नेपाल में भारी बारिश के बाद उत्तर प्रदेश की कई नदियों का जलस्तर बढ़ा है। बाराबंकी में 1100 साल पुराने मंदिर पर कटान का खतरा है, जबकि कई जिलों में बाढ़ और जलभराव के बीच बारिश का अलर्ट जारी है।
लखनऊ: नेपाल के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के बाद उत्तर प्रदेश में घाघरा, सरयू, गंगा समेत कई नदियां उफान पर हैं। बाराबंकी में सरयू के तेज कटान से 1100 साल पुराने बाबा नारायण दास मंदिर पर खतरा बढ़ गया है। उन्नाव में रिहायशी इलाकों में पानी पहुंच गया है और गलियों में नाव चल रही है। इस बीच मौसम विभाग ने सात शहरों में हल्की बारिश का अलर्ट जारी किया है।
सरयू के कटान की जद में 1100 साल पुराना मंदिर
बाराबंकी के रामनगर तहसील क्षेत्र के हेतमापुर में सरयू नदी का कटान लगातार तेज हो रहा है। मंगलवार दोपहर नदी खतरे के निशान से 77 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। तेज बहाव के कारण नदी किनारों को लगातार काट रही है और अब कटान 1100 साल पुराने बाबा नारायण दास मंदिर तक पहुंच गया है।

मंदिर का एक हिस्सा नदी की धारा की ओर लटक गया है। मंदिर को बचाने के लिए ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना और हवन शुरू किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन अपने स्तर पर बचाव कार्य कर रहा है, लेकिन मंदिर की सुरक्षा को लेकर उनकी चिंता बढ़ गई है। हेतमापुर में सरयू की धारा में एक मस्जिद के समा जाने की जानकारी भी सामने आई है।
गोंडा और बहराइच में हजारों लोग बाढ़ से प्रभावित
गोंडा में बुधवार सुबह एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी खतरे के निशान से 50 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। पिछले 24 घंटे में जलस्तर 20 सेंटीमीटर घटा है, लेकिन तरबगंज और कर्नलगंज तहसील क्षेत्र के 20 गांवों की करीब 18 हजार आबादी अब भी बाढ़ से प्रभावित है।
कई गांवों के चारों तरफ पानी भरा हुआ है और कुछ घरों में भी पानी पहुंच गया है। प्रभावित लोग घरों में मचान बनाकर रहने और खाना पकाने को मजबूर हैं। हजारों बीघा फसल पानी में डूबी हुई है। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के लिए भूसे का वितरण कराया जा रहा है। वहीं, कुछ प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पांच दिन से पढ़ाई प्रभावित है।
गोंडा में एल्गिन-चरसड़ी और भिखारीपुर-सकरौर तटबंध पर भी कटान का खतरा बढ़ गया है। बाढ़ खंड विभाग अलर्ट मोड पर है। अधिकारियों ने एल्गिन ब्रिज से पसका तक करीब 40 किलोमीटर तटबंध का निरीक्षण किया।
बहराइच में घाघरा नदी खतरे के निशान से 70 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। नेपाल और जिले में लगातार बारिश तथा बैराजों से पानी छोड़े जाने के कारण महसी और मोतीपुर तहसील के करीब दर्जनभर गांव बाढ़ से घिरे हैं। यहां करीब 15 हजार लोगों के प्रभावित होने की जानकारी है और प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य तेज किया है।
उन्नाव और फतेहपुर में भी बढ़ी मुश्किल
उन्नाव में गंगा का जलस्तर बढ़कर मंगलवार सुबह 8 बजे तक 112.49 मीटर पहुंच गया। इसके बाद तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंच गया और कई घरों में जलभराव हो गया। कुछ लोग घरों की छतों पर रहने को मजबूर हैं, जबकि आवाजाही के लिए रिहायशी गलियों में नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
फतेहपुर की बिंदकी तहसील के मलवां विकासखंड की आशापुर अभयपुर ग्रामसभा में गंगा और पांडु नदी का जलस्तर बढ़ने से तेज बहाव के कारण करीब 10 मीटर संपर्क मार्ग बह गया। आशापुर से जाड़े का पुरवा और अवसेरी खेड़ा जाने वाला रास्ता टूटने से ग्रामीणों के सामने आवागमन की समस्या खड़ी हो गई है।
मुरादाबाद में रामगंगा और कोसी नदी के उफान के कारण कई गांवों में पानी भर गया है। सड़कें जलमग्न हैं और छोटे पुल भी पानी में डूब गए हैं। वहीं, वाराणसी में मौसम साफ रहने के बावजूद गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है और कई घाटों का संपर्क प्रभावित हुआ है।
मानसून की विदाई शुरू, कुछ इलाकों में हल्की बारिश का अनुमान
बुधवार सुबह प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम साफ रहा और कई जगह तेज धूप निकली। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तर प्रदेश से मानसून की वापसी शुरू हो चुकी है। मुजफ्फरनगर, अलीगढ़ और आसपास के पश्चिमी हिस्सों से मानसून का प्रभाव कम हो चुका है।
BHU के मौसम वैज्ञानिक मनोज श्रीवास्तव के अनुसार प्रदेश के बाकी हिस्सों से भी मानसून धीरे-धीरे विदा होगा। नमी कम होने के साथ तापमान बढ़ सकता है, हालांकि स्थानीय मौसमी सिस्टम के कारण कुछ जिलों में हल्की बारिश हो सकती है। IMD के आधिकारिक चेतावनी पोर्टल पर 30 सितंबर से आगे के दिनों के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में मौसम संबंधी चेतावनियां उपलब्ध हैं।











