सुल्तानपुर में शिया-सुन्नी समुदाय ने सातवीं मोहर्रम का निकाला जुलूस:गंगा-जमुनी तहजीब की दिखी मिसाल, सभी धर्मों के लोग शामिल

: सुल्तानपुर में शिया और सुन्नी समुदाय ने सातवीं मोहर्रम का जुलूस निकाला। गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल बनी, सभी धर्मों के लोग शामिल हुए।
सुल्तानपुर में शिया-सुन्नी समुदाय ने सातवीं मोहर्रम का निकाला जुलूस:गंगा-जमुनी तहजीब की दिखी मिसाल, सभी धर्मों के लोग शामिल
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सुल्तानपुर में सातवीं मोहर्रम के मौके पर शिया और सुन्नी समुदाय ने मिलकर भव्य जुलूस निकाला। शहर की सड़कों पर निकले इस जुलूस में दोनों समुदायों के लोगों ने एक साथ शामिल होकर सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे का संदेश दिया। जुलूस के दौरान जगह-जगह लोगों ने स्वागत किया और शांति एवं एकता की मिसाल पेश की।

जुलूस निर्धारित मार्गों से होकर गुजरा, जहां बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे। या हुसैन की सदाओं के बीच लोग मातम करते हुए आगे बढ़े। ताजिए और अलम के साथ निकले जुलूस में बुजुर्गों के साथ युवा और बच्चे भी शामिल हुए। कई स्थानों पर शर्बत और पानी की व्यवस्था की गई, जिसमें सभी धर्मों के लोगों ने सहयोग किया।

स्थानीय लोगों ने बताया कि सुल्तानपुर में वर्षों से मोहर्रम के जुलूस गंगा-जमुनी तहजीब की पहचान रहे हैं। इस बार भी हिंदू, मुस्लिम और अन्य समुदायों के लोग एक-दूसरे के साथ खड़े दिखाई दिए। जुलूस के दौरान कहीं भी तनाव की स्थिति नहीं बनी और पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार जुलूस मार्ग पर मौजूद रहे और भीड़ को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाते रहे। अधिकारियों ने बताया कि सभी कार्यक्रम आपसी सहयोग और सौहार्द के माहौल में आयोजित किए गए।

धार्मिक नेताओं ने लोगों से शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का अवसर नहीं, बल्कि इंसानियत, बलिदान और न्याय के संदेश को याद करने का भी समय है। इमाम हुसैन की कुर्बानी पूरी मानवता के लिए प्रेरणा है।

सातवीं मोहर्रम के इस जुलूस ने एक बार फिर यह साबित किया कि सुल्तानपुर की पहचान सिर्फ उसके धार्मिक आयोजनों से नहीं, बल्कि उन आयोजनों में दिखने वाली आपसी एकता और भाईचारे से भी है। शहर की सड़कों पर उमड़ी भीड़ ने साफ संदेश दिया कि अलग-अलग समुदायों के लोग मिलकर शांति और सौहार्द की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।

 

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