Stock Market: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से बाजार में दबाव, GIFT Nifty ने दिए कमजोर शुरुआत के संकेत

Stock Market Today: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और ग्लोबल बाजारों के दबाव के बीच भारतीय शेयर बाजार की कमजोर शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। GIFT Nifty में गिरावट से

गुरुवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स लगभग सपाट खुले और ज्यादातर समय सीमित दायरे में कारोबार करते रहे। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का दबाव निवेशकों के मूड पर बना रहा, जिससे बाजार में न तो कोई खास तेजी दिखी और न ही बड़ी गिरावट।

बिजनेस न्यूज़: भारतीय शेयर बाजार के लिए शुक्रवार की शुरुआत कमजोर रहने के संकेत मिल रहे हैं। GIFT Nifty में शुरुआती कारोबार के दौरान गिरावट दर्ज की गई, जिससे घरेलू बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी पर दबाव की आशंका बढ़ गई है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, अमेरिकी और एशियाई बाजारों में कमजोरी तथा निवेशकों के बीच बढ़ती सतर्कता बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक बने हुए हैं।

GIFT Nifty करीब 113.5 अंक यानी 0.48 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,346.50 के आसपास कारोबार करता नजर आया। इससे संकेत मिलता है कि भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार को निचले स्तर पर खुल सकता है। हालांकि, शुरुआती संकेतों के आधार पर पूरे कारोबारी सत्र की दिशा तय करना जल्दबाजी होगी, क्योंकि वैश्विक बाजारों के रुझान और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच घरेलू निवेशकों की गतिविधियां बाजार को प्रभावित कर सकती हैं।

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी चिंता

निवेशकों के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। ब्रेंट क्रूड करीब 102 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बना हुआ है। तेल की कीमतों में लगातार मजबूती भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि महंगा कच्चा तेल आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर असर डाल सकता है।

ऊंची तेल कीमतों के कारण निवेशकों की धारणा पर भी दबाव देखा जा रहा है। खासतौर पर विमानन, परिवहन, पेंट, केमिकल और अन्य ऐसे क्षेत्रों पर नजर रहेगी जिनकी लागत संरचना कच्चे तेल की कीमतों से प्रभावित होती है।

अमेरिकी और एशियाई बाजारों में कमजोरी

Stock Market: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से बाजार में दबाव, GIFT Nifty ने दिए कमजोर शुरुआत के संकेत

वैश्विक संकेत भी भारतीय बाजार के लिए फिलहाल सकारात्मक नहीं हैं। अमेरिकी बाजारों में दबाव और एशियाई शेयर बाजारों में कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ने पर विदेशी निवेशकों की गतिविधियों का असर उभरते बाजारों पर भी दिखाई दे सकता है।भारतीय बाजार पहले से ही सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। 

ऐसे में कमजोर वैश्विक संकेत बाजार में उतार-चढ़ाव को बढ़ा सकते हैं। निवेशक अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और तेल बाजार से जुड़े किसी भी नए घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

गुरुवार को सीमित दायरे में रहा कारोबार

गुरुवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स लगभग सपाट शुरुआत के बाद अधिकांश समय सीमित दायरे में कारोबार करते रहे। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों के कारण निवेशकों ने बड़े दांव लगाने से परहेज किया। हालांकि, कारोबारी सत्र के अंतिम चरण में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के दौरान खरीदारी बढ़ने से बाजार में सुधार देखने को मिला। इसके बाद सेंसेक्स और निफ्टी बढ़त के साथ बंद हुए। इस तरह बाजार ने दिन के दौरान बनी कमजोरी को काफी हद तक संभाल लिया।

Nifty के लिए अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर

तकनीकी स्तरों की बात करें तो Nifty के लिए 23,380-23,400 का क्षेत्र तत्काल सपोर्ट जोन माना जा रहा है। यदि इंडेक्स इस स्तर से नीचे जाता है, तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और बाजार में आगे कमजोरी देखने को मिल सकती है। वहीं, ऊपर की ओर 23,550-23,600 का स्तर महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस जोन है। यदि Nifty लगातार 23,600 के ऊपर टिकने में सफल रहता है, तो बाजार में रिकवरी की गुंजाइश बढ़ सकती है और इंडेक्स 23,800 के स्तर की ओर बढ़ सकता है।

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