महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) के 6 सांसदों के बगावत करने की अटकलों से सियासी हलचल बढ़ गई है। संजय राउत ने सांसदों को करोड़ों रुपये के ऑफर मिलने का दावा किया, जबकि पार्टी नेतृत्व उन्हें मनाने में जुटा है।
मुंबई/नई दिल्ली: महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) यानी UBT में संभावित टूट की खबरों ने राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, पार्टी के नौ लोकसभा सांसदों में से छह सांसदों के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन घटनाक्रम ने उद्धव ठाकरे खेमे की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
दिल्ली में सांसदों की गतिविधियों, लोकसभा स्पीकर से संभावित मुलाकात और दोनों गुटों के नेताओं के बयानों ने इस राजनीतिक संकट को और गंभीर बना दिया है। यदि यह घटनाक्रम आगे बढ़ता है, तो यह 2022 में हुई शिवसेना की ऐतिहासिक टूट के बाद पार्टी के लिए एक और बड़ा झटका साबित हो सकता है।
दिल्ली में बढ़ी राजनीतिक हलचल
रिपोर्ट्स के अनुसार, उद्धव ठाकरे गुट के छह से सात सांसद दिल्ली पहुंच चुके हैं और उनके लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात करने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सांसद औपचारिक रूप से अलग गुट बनाने या किसी अन्य दल के साथ जाने की प्रक्रिया शुरू करते हैं, तो इसका सीधा असर संसद में पार्टी की स्थिति पर पड़ेगा।
उधर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे के भी दिल्ली में मौजूद होने की खबरों ने राजनीतिक अटकलों को और बल दिया है। हालांकि किसी भी पक्ष ने सार्वजनिक रूप से इन बैठकों के उद्देश्य की पुष्टि नहीं की है।
संजय राउत ने लगाए गंभीर आरोप
शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद Sanjay Raut ने पूरे घटनाक्रम को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी सांसदों को तोड़ने के लिए भारी धनराशि की पेशकश की गई है। राउत के अनुसार, कुछ सांसदों को कथित तौर पर करोड़ों रुपये का प्रस्ताव दिया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ सांसदों को विशेष विमानों के जरिए दिल्ली लाया गया है।
हालांकि इन आरोपों के समर्थन में कोई सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है और संबंधित पक्षों ने इन दावों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि ऐसे आरोप भारतीय राजनीति में दल-बदल की चर्चाओं के दौरान अक्सर सामने आते हैं, लेकिन उनकी पुष्टि जांच और आधिकारिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकती है।
पार्टी नेतृत्व की बढ़ी चिंता
सूत्रों के मुताबिक, उद्धव ठाकरे और उनके करीबी नेता संभावित असंतुष्ट सांसदों से लगातार संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि कोई भी सांसद यदि नाराज है तो वह सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखे और संगठन के भीतर समाधान निकाला जाए।
हालांकि कई सांसदों की चुप्पी ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है। पार्टी के भीतर इस बात को लेकर चिंता है कि यदि लोकसभा में संख्या घटती है तो विपक्षी राजनीति में UBT की भूमिका कमजोर हो सकती है।
कुछ सांसदों ने किया खंडन
इन अटकलों के बीच शिवसेना (UBT) सांसद Sanjay Dina Patil ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वे पार्टी नहीं छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका नाम किसी भी कथित बागी सूची में शामिल नहीं है और वे उद्धव ठाकरे के साथ बने हुए हैं। इस बयान को पार्टी के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन बाकी सांसदों की स्थिति को लेकर अभी भी असमंजस बना हुआ है।
![]()
लोकसभा स्पीकर को पत्र
घटनाक्रम के बीच पार्टी सांसद Arvind Sawant ने लोकसभा अध्यक्ष Om Birla को पत्र लिखकर किसी भी संभावित अलग गुट को आधिकारिक मान्यता न देने की मांग की है।
पत्र में कहा गया है कि किसी राजनीतिक दल की वैधानिक पहचान केवल सांसदों की संख्या से तय नहीं होती, बल्कि पार्टी संगठन, संविधान और नेतृत्व भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए किसी भी संभावित अलग गुट को मूल पार्टी का प्रतिनिधि नहीं माना जाना चाहिए।
2022 की बगावत की यादें ताजा
मौजूदा घटनाक्रम ने वर्ष 2022 की उस बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल की याद दिला दी है, जब शिवसेना के अधिकांश विधायक Eknath Shinde के साथ चले गए थे। उस समय महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी सरकार सत्ता में थी और उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री थे। विधायकों की बगावत के बाद राजनीतिक संकट गहरा गया था, जिसके परिणामस्वरूप उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।
बाद में चुनाव आयोग और विधानसभा अध्यक्ष के फैसलों में शिंदे गुट को शिवसेना का आधिकारिक प्रतिनिधि माना गया और पार्टी का पारंपरिक चुनाव चिन्ह भी उन्हें मिला। उस फैसले ने भारतीय राजनीति में दल-बदल और पार्टी स्वामित्व से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए थे।
महाराष्ट्र की राजनीति पर संभावित असर
यदि लोकसभा सांसदों का एक बड़ा समूह वास्तव में शिवसेना (UBT) छोड़ता है, तो इसका असर केवल संसद तक सीमित नहीं रहेगा। महाराष्ट्र में आगामी राजनीतिक समीकरणों, विपक्षी गठबंधनों और स्थानीय निकाय चुनावों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राज्य में विपक्षी एकजुटता को चुनौती मिल सकती है। वहीं शिंदे गुट के लिए यह अपनी राजनीतिक स्थिति और मजबूत करने का अवसर साबित हो सकता है।
राष्ट्रीय राजनीति में भी बढ़ेगी चर्चा
लोकसभा में किसी भी दल के सांसदों की संख्या उसके प्रभाव और रणनीतिक महत्व को निर्धारित करती है। ऐसे में यदि शिवसेना (UBT) के सांसदों की संख्या घटती है, तो विपक्षी राजनीति के समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले कुछ दिन इस पूरे मामले में बेहद महत्वपूर्ण होंगे। सांसदों की संभावित बैठकें, लोकसभा अध्यक्ष से संपर्क और दोनों गुटों की आधिकारिक प्रतिक्रियाएं स्थिति को स्पष्ट करेंगी।









