थायरॉइड एक तेजी से बढ़ती हॉर्मोनल समस्या है, जो महिलाओं में ज्यादा पाई जाती है। स्वामी रामदेव के अनुसार कुछ खास योगासन जैसे सूर्य नमस्कार, भस्त्रिका, कपालभाति और सिंहासन थायरॉइड को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। नियमित योग, तनाव नियंत्रण और संतुलित दिनचर्या से इसके लक्षणों में राहत मिलती है।
Thyroid Yoga Benefits: भारत में बढ़ रही थायरॉइड की समस्या को लेकर स्वामी रामदेव ने बताया है कि योगासन कैसे इसके लक्षणों को कम करने में असर दिखा सकते हैं। महिलाएं हॉर्मोनल उतार-चढ़ाव जैसे पीरियड्स, प्रेगनेंसी और मेनोपॉज के चलते इस बीमारी की ज्यादा शिकार होती हैं। हाल ही में उन्होंने सूर्य नमस्कार, भस्त्रिका, कपालभाति और सिंहासन को थायरॉइड के लिए उपयोगी बताया। यह जानकारी पतंजलि योगपीठ में चल रहे नियमित योग सत्रों के दौरान साझा की गई, जहां लोगों को योग के जरिए जीवनशैली सुधारने की सलाह भी दी गई।
थायरॉइड महिलाओं में क्यों ज्यादा होता है
थायरॉइड ग्रंथि शरीर में जरूरी हॉर्मोन बनाती है। इसका असंतुलन दो तरह से प्रभावित करता है—हाइपोथायरॉयडिज्म में हॉर्मोन कम बनते हैं और हाइपरथायरॉयडिज्म में ज्यादा। रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों का मानना है कि यह परेशानी महिलाओं में पीरियड्स, प्रेगनेंसी और मेनोपॉज जैसे हॉर्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण अधिक पाई जाती है। इसके अलावा ऑटोइम्यून डिसऑर्डर, तनाव, आयोडीन की कमी और अनियमित दिनचर्या भी इसके मुख्य कारण हैं।

स्वामी रामदेव द्वारा सुझाए गए योगासन
सूर्य नमस्कार
स्वामी रामदेव बताते हैं कि सूर्य नमस्कार पूरे शरीर को सक्रिय करता है और ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है। इससे गर्दन और गले के हिस्से में हल्का खिंचाव आता है, जो थायरॉइड ग्रंथि को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है। नियमित अभ्यास से मेटाबॉलिज्म तेज होता है और ऊर्जा स्तर बढ़ता है।
भस्त्रिका प्राणायाम
यह प्राणायाम तेज और गहरी सांसों पर आधारित है। इससे शरीर को अधिक ऑक्सीजन मिलती है और थायरॉइड ग्रंथि सक्रिय रहती है। रामदेव के अनुसार यह प्राणायाम तनाव कम करता है और हॉर्मोनल असंतुलन को नियंत्रित करने में मदद करता है।
कपालभाति
तेजी से सांस छोड़ने की यह प्रक्रिया मेटाबॉलिज्म को तेज करती है और पाचन सुधारती है। कपालभाति का नियमित अभ्यास थायरॉइड असंतुलन को नियंत्रित करने में काफी प्रभावी माना जाता है। इससे वजन नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है, जो थायरॉइड मरीजों के लिए खास फायदेमंद है।
सिंहासन
सिंहासन में गले पर खिंचाव पड़ता है, जिससे थायरॉइड ग्रंथि को सीधा लाभ मिलता है। यह आसन गले की मांसपेशियों को मजबूत करता है और तनाव कम करता है, जो थायरॉइड बिगड़ने की एक बड़ी वजह माना जाता है।
थायरॉइड मरीजों के लिए क्या हैं जरूरी बातें
स्वामी रामदेव की सलाह है कि योग हमेशा नियमित और खाली पेट किया जाए। इसका उद्देश्य दवा को बदलना नहीं बल्कि उसे सपोर्ट करना है। साथ ही तनाव कम करना, संतुलित डाइट लेना, समय पर दवा और पर्याप्त नींद बेहद जरूरी मानी जाती है। विशेषज्ञ भी कहते हैं कि योग के साथ जीवनशैली में सुधार से थायरॉइड को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
यदि आप थायरॉइड की समस्या से जूझ रहे हैं तो योग के इन अभ्यासों को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से राहत मिल सकती है, लेकिन किसी भी बदलाव से पहले डॉक्टर से सलाह लेना हमेशा बेहतर है।













