UK Government: ब्रिटेन सरकार में भारतीय मूल के सांसदों का बढ़ा प्रभाव, कनिष्क नारायण को मिली AI मंत्रालय की जिम्मेदारी

UK Government में भारतीय मूल के सांसदों का प्रभाव बढ़ा है। कनिष्क नारायण को AI मंत्रालय की जिम्मेदारी मिलने से ब्रिटेन की राजनीति में भारतीय मूल के नेताओं की

ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम के मंत्रिमंडल में भारतीय मूल के तीन युवा सांसदों को अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। जुलाई 2024 में पहली बार सांसद चुने गए 36 वर्षीय कनिष्क नारायण को एआई मंत्री बनाया गया है।

UK Government Indian-Origin Ministers: ब्रिटेन की नई सरकार में भारतीय मूल के सांसदों की भूमिका और मजबूत हुई है। प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम के नए मंत्रिमंडल और फ्रंट बेंच में भारतीय मूल के तीन युवा सांसदों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। इनमें 36 वर्षीय कनिष्क नारायण को एआई (Artificial Intelligence) मंत्री नियुक्त किया गया है। इसके अलावा दो सिख महिला सांसदों सतवीर कौर और हरप्रीत उप्पल को भी सरकार में अहम जिम्मेदारियां मिली हैं।

इन नियुक्तियों के बाद ब्रिटेन सरकार की फ्रंट बेंच में भारतीय मूल के सांसदों की मौजूदगी और अधिक प्रभावशाली हो गई है। नई टीम में हिंदू और सिख समुदाय से जुड़े सांसदों का प्रतिनिधित्व भी देखने को मिल रहा है। यह बदलाव ब्रिटेन की राजनीति में भारतीय मूल के नेताओं की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

कनिष्क नारायण को मिली AI मंत्रालय की जिम्मेदारी

जुलाई 2024 में सांसद चुने गए कनिष्क नारायण को नई सरकार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी दी गई है। 36 वर्षीय नारायण को तकनीक और एआई के तेजी से बदलते क्षेत्र में सरकार की नीतियों को आगे बढ़ाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालनी होगी। एआई को लेकर दुनियाभर में सरकारों के बीच नीतिगत बहस तेज हो रही है। 

ऐसे समय में ब्रिटेन सरकार में एआई मंत्री के रूप में कनिष्क नारायण की नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्हें तकनीकी नवाचार, एआई के जिम्मेदार इस्तेमाल और इस क्षेत्र से जुड़े नीतिगत मामलों पर सरकार के काम में भूमिका निभानी होगी। नारायण का सरकार में शामिल होना इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि वह अपेक्षाकृत कम उम्र में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी पाने वाले सांसदों में शामिल हैं।

दो सिख महिला सांसदों को भी अहम पद

कनिष्क नारायण के अलावा सतवीर कौर और हरप्रीत उप्पल को भी नई सरकार की फ्रंट बेंच में जगह मिली है। दोनों सिख महिला सांसद हैं और ब्रिटेन की राजनीति में भारतीय मूल के समुदाय का प्रतिनिधित्व करती हैं। हडर्सफील्ड सीट से सांसद हरप्रीत उप्पल को असिस्टेंट व्हिप की जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम के साथ पहले काम करने का अनुभव भी है। 

उन्होंने 2017 में ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर पद के चुनाव अभियान के दौरान बर्नहैम के साथ काम किया था। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह पूर्व अनुभव उनकी नई भूमिका में उपयोगी साबित हो सकता है। वहीं, साउथम्प्टन टेस्ट सीट से सांसद सतवीर कौर को सुरक्षा, महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा तथा समानता से जुड़े मामलों की मंत्री बनाया गया है। उनके परिवार की जड़ें पंजाब से जुड़ी हैं और उनके माता-पिता ने साउथम्प्टन में साड़ी की दुकान संचालित की थी।

उनकी नई जिम्मेदारी महिलाओं की सुरक्षा और लैंगिक समानता जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों से जुड़ी है। ऐसे में उनके मंत्रालय के सामने घरेलू हिंसा, महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ अपराध तथा समान अवसर से जुड़े विषयों पर नीतिगत काम करने की चुनौती होगी।

फ्रंट बेंच में भारतीय मूल के नेताओं की मजबूत मौजूदगी

नई नियुक्तियों के बाद ब्रिटेन सरकार की फ्रंट बेंच में भारतीय मूल के हिंदू और सिख सांसदों की मौजूदगी बढ़ी है। श्रीलंकाई मूल की हिंदू सांसद उमा कुमारन को भी विदेश कार्यालय में जूनियर मंत्री की जिम्मेदारी मिली है। इससे सरकार की शीर्ष टीम में दक्षिण एशियाई मूल के नेताओं का प्रतिनिधित्व और व्यापक हुआ है।

इसके अलावा, कोलकाता में जन्मे दीपक नंदी की बेटी लिसा नंदी को संस्कृति सचिव के पद पर बरकरार रखा गया है। उनका जन्म मैनचेस्टर में हुआ था, जबकि एंडी बर्नहैम लंबे समय तक इसी शहर के मेयर रहे हैं। ऐसे में दोनों के बीच राजनीतिक और भौगोलिक जुड़ाव भी देखा जाता है।

स्टार्मर के करीबी दो भारतीय मूल के नेता बाहर

सरकार में नए चेहरों को जिम्मेदारी मिलने के साथ पूर्व प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के करीबी माने जाने वाले भारतीय मूल के दो नेताओं को नई टीम में जगह नहीं मिली। इनमें सीमा मल्होत्रा और प्रीत कौर गिल शामिल हैं। सीमा मल्होत्रा पहले इंडो-पैसिफिक मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रही थीं, जबकि प्रीत कौर गिल जूनियर स्वास्थ्य मंत्री थीं। दोनों को अब फ्रंट बेंच से हटाकर बैकबेंच पर भेज दिया गया है।

Leave a comment