TMC में बढ़ी सियासी कलह: बागी गुट की दूसरी बड़ी बैठक, ममता खेमे ने दर्ज कराई शिकायत

TMC के बागी गुट ने 47 पूर्व पार्षदों के साथ दूसरी बैठक की। ममता बनर्जी गुट ने पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न के कथित गलत इस्तेमाल को लेकर पुलिस में FIR दर्ज कराई।

TMC के बागी गुट ने 47 पूर्व पार्षदों के साथ दूसरी बैठक कर संगठन और KMC चुनाव की रणनीति बनाई। वहीं ममता बनर्जी गुट ने पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न के कथित गलत इस्तेमाल को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी राजनीतिक खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी के बागी गुट ने एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार बड़ी बैठक आयोजित कर अपने संगठनात्मक विस्तार और आगामी राजनीतिक रणनीति पर चर्चा की। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले आधिकारिक गुट ने इस बैठक को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि बागी नेताओं ने पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न का अनधिकृत इस्तेमाल किया।

इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, खासकर ऐसे समय में जब कोलकाता नगर निगम (KMC) चुनाव की तैयारियां शुरू हो रही हैं।

बागी गुट की दूसरी बैठक में 47 पूर्व पार्षद शामिल

शनिवार को कोलकाता के टॉपसिया इलाके में आयोजित बैठक में 47 पूर्व पार्षदों ने हिस्सा लिया। यह बैठक 22 जून को न्यू टाउन में हुई पहली बैठक के बाद आयोजित की गई। दोनों बैठकों की सबसे खास बात यह रही कि कार्यक्रमों में तृणमूल कांग्रेस का नाम और चुनाव चिह्न दिखाई दिया, लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तस्वीर मंच से पूरी तरह गायब रही।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रतीकात्मक बदलाव बागी गुट की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

ममता गुट ने पुलिस में दर्ज कराई शिकायत

बैठक के बाद ममता बनर्जी समर्थक गुट की नेता डोला सेन ने न्यू टाउन और प्रगति मैदान पुलिस थानों में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि बागी गुट ने फर्जी दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक संदेशों का उपयोग कर पार्टी की पहचान का गलत इस्तेमाल किया।

इसके अलावा बिना आवश्यक अनुमति के बैठक आयोजित करने और आधिकारिक पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने के आरोप भी लगाए गए हैं। पुलिस ने शिकायत प्राप्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

बागी नेताओं का दावा- "हम ही असली TMC"

बागी विधायक संदीपन साहा ने बैठक के बाद दावा किया कि वास्तविक तृणमूल कांग्रेस उनके साथ है। उन्होंने कहा कि उनके गुट के पास पर्याप्त जनप्रतिनिधियों का समर्थन मौजूद है और विधानसभा में उनकी राजनीतिक ताकत लगातार बढ़ रही है।

साहा ने कहा कि नई राष्ट्रीय कार्यसमिति का गठन पूरा हो चुका है तथा जल्द ही राज्यभर में राजनीतिक कार्यक्रमों और जनसंपर्क अभियानों की घोषणा की जाएगी। उनका दावा है कि संगठनात्मक ढांचे का पुनर्गठन पार्टी के संविधान के अनुरूप किया गया है।

कोलकाता नगर निगम चुनाव पर रही विशेष चर्चा

सूत्रों के अनुसार बैठक का प्रमुख एजेंडा आगामी कोलकाता नगर निगम (KMC) चुनाव था। माना जा रहा है कि नगर निगम चुनाव इस वर्ष दिसंबर में कराए जा सकते हैं। इसलिए बागी गुट अब अपने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में जुट गया है। बैठक में वार्ड स्तर पर संगठन विस्तार, उम्मीदवार चयन, चुनाव प्रचार और स्थानीय नेतृत्व को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।

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नगर निगम बोर्ड भंग होने के बाद बदला राजनीतिक समीकरण

8 जून को कोलकाता नगर निगम का बोर्ड भंग कर दिया गया था, जिसके बाद सभी पार्षदों, चेयरपर्सन और मेयर-इन-काउंसिल सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो गया। नगर प्रशासन की जिम्मेदारी फिलहाल प्रशासक को सौंपी गई है।

इस राजनीतिक बदलाव ने सभी दलों के लिए नए समीकरण तैयार कर दिए हैं। यही कारण है कि बागी गुट नगर निगम चुनाव को अपनी राजनीतिक ताकत साबित करने के अवसर के रूप में देख रहा है। पूर्व मेयर फिरहाद हकीम इस बैठक में शामिल नहीं हुए, जिससे राजनीतिक चर्चाओं को और बल मिला।

शहीद दिवस रैली को लेकर भी आमने-सामने दोनों गुट

तृणमूल कांग्रेस के भीतर विवाद केवल संगठन तक सीमित नहीं है। 21 जुलाई को आयोजित होने वाली शहीद दिवस रैली को लेकर भी दोनों गुटों के बीच प्रतिस्पर्धा दिखाई दे रही है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला आधिकारिक गुट हर वर्ष की तरह कोलकाता के धर्मतला में रैली आयोजित करना चाहता है। पार्टी का कहना है कि पिछले 33 वर्षों से इसी स्थान पर यह कार्यक्रम आयोजित होता आया है।

दूसरी ओर, बागी गुट ने भी उसी स्थान पर रैली करने के लिए प्रशासन से अनुमति मांगी है। हालांकि यदि अनुमति नहीं मिलती है तो वैकल्पिक स्थान पर कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी भी की जा रही है। बागी विधायक अखरुज्जमान ने कहा कि इस बार कार्यक्रम में शहीद परिवारों को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा और उन्हें राजनीतिक चर्चा के केंद्र में रखा जाएगा।

महुआ मोइत्रा ने ममता बनर्जी के नेतृत्व का किया बचाव

तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने बागी नेताओं के दावों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी का वास्तविक जनादेश और चुनाव चिह्न ममता बनर्जी के नेतृत्व से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि कुछ विधायक, सांसद या पार्षद पार्टी छोड़ सकते हैं, लेकिन इससे जनता का भरोसा और चुनावी जनादेश नहीं बदलता। उनके अनुसार तृणमूल कांग्रेस की पहचान आज भी ममता बनर्जी के नेतृत्व से ही है।

समानांतर कार्यसमिति बनाकर बागी गुट ने बढ़ाया दबाव

22 जून को बागी गुट ने तृणमूल कांग्रेस की समानांतर कार्यसमिति (Parallel Working Committee) की घोषणा कर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी थी।

बैठक में विधायक अरूप रॉय को अध्यक्ष चुना गया, जबकि ऋतब्रत बनर्जी, जावेद खान और संदीपन साहा को महासचिव बनाया गया। अखरुज्जमान अंसारी को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। इसके अलावा कई वरिष्ठ नेताओं को विभिन्न संगठनात्मक पद सौंपे गए। ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि पूरी प्रक्रिया पार्टी के संविधान के अनुसार संपन्न हुई है और इसकी जानकारी भारत निर्वाचन आयोग को भी भेजी जाएगी।

कानूनी और राजनीतिक चुनौती दोनों बढ़ीं

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों गुट पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अपना दावा जारी रखते हैं, तो मामला कानूनी स्तर तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में निर्वाचन आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि विवाद और गहराता है, तो इसका प्रभाव न केवल आगामी नगर निगम चुनावों पर बल्कि पश्चिम बंगाल की व्यापक राजनीतिक स्थिति पर भी पड़ सकता है।

आगे क्या?

तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ती गुटबाजी अब सार्वजनिक राजनीतिक संघर्ष का रूप लेती दिखाई दे रही है। एक ओर बागी गुट खुद को पार्टी का वास्तविक प्रतिनिधि बता रहा है, वहीं आधिकारिक नेतृत्व इसे अनुशासनहीनता और पार्टी की पहचान के दुरुपयोग का मामला मान रहा है।

आगामी नगर निगम चुनाव, शहीद दिवस रैली और संभावित कानूनी कार्रवाई यह तय करेगी कि यह राजनीतिक टकराव केवल संगठनात्मक विवाद तक सीमित रहता है या पश्चिम बंगाल की राजनीति में किसी बड़े बदलाव का कारण बनता है।

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