ऑस्ट्रेलिया में माउस प्लेग का कहर: खेतों पर हमला, किसानों की जिंदगी मुश्किल में

ऑस्ट्रेलिया में माउस प्लेग ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लाखों चूहे खेतों में फसलें खा रहे हैं और घरों में घुस रहे हैं। किसान भारी नुकसान से जूझ रहे हैं।

ऑस्ट्रेलिया में माउस प्लेग ने किसानों की जिंदगी मुश्किल कर दी है, जहां लाखों चूहे खेतों की फसलें नष्ट कर रहे हैं और घरों में घुस रहे हैं। किसान भारी आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं।

मेलबोर्न: ऑस्ट्रेलिया के बड़े कृषि क्षेत्रों में इन दिनों एक गंभीर माउस प्लेग (चूहों का प्रकोप) ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया (Western Australia) के कई हिस्सों में चूहे खेतों, घरों और अनाज भंडारण क्षेत्रों में भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि किसान इसे अब तक का सबसे खतरनाक कीट संकट बता रहे हैं।

किसानों के अनुसार, चूहों की संख्या इतनी अधिक है कि वे रात के समय खेतों और घरों में खुलेआम घूमते नजर आते हैं, जिससे न केवल फसलें बल्कि मानसिक तनाव भी बढ़ रहा है।

खेतों में अनाज पर भारी नुकसान

किसान गेहूं, कैनोला, ल्यूपिन और जौ जैसी प्रमुख फसलों की खेती करते हैं, लेकिन चूहों ने इन फसलों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। कई जगहों पर बोए गए बीजों को ही चूहे रात में खा जा रहे हैं, जिससे खेतों में फसल की कतारें खाली रह जाती हैं।

किसानों का कहना है कि यह समस्या खासकर रोपाई के मौसम में और भी गंभीर हो जाती है, क्योंकि यही समय फसल की नींव रखने का होता है।

किसान बोले—“यह मानसिक रूप से भी बेहद परेशान करने वाला है”

किसानों का अनुभव बेहद डरावना है। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के एक किसान ने बताया कि चूहे इतने ज्यादा बढ़ गए हैं कि वे घर की छतों, एयर कंडीशनर और रसोई तक पहुंच रहे हैं। रात के समय उनकी आवाजें और गंध तक महसूस होती है, जिसे कई लोग सड़ते हुए वातावरण जैसा बताते हैं।

किसानों का कहना है कि यह समस्या सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं है, बल्कि मानसिक तनाव भी पैदा कर रही है क्योंकि वे दिन-रात चूहों की गतिविधियों से परेशान रहते हैं।

रिकॉर्ड फसल उत्पादन बना कारण

विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार चूहों की संख्या बढ़ने का एक बड़ा कारण पिछले साल का रिकॉर्ड अनाज उत्पादन है। खेतों में बचा हुआ अनाज और कटाई के दौरान गिरा हुआ बीज चूहों के लिए आसान भोजन बन गया।

इसके अलावा गर्मी और बारिश ने भी हालात को और अनुकूल बना दिया, जिससे चूहों को पर्याप्त भोजन और प्रजनन का माहौल मिला।

ऑस्ट्रेलिया में माउस प्लेग का कहर: खेतों पर हमला, किसानों की जिंदगी मुश्किल में

चूहों की तेजी से बढ़ती आबादी

वैज्ञानिकों के अनुसार, चूहे बहुत तेजी से प्रजनन करते हैं। वे केवल कुछ हफ्तों में प्रजनन करने लगते हैं और हर 3 सप्ताह में कई बच्चों को जन्म दे सकते हैं। यही कारण है कि थोड़े समय में इनकी संख्या हजारों प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई है।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह संकट और भी गंभीर हो सकता है।

कीटनाशक और बाइटिंग अभियान तेज

किसानों ने इस संकट से निपटने के लिए जहरीले दानों (bait) का उपयोग शुरू किया है, जिन्हें खेतों में फैलाया जा रहा है। ये विशेष रूप से तैयार किए गए बीज होते हैं जिनमें चूहों के लिए विष मिला होता है।

हालांकि, किसानों का कहना है कि इसके लिए भारी खर्च उठाना पड़ रहा है और हर बार नई फसल बोने से पहले फिर से बाइटिंग करनी पड़ती है।

सरकार और वैज्ञानिकों की भूमिका

ऑस्ट्रेलिया की वैज्ञानिक एजेंसियां और कृषि विशेषज्ञ इस समस्या पर लगातार निगरानी रख रहे हैं। CSIRO के शोधकर्ताओं के अनुसार, कुछ क्षेत्रों में प्रति हेक्टेयर हजारों चूहे पाए जा रहे हैं, जो सामान्य सीमा से कई गुना अधिक है।

सरकार ने हाल ही में मजबूत कीटनाशक बाइट को मंजूरी दी है, जिससे किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।

ग्रामीण जीवन पर गहरा असर

चूहों के इस प्रकोप का असर सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण जीवन भी प्रभावित हुआ है। कई किसानों ने बताया कि चूहे घरों, रसोई और भंडारण स्थानों तक घुस रहे हैं, जिससे खाद्य सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है।

कुछ किसानों का कहना है कि वे रात में सो भी नहीं पाते क्योंकि चूहे बिस्तरों और अलमारियों में घूमते रहते हैं।

मौसम से मिल सकती है राहत

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सर्द मौसम और बारिश से चूहों की संख्या में कमी आ सकती है। ठंडा और गीला मौसम उनके प्रजनन को धीमा कर सकता है, जिससे धीरे-धीरे स्थिति नियंत्रण में आ सकती है।

किसानों को उम्मीद है कि प्राकृतिक मौसम बदलाव इस संकट से राहत दिलाएगा।

कृषि अर्थव्यवस्था पर खतरा

यह माउस प्लेग ऑस्ट्रेलिया की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ा खतरा बन गया है। फसल नुकसान, बाइटिंग पर बढ़ता खर्च और उत्पादन में गिरावट किसानों की आय पर सीधा असर डाल रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो अनाज निर्यात पर भी असर पड़ सकता है।

Leave a comment