तेलंगाना में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के ‘हिटलर’ बयान पर विवाद बढ़ा। मंत्री श्रीधर बाबू ने सफाई देते हुए कहा कि यह फिल्मी संदर्भ था। उन्होंने BRS नेताओं पर आरोप लगाया कि वे जानबूझकर बयान को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं।
हैदराबाद: तेलंगाना की राजनीति में मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की कथित “हिटलर” टिप्पणी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे पर राज्य सरकार के आईटी एवं उद्योग मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने मुख्यमंत्री का बचाव करते हुए विपक्षी भारत राष्ट्र समिति (BRS) नेताओं के.टी. रामाराव (KTR) और टी. हरीश राव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के बयान को गलत संदर्भ में पेश कर राजनीतिक विवाद खड़ा किया जा रहा है।
“फिल्मी संदर्भ में इस्तेमाल हुआ शब्द”
हैदराबाद स्थित CLP मीडिया सेंटर में मीडिया से बात करते हुए श्रीधर बाबू ने कहा कि “हिटलर” शब्द का प्रयोग सामान्य बोलचाल और लोकप्रिय संस्कृति में अक्सर सख्त और निर्णायक व्यक्तित्व के लिए किया जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि फिल्म अभिनेता चिरंजीवी की एक लोकप्रिय फिल्म का नाम भी “हिटलर” था, जिसमें यह शब्द सकारात्मक और दृढ़ नेतृत्व के संदर्भ में इस्तेमाल किया गया था।
मंत्री के अनुसार, मुख्यमंत्री ने यह शब्द केवल इस संदर्भ में इस्तेमाल किया था कि अवैध अतिक्रमणों के खिलाफ सख्त और निर्णायक कार्रवाई जरूरी है।
“विपक्ष जानबूझकर फैला रहा है भ्रम”
श्रीधर बाबू ने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि बीआरएस नेता मुख्यमंत्री के बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ राजनीतिक ताकतें सरकार की अवैध अतिक्रमणों के खिलाफ कार्रवाई से असहज हैं, इसलिए जानबूझकर विवाद पैदा किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के बयान का उद्देश्य किसी ऐतिहासिक या राजनीतिक विचारधारा का समर्थन करना नहीं था, बल्कि प्रशासनिक सख्ती और अनुशासन पर जोर देना था।
पूर्व सरकार पर गंभीर आरोप
प्रेस वार्ता के दौरान मंत्री ने पूर्व बीआरएस सरकार पर भी तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव लंबे समय तक सचिवालय नहीं गए और प्रशासनिक कार्यों को सीमित रखा गया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि उस समय प्रगति भवन में आम लोगों की पहुंच बेहद सीमित थी, जिससे लोकतांत्रिक पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।
श्रीधर बाबू ने आरोप लगाया कि उस दौर में कई प्रशासनिक फैसले बंद दरवाजों के पीछे लिए जाते थे, जिससे शासन प्रणाली में पारदर्शिता की कमी रही।
“प्रगति भवन एक बंद व्यवस्था का प्रतीक था”
मंत्री ने कहा कि मौजूदा सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक खुला और पारदर्शी बनाया है। उनके अनुसार, पहले की सरकार में प्रगति भवन को एक “कठोर और सीमित पहुंच वाले ढांचे” के रूप में देखा जाता था, जबकि वर्तमान सरकार इसे अधिक लोकतांत्रिक और जनता के लिए सुलभ बनाने की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार सभी निर्णय कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ले रही है।
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फोन टैपिंग और भर्ती घोटाले के आरोप
श्रीधर बाबू ने पूर्व सरकार पर फोन टैपिंग, भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितता और तेलंगाना लोक सेवा आयोग (TGPSC) से जुड़े विवादों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इन कथित अनियमितताओं के कारण लाखों युवाओं को नुकसान हुआ।
मंत्री ने दावा किया कि मौजूदा कांग्रेस सरकार ने इन मुद्दों पर सुधारात्मक कदम उठाए हैं और भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
HYDRAA कार्रवाई का बचाव
सरकार की ओर से चलाए जा रहे HYDRAA (Hyderabad Disaster Response and Asset Protection Agency) की कार्रवाई का भी मंत्री ने बचाव किया। उन्होंने कहा कि यह एजेंसी पूरी तरह कानूनी दायरे में काम कर रही है और झीलों तथा सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए उचित नोटिस जारी करने के बाद ही कार्रवाई कर रही है।
उन्होंने कहा कि यह पहल पर्यावरण संरक्षण और शहरी नियोजन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
“अंबेडकर संविधान के अनुरूप कार्रवाई”
श्रीधर बाबू ने कहा कि HYDRAA की कार्रवाई भारतीय संविधान और डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा दिए गए मूल्यों के अनुरूप है। उन्होंने दावा किया कि स्थानीय निवासी भी अवैध अतिक्रमणों के खिलाफ इन कार्रवाइयों का समर्थन कर रहे हैं।
राजनीतिक टकराव तेज, बयानबाज़ी जारी
इस पूरे विवाद ने तेलंगाना की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। जहां सरकार इसे प्रशासनिक सख्ती और सुधारात्मक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक बयानबाज़ी और संवेदनशील शब्दों के गलत उपयोग के रूप में देख रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, आगामी चुनावों को देखते हुए राज्य में सियासी बयानबाज़ी और तेज होने की संभावना है।










