टाटा संस से जुड़े विवाद में एक नया मोड़ सामने आया है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) और सर रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी तथा टाटा संस बोर्ड में दोनों ट्रस्टों के संयुक्त नॉमिनी डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर से ट्रस्ट के प्रशासन और गवर्नेंस की तत्काल जांच कराने की मांग की है।
Tata Trusts: टाटा समूह से जुड़े गवर्नेंस विवाद के बीच एक नया घटनाक्रम सामने आया है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) और सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) के ट्रस्टी तथा टाटा संस बोर्ड में दोनों ट्रस्ट्स के जॉइंट नॉमिनी डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर से टाटा ट्रस्ट्स के प्रशासन और गवर्नेंस की जांच कराने का अनुरोध किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्रीनिवासन ने ट्रस्ट्स की भूमिका और टाटा संस के कारोबारी मामलों के बीच बढ़ते जुड़ाव को लेकर कई सवाल उठाए हैं।
श्रीनिवासन की शिकायत में कथित गवर्नेंस खामियों के अलावा टाटा संस के रणनीतिक और व्यावसायिक मामलों में चैरिटेबल ट्रस्ट्स की भागीदारी को लेकर चिंता जताई गई है। उन्होंने नोएल टाटा की स्थायी ट्रस्टी के तौर पर नियुक्ति और उनके टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन पद के आधार, उनके बेटे नेविल टाटा की नियुक्ति तथा कुछ निर्णय प्रक्रियाओं से खुद को अलग रखे जाने जैसे मुद्दे भी उठाए हैं।
टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच क्यों बढ़ा विवाद?
टाटा ट्रस्ट्स टाटा संस में सबसे बड़ा शेयरधारक समूह है और उसकी हिस्सेदारी करीब 66 प्रतिशत है। इस वजह से ट्रस्ट्स के फैसलों का टाटा संस और पूरे टाटा समूह के संचालन पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। मौजूदा विवाद में टाटा संस की भविष्य की संरचना, उसकी संभावित लिस्टिंग और बोर्ड से जुड़े फैसले प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।
वेणु श्रीनिवासन ने विशेष रूप से इस बात पर सवाल उठाया है कि क्या चैरिटेबल ट्रस्ट्स को टाटा संस के बड़े व्यावसायिक लेनदेन और रणनीतिक फैसलों में इस तरह प्रत्यक्ष भूमिका निभानी चाहिए। उनका कहना है कि ऐसी गतिविधियां ट्रस्ट के घोषित चैरिटेबल उद्देश्यों और उसकी नियामकीय स्थिति से जुड़े सवाल खड़े कर सकती हैं। इन दावों की जांच और उन पर कोई अंतिम निष्कर्ष संबंधित प्राधिकरण के स्तर पर ही तय होगा।

टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर भी अहम घटनाक्रम
विवाद ऐसे समय सामने आया है जब टाटा संस की संभावित स्टॉक मार्केट लिस्टिंग को लेकर भी टाटा ट्रस्ट्स और कंपनी के भीतर चर्चा तेज है। 17 सितंबर को टाटा ट्रस्ट्स ने कहा था कि उसने टाटा संस की लिस्टिंग पर सहमति नहीं दी है और कंपनी के भविष्य के लिए सभी उपलब्ध विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए।
इसी क्रम में नोएल टाटा ने टाटा संस के बोर्ड के सामने शापूरजी पलोनजी (SP) ग्रुप की हिस्सेदारी के एक हिस्से को खरीदने से जुड़ा प्रस्ताव भी रखा था। टाटा ट्रस्ट्स के अनुसार, प्रस्ताव में कम से कम ₹25,000 करोड़ की राशि के बराबर हिस्सेदारी के संभावित लेनदेन का जिक्र था।
टाटा संस को अनलिस्टेड रखने की नई योजना
29 सितंबर को सामने आए घटनाक्रम के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस की संरचना में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य कंपनी को मौजूदा नियामकीय ढांचे में इस तरह पुनर्गठित करना है कि उसे शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की आवश्यकता न पड़े। प्रस्ताव में दो ऑपरेटिंग कंपनियों को टाटा संस में मिलाने की योजना शामिल है।
नोएल टाटा ने कहा है कि यह प्रस्ताव भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुरूप है और इससे टाटा संस के मौजूदा मॉडल को बनाए रखने का विकल्प मिल सकता है। हालांकि, प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए संबंधित बोर्ड और नियामकीय मंजूरियां जरूरी होंगी।











