भारत में मुफ्त योजनाओं की संस्कृति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। गुरुवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि यदि हर किसी को बिना भेदभाव के मुफ्त बिजली, भोजन या साइकिल दी जाए, तो देश की कार्य संस्कृति और आर्थिक विकास पर गंभीर असर पड़ सकता है।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सरकारों की ओर से फ्री की योजनाओं पर सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने मुफ्त सुविधाएं देने की संस्कृति की कड़ी आलोचना करते हुए गुरुवार को कहा कि देश के आर्थिक विकास में बाधा डालने वाली ऐसी नीतियों पर पुनर्विचार करने का समय आ गया है। हर किसी को फ्री में बिजली देने से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि राज्य गरीबों की मदद करते हैं तो यह पूरी तरह समझ में आता है, लेकिन सभी के लिए मुफ्त सुविधाएं देने से अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गरीबों की मदद करना पूरी तरह से समझ में आता है, लेकिन जो लोग बिल चुका सकते हैं और जो नहीं चुका सकते, उनके बीच अंतर किए बिना हर किसी को मुफ्त सुविधाएं देना देश के लिए स्थायी नहीं है। अदालत ने इस तरह की नीतियों को “तुष्टीकरण की नीति” करार दिया। पीठ में शामिल चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली ने कहा कि मुफ्त की योजनाओं पर जोर देने से राज्य के वित्तीय स्वास्थ्य पर असर पड़ता है और विकास कार्य पीछे छूट जाते हैं।
सुप्रीम कोर्ट- यदि आप सुबह से शाम तक मुफ्त भोजन देंगे, फिर मुफ्त साइकिल और मुफ्त बिजली देंगे, तो काम कौन करेगा? कार्य संस्कृति का क्या होगा?
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मामला: तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन
यह सुनवाई तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (TANGEDCO) की याचिका पर हुई, जिसमें उपभोक्ताओं की वित्तीय स्थिति पर गौर किए बिना सभी को मुफ्त बिजली देने का प्रस्ताव रखा गया था। कोर्ट ने कहा कि अधिकांश राज्यों का राजस्व घाटे में है, लेकिन वे विकास और बुनियादी ढांचे पर खर्च करने के बजाय मुफ्त सुविधाओं पर जोर दे रहे हैं।
राज्यों को रोजगार के अवसर पैदा करने और विकास परियोजनाओं पर खर्च करने पर ध्यान देना चाहिए, न कि केवल मुफ्त सुविधाओं के वितरण पर। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और अन्य पक्षकारों को इस मामले में नोटिस जारी किया है। याचिका में विद्युत संशोधन नियम, 2024 के एक प्रावधान को चुनौती दी गई है।
मुफ्त योजनाओं की संस्कृति पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि भारत में मुफ्त सुविधाओं की संस्कृति किस दिशा में जा रही है। अदालत ने कहा कि कल्याणकारी कदमों के तहत गरीबों को मदद देना जरूरी है, लेकिन सभी को बिना भेदभाव के मुफ्त देना तुष्टीकरण की नीति बन सकती है। पीठ ने यह उदाहरण दिया कि यदि राज्य मुफ्त बिजली, भोजन और साइकिल देना शुरू कर दे, तो कार्यकर्ता और आम लोग मेहनत करने के लिए प्रेरित नहीं होंगे। इससे देश की कार्य संस्कृति और आर्थिक उत्पादकता प्रभावित होगी।









