्य स्थान विकसित करने की दिशा में यह एक अहम अवधारणा हो सकती है। उन्होंने भारतीय विज्ञान संस्थान यानी IISc Bengaluru की Aloke Lab से जुड़े एक कॉन्सेप्ट का वीडियो भी साझा किया। इसमें ऐसे संभावित आवासों की डिजाइन और संरचना की कल्पना की गई है, जिन्हें भविष्य में पृथ्वी से बाहर मानव बस्तियों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

शुक्ला के मुताबिक, यह विचार उनके उस शोध से जुड़ा है जिसमें उन्होंने अंतरिक्ष यान के मिशन से आगे की परिस्थितियों पर विचार किया। उनका सवाल था कि किसी दूसरे ग्रह या दुनिया पर इंसान पहुंचने के बाद आखिर रहेगा कहां?

अंतरिक्ष आवास के सामने होंगी कई बड़ी चुनौतियां

Shubhanshu Shukla: दूसरे ग्रहों पर इंसान कैसे रहेंगे? भारतीय अंतरिक्ष यात्री ने दिखाया भविष्य का B.H.E.E.M कॉन्सेप्ट

दूसरे ग्रहों पर मानव आवास बनाना केवल एक इमारत खड़ी करने जितना आसान नहीं होगा। वहां मौजूद बेहद कठिन परिस्थितियां वैज्ञानिकों के सामने कई तकनीकी और इंजीनियरिंग चुनौतियां पेश करेंगी। शुभांशु शुक्ला ने रेडिएशन, अत्यधिक तापमान, लाइफ सपोर्ट सिस्टम, ऊर्जा की उपलब्धता और निर्माण तकनीक जैसे मुद्दों को महत्वपूर्ण बताया। किसी भी संभावित मानव आवास को इस तरह डिजाइन करना होगा कि वह अंतरिक्ष या दूसरे ग्रह के कठोर वातावरण में लोगों को सुरक्षा प्रदान कर सके।

इसके अलावा पानी, ऑक्सीजन, ऊर्जा और अन्य जरूरी संसाधनों की उपलब्धता भी भविष्य के अंतरिक्ष आवासों की सफलता के लिए निर्णायक होगी। यही वजह है कि वैज्ञानिक समुदाय के लिए space habitat technology और extraterrestrial living लगातार महत्वपूर्ण शोध क्षेत्र बनते जा रहे हैं।

आज की रिसर्च से बनेगा 20 साल बाद का भविष्य

शुभांशु शुक्ला ने अपने संदेश में एक अहम बात पर जोर दिया। अगर मानवता अगले दो दशकों में पृथ्वी से बाहर इंसानों के रहने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है, तो ऐसी तकनीकों पर काम 20 साल बाद शुरू नहीं किया जा सकता। इसकी तैयारी अभी से करनी होगी। उनका संदेश केवल अंतरिक्ष वैज्ञानिकों तक सीमित नहीं है। 

उन्होंने भारत के युवाओं, शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों को भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों से जुड़े नए विचारों पर काम करने के लिए प्रेरित किया। उनके अनुसार, किसी दूसरी दुनिया में मानव आवास बनाने की शुरुआत शायद वास्तव में निर्माण सामग्री रखने से पहले उस भविष्य की कल्पना करने से होती है।

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