NPCI UPI AutoPay को इंटरऑपरेबल बनाने की तैयारी कर रहा है। नए सिस्टम में यूजर्स एक्टिव मैंडेट्स और सब्सक्रिप्शन को किसी भी UPI ऐप से मैनेज कर सकेंगे और ऐप बदलने पर पुराने ऑटो-पे को दोबारा सेट करने की जरूरत नहीं होगी।
Tech: UPI AutoPay को लेकर NPCI एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। नए फीचर के बाद यूजर्स अपने एक्टिव ऑटो-पे मैंडेट्स को एक UPI ऐप से दूसरे ऐप पर पोर्ट कर सकेंगे। साथ ही सभी सब्सक्रिप्शन, आगामी डेबिट और एक्टिव मैंडेट्स को एक ही जगह देखने और मैनेज करने की सुविधा मिल सकती है।
UPI AutoPay को लेकर NPCI का बड़ा बदलाव
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NPCI UPI AutoPay सिस्टम को इंटरऑपरेबल बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इसका उद्देश्य यूजर्स को किसी एक UPI ऐप तक सीमित रखने के बजाय ऑटोमैटिक पेमेंट मैंडेट्स को अलग-अलग ऐप्स पर मैनेज करने की सुविधा देना है।
ऐप बदलने पर AutoPay मैंडेट पोर्ट होंगे
फिलहाल किसी UPI ऐप पर OTT सब्सक्रिप्शन, म्यूचुअल फंड SIP या इंश्योरेंस प्रीमियम के लिए AutoPay सेट करने के बाद ऐप बदलने पर पुराने मैंडेट को कैंसिल कर नया सेटअप करना पड़ सकता है। प्रस्तावित बदलाव के बाद यह प्रक्रिया आसान हो जाएगी।
यूजर अपने मौजूदा ऑटो-पे मैंडेट को दूसरे UPI ऐप पर पोर्ट कर सकेगा। यानी ऐप बदलने के बावजूद पुराने पेमेंट मैंडेट को दोबारा रजिस्टर करने की जरूरत नहीं होगी।
एक ही जगह दिखेंगे सभी एक्टिव मैंडेट्स
इंटरऑपरेबिलिटी लागू होने के बाद यूजर्स किसी भी नए या पुराने UPI ऐप से अपने एक्टिव मैंडेट्स, आने वाले डेबिट और पुराने सब्सक्रिप्शन को एक ही स्क्रीन पर ट्रैक और मैनेज कर सकेंगे।
मैंडेट को दूसरे ऐप पर पोर्ट करने के बाद भी पेमेंट उसी बैंक खाते से कटेगी, जिसे यूजर ने शुरुआत में ऑथराइज किया था। यानी मुख्य बदलाव मैंडेट को मैनेज करने वाले इंटरफेस में होगा, बैंकिंग रूटिंग में नहीं।
इससे सब्सक्रिप्शन और लोन रिपेमेंट जैसी नियमित पेमेंट सेवाओं को ऐप बदलने के बाद दोबारा सेट करने की परेशानी कम होगी।
पेमेंट गेटवे में भी होगा बदलाव
इस सुविधा का असर केवल कंज्यूमर-फेसिंग UPI ऐप्स तक सीमित नहीं रहेगा। मर्चेंट अपने एक्टिव मैंडेट्स को एक पेमेंट गेटवे से दूसरे गेटवे पर माइग्रेट कर सकेंगे। इसके लिए कस्टमर को दोबारा ऑथराइजेशन देने की जरूरत नहीं होगी।
UPI ऐप्स के लिए बढ़ेगा टेक्निकल काम
फीचर को लागू करने के लिए थर्ड-पार्टी एप्लिकेशन प्रोवाइडर्स और UPI ऐप्स को अपने टेक्निकल सिस्टम में बदलाव करने होंगे। इसका उद्देश्य ऑटो-पे के जरिए यूजर को किसी एक पेमेंट ऐप के साथ लॉक-इन होने से रोकना है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फीचर की घोषणा अगले महीने मुंबई में होने वाले ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में किए जाने की उम्मीद है।










