ट्रंप की योजना टली! ब्रिटेन ने RAF बेस से हमले की नहीं दी अनुमति

यूनाइटेड किंगडम ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को RAF एयरबेस से ईरान पर हमला करने से रोका। अंतरराष्ट्रीय कानून और कूटनीतिक जिम्मेदारी के मद्देनजर यह कदम अहम माना ।

ब्रिटेन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान पर हमला करने के लिए RAF एयरबेस इस्तेमाल करने से रोक दिया। यह कदम अमेरिका-ईरान तनाव के बीच आया और अंतरराष्ट्रीय कानून व कूटनीतिक जिम्मेदारी पर जोर देता है।

लंदन: अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नया मोड़ तब आया जब यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान पर हमला करने के लिए अपने RAF एयरबेस का इस्तेमाल करने से रोक दिया। यह निर्णय अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच आया, जब तेहरान ने अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर समझौता करने से इनकार किया।

इस कदम ने कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले चागोस डील में ब्रिटेन का समर्थन वापस ले लिया था, क्योंकि ब्रिटिश सरकार ने अमेरिका को बमबारी के लिए मिलिट्री बेस इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी थी।

अमेरिका की तैयारी

अमेरिका ने ईरान पर सीधे हमले के लिए इमरजेंसी प्लान तैयार किया था। इसके तहत मध्य पूर्व में लंबी दूरी के बॉम्बिंग मिशन और रीफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट भेजे गए थे। अमेरिकी डिफेंस अधिकारियों ने ट्रंप को बताया कि अमेरिका शनिवार तक पूरी तरह से युद्ध के लिए तैयार हो जाएगा। यह अमेरिका की 2003 के बाद से इस क्षेत्र में सबसे बड़ी मिलिट्री तैयारी थी।

ईरान पर किसी भी हमले में चागोस आइलैंड्स स्थित डिएगो गार्सिया मिलिट्री बेस और अन्य यूरोपियन एयर बेस का इस्तेमाल होने की संभावना थी। डिएगो गार्सिया बेस का इस्तेमाल करने के लिए अमेरिका को ब्रिटेन की अनुमति की आवश्यकता नहीं थी, लेकिन RAF बेस के लिए ब्रिटिश सरकार से हरी झंडी जरूरी थी।

RAF एयरबेस का इस्तेमाल

अमेरिका ने RAF फेयरफोर्ड बेस से लंबी दूरी की बमबारी करने की अनुमति मांगी थी। यह बेस ग्लॉस्टरशायर में स्थित है और यहां अमेरिकी एयर फोर्स के कर्मी तैनात हैं। हालांकि, ब्रिटेन ने अभी तक अनुमति नहीं दी। सरकारी वकीलों ने चेतावनी दी थी कि इस हमले में शामिल होना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो सकता है।

ट्रंप की योजना टली! ब्रिटेन ने RAF बेस से हमले की नहीं दी अनुमति

सरकारी सूत्रों ने बताया कि पिछले साल भी ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर अमेरिका द्वारा हमले में ब्रिटेन ने शामिल होने से इनकार किया था। ब्रिटेन ने स्पष्ट किया कि किसी भी अमेरिकी हमले का समर्थन करना गैर-कानूनी हो सकता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रिटेन जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

ईरान का कड़ा रुख

तेहरान ने साफ किया कि किसी भी हमले का जवाब दिया जाएगा। ईरान ने बार-बार चेतावनी दी कि उनके न्यूक्लियर ठिकानों पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन माना जाएगा और इसका जवाब मिलिट्री तरीके से दिया जाएगा।

ब्रिटेन में मिलिट्री हमलों पर अंतिम कानूनी सलाह अटॉर्नी जनरल लॉर्ड हर्मर की जिम्मेदारी थी। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिकी RAF बेस के इस्तेमाल के बारे में उनसे सीधे सलाह ली गई या नहीं। लॉर्ड हर्मर ने पिछले साल अमेरिकी हमलों से पहले कानूनी सलाह दी थी, जिसमें कहा गया था कि ब्रिटेन की संपत्ति की रक्षा के अलावा किसी भी हमले में शामिल होना गैर-कानूनी होगा।

अमेरिका-यूनाइटेड किंगडम-ईरान त्रिकोण

यह कदम अमेरिका और ब्रिटेन के बीच कूटनीतिक तनाव को भी उजागर करता है। ट्रंप प्रशासन ईरान पर हमले के लिए तेजी से कदम उठाना चाहता था, लेकिन ब्रिटेन ने अंतरराष्ट्रीय कानून और अपने बेस के उपयोग को ध्यान में रखते हुए इसे रोका।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह ब्रिटेन की जिम्मेदारी और अंतरराष्ट्रीय कानूनी स्थिति की समझ को दर्शाता है। ब्रिटेन ने साफ किया कि किसी भी गैर-कानूनी सैन्य हमले में शामिल होना उसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को खतरे में डाल सकता है।

ट्रंप की प्रतिक्रिया और चागोस डील

डोनाल्ड ट्रंप ने पहले चागोस डील में ब्रिटेन का समर्थन वापस ले लिया था। उनका कहना था कि यदि ब्रिटेन अमेरिका को मिलिट्री बेस का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देता है, तो अमेरिकी रणनीति प्रभावित होगी। लेकिन RAF बेस के इस्तेमाल से इनकार ने ट्रंप के योजना को रोका और अमेरिका-ईरान तनाव को कूटनीतिक हलकों में और भी जटिल बना दिया।

Leave a comment