सुप्रीम कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन की याचिका पर सुनवाई से किया इनकार, संविधान के अनुच्छेद 329 का दिया हवाला

सुप्रीम कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन की याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए संविधान के अनुच्छेद 329 का हवाला दिया। जानें कोर्ट की टिप्पणी और मामले का पूरा घटनाक्रम।

Supreme Court of India ने शुक्रवार, 12 जून 2026 को Meenakshi Natarajan की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने Madhya Pradesh में 9 जून 2026 को हुए राज्यसभा चुनाव के लिए उनके नामांकन पत्र को निरस्त किए जाने को चुनौती दी थी।

नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने कांग्रेस नेता Meenakshi Natarajan की उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है, जिसमें उन्होंने Rajya Sabha चुनाव के लिए उनके नामांकन पत्र को रद्द किए जाने को चुनौती दी थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मामलों में भारतीय संविधान का अनुच्छेद 329 न्यायिक हस्तक्षेप को सीमित करता है और ऐसे विवादों के समाधान के लिए चुनाव याचिका ही निर्धारित कानूनी उपाय है।

Supreme Court of India की न्यायमूर्ति पी.के. मिश्रा और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदूरकर की पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि स्थापित संवैधानिक व्यवस्था से अलग कोई अपवाद नहीं बनाया जा सकता।

क्या है पूरा मामला?

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल किया था। हालांकि, रिटर्निंग ऑफिसर ने उनके नामांकन पत्र को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उन्होंने हैदराबाद की एक अदालत से जुड़े समन का विवरण अपने चुनावी दस्तावेजों में शामिल नहीं किया।

इसके बाद नटराजन ने सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और नामांकन रद्द करने के फैसले को चुनौती दी। उनका तर्क था कि संबंधित कानूनी मामला अभी शुरुआती चरण में है और कानून के अनुसार इसका खुलासा करना अनिवार्य नहीं था।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से क्यों किया इनकार?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 329 का हवाला दिया। यह प्रावधान चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के बाद न्यायालयों के हस्तक्षेप पर रोक लगाता है और चुनाव परिणाम या चुनाव से जुड़े विवादों के लिए विशेष कानूनी प्रक्रिया निर्धारित करता है। पीठ ने कहा कि यदि अदालत कुछ मामलों में नामांकन रद्द होने के फैसलों में हस्तक्षेप करती है और अन्य मामलों में ऐसा नहीं करती, तो इससे संवैधानिक व्यवस्था में असंगति पैदा हो सकती है।

अदालत ने कहा कि चुनावी विवादों के समाधान के लिए चुनाव याचिका का प्रावधान मौजूद है और इसी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। इसलिए याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती।

सुप्रीम कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन की याचिका पर सुनवाई से किया इनकार, संविधान के अनुच्छेद 329 का दिया हवाला

अभिषेक मनु सिंघवी ने रखा पक्ष

मीनाक्षी नटराजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Abhishek Manu Singhvi ने अदालत में दलील दी कि रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला कानूनी दृष्टि से उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि Representation of the People Act के तहत उम्मीदवारों को केवल उन मामलों का खुलासा करना होता है, जिनमें उनके खिलाफ आरोप तय हो चुके हों या किसी अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया हो।

सिंघवी ने अदालत को बताया कि हैदराबाद की अदालत ने संबंधित मामले में अभी केवल प्रारंभिक स्तर पर जवाब मांगा था और शिकायत पर संज्ञान लेने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई थी। ऐसे में इस मामले का उल्लेख न करना नामांकन रद्द करने का आधार नहीं बन सकता।

अदालत ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई पुराने फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनावी मामलों में न्यायिक संयम (Judicial Restraint) बनाए रखना संवैधानिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि अनुच्छेद 329 की भावना को देखते हुए अदालत ने हमेशा चुनाव प्रक्रिया के दौरान रिट क्षेत्राधिकार के प्रयोग से परहेज किया है। यदि किसी उम्मीदवार को नामांकन रद्द किए जाने पर आपत्ति है, तो उसके लिए चुनाव याचिका का मार्ग उपलब्ध है।

हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिका खारिज करने का मतलब यह नहीं है कि मीनाक्षी नटराजन के कानूनी अधिकार समाप्त हो गए हैं। यदि वे या उनकी ओर से कोई अन्य व्यक्ति संबंधित उच्च न्यायालय में चुनाव याचिका दायर करता है, तो उस पर स्वतंत्र रूप से विचार किया जाएगा।

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