सर्दियों में पीने वाला काढ़ा गर्मियों में भी सेहत के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसे संतुलित और मौसम के अनुसार तैयार करना जरूरी है। आयुर्वेद एक्सपर्ट के अनुसार गर्मियों में गर्म तासीर वाली जड़ी-बूटियों से बने काढ़े से बचें और तुलसी, मुलेठी, सौंफ और धनिया जैसी ठंडक देने वाली सामग्री का प्रयोग करें।
गर्मियों में काढ़ा पीना: दिल्ली की आयुर्वेद एक्सपर्ट डॉ. चंचल शर्मा के अनुसार, गर्मियों में भी काढ़ा पीना सुरक्षित है, बशर्ते इसे मौसम के अनुसार तैयार किया जाए। गर्म तासीर वाली जड़ी-बूटियों से बने काढ़े से बचना चाहिए, जबकि तुलसी, मुलेठी, सौंफ और धनिया जैसी ठंडक देने वाली सामग्री शामिल करने से शरीर को ठंडक मिलती है और पाचन सुधारता है। यह तरीका बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए लाभकारी है और इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है।
काढ़ा सर्दियों से गर्मियों तक
काढ़ा आयुर्वेद में सदियों से immunity बढ़ाने और शरीर को संतुलित रखने के लिए इस्तेमाल होता रहा है। आमतौर पर लोग इसे सर्दियों में पीते हैं, लेकिन एक्सपर्ट बताते हैं कि हर मौसम में इसका सेवन संभव है। गर्मियों में इसे पीते समय सामग्री और मात्रा का ध्यान रखना आवश्यक है।
गर्मियों में शरीर में पित्त दोष बढ़ जाता है, इसलिए गर्म तासीर वाली जड़ी-बूटियां नुकसान कर सकती हैं। संतुलित मात्रा में काढ़ा पीने से सेहत बनी रहती है और पेट या मुंह की समस्या जैसी दिक्कतें नहीं होती।

गर्मियों में सही सामग्री का चयन
डॉ. शर्मा के अनुसार, गर्मियों के काढ़े में तुलसी के ताजे पत्ते, मुलेठी, सौंफ और धनिया का बीज शामिल किया जा सकता है। ये सामग्री शरीर को ठंडक देती हैं, गले की समस्या में राहत देती हैं और पाचन सुधारती हैं।
बच्चों के लिए भी यही सामग्री उपयुक्त है। गर्म तासीर वाली जड़ी-बूटियों का प्रयोग न करने से बच्चों में पेट और त्वचा संबंधी परेशानियों का खतरा कम होता है।
सेफ डोज और सुझाव
काढ़ा संतुलित मात्रा में ही पीना चाहिए। अधिक मात्रा में सेवन से गर्मी बढ़ सकती है। समय-समय पर मौसम के अनुसार सामग्री बदलना चाहिए, ताकि शरीर को अधिकतम लाभ मिल सके।











