एक दिन पहले रिटायर होने पर भी मिलेगा वेतन वृद्धि का लाभ, उत्तराखंड हाईकोर्ट का अहम फैसला

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि वेतन वृद्धि की तारीख से एक दिन पहले रिटायर कर्मचारी को लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। पेंशन और अन्य लाभ भी संशोधित होंगे।
एक दिन पहले रिटायर होने पर भी मिलेगा वेतन वृद्धि का लाभ, उत्तराखंड हाईकोर्ट का अहम फैसला
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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों की वेतन वृद्धि और सेवानिवृत्ति लाभ से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि कर्मचारी को केवल इस आधार पर वार्षिक वेतन वृद्धि के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता कि वह वेतन वृद्धि की निर्धारित तारीख से ठीक एक दिन पहले सेवानिवृत्त हो गया था। अदालत ने कहा कि कर्मचारी ने जिस अवधि की सेवा पूरी की है, उसके आधार पर अर्जित वेतन वृद्धि को केवल तकनीकी आधार पर रोका नहीं जा सकता।

नैनीताल स्थित उत्तराखंड हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने की। अदालत के सामने सरकारी कर्मचारी रमाकांत राम का मामला था, जो पौड़ी गढ़वाल के शिक्षा विभाग में कार्यरत रहे थे। वह 30 जून 2016 को सेवानिवृत्त हुए थे। उनकी वार्षिक वेतन वृद्धि अगले दिन यानी 1 जुलाई 2016 को देय थी। लेकिन 1 जुलाई को वह सेवा में नहीं थे, इसलिए उन्हें उस वेतन वृद्धि का लाभ नहीं दिया गया।

रमाकांत राम की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उन्होंने वेतन वृद्धि के लिए आवश्यक सेवा अवधि पूरी कर ली थी। केवल इसलिए कि उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख वेतन वृद्धि की तारीख से एक दिन पहले थी, उन्हें उस वित्तीय लाभ से वंचित करना उचित नहीं है। इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसले का भी हवाला दिया गया था, जिसमें इसी तरह के मामलों में कर्मचारियों को वेतन वृद्धि का लाभ देने की बात कही गई थी।

हाईकोर्ट ने सरकार की ओर से रखी गई दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि इस मुद्दे पर अब स्थिति स्पष्ट है और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इसे अनसुलझा मुद्दा नहीं माना जा सकता। अदालत ने संबंधित कर्मचारी को 1 जुलाई 2016 को देय वार्षिक वेतन वृद्धि देने का निर्देश दिया। साथ ही इस वेतन वृद्धि को जोड़कर उनकी पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों को दोबारा निर्धारित करने के लिए कहा गया।

अदालत के आदेश का आधार यह है कि वार्षिक वेतन वृद्धि कर्मचारी द्वारा निर्धारित अवधि की सेवा पूरी करने पर अर्जित होती है। यदि कर्मचारी ने वेतन वृद्धि के लिए जरूरी सेवा अवधि पूरी कर ली है और केवल अगले दिन उसकी सेवानिवृत्ति हो गई, तो सिर्फ इस तकनीकी अंतर के कारण उसके अर्जित लाभ को खत्म नहीं किया जा सकता। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि कर्मचारी को केवल इसलिए वेतन वृद्धि से वंचित नहीं किया जा सकता क्योंकि वह वृद्धि की तारीख से एक दिन पहले सेवानिवृत्त हुआ था।

इस फैसले का असर उन सरकारी कर्मचारियों के मामलों पर भी पड़ सकता है, जिनकी सेवानिवृत्ति 30 जून या 31 दिसंबर को होती है और जिनकी अगली वार्षिक वेतन वृद्धि क्रमशः 1 जुलाई या 1 जनवरी को देय होती है। ऐसे मामलों में अक्सर यह विवाद सामने आता रहा है कि कर्मचारी को वृद्धि की तारीख पर सेवा में नहीं होने के कारण लाभ दिया जाए या नहीं। अदालत के इस रुख से ऐसे कर्मचारियों के पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों की गणना का सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है। हालांकि, प्रत्येक कर्मचारी के मामले में लागू सेवा नियम और संबंधित परिस्थितियां अलग हो सकती हैं।

उत्तराखंड हाईकोर्ट का यह फैसला अचानक आया कोई नया सिद्धांत नहीं है, बल्कि अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पहले से स्थापित कानूनी सिद्धांत को लागू किया है। 2024 में भी उत्तराखंड हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने ऐसे ही मामले में कर्मचारी को वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ देने और उसके आधार पर पेंशन तथा अन्य सेवानिवृत्ति लाभों को पुनर्निर्धारित करने का निर्देश दिया था। उस मामले में भी कर्मचारी 30 जून को सेवानिवृत्त हुआ था, जबकि वार्षिक वेतन वृद्धि 1 जुलाई से देय थी।

सुप्रीम कोर्ट ने भी इस विषय पर अपने फैसले में यह माना था कि वेतन वृद्धि कर्मचारी की आवश्यक सेवा अवधि पूरी करने से जुड़ी होती है। यानी वृद्धि की तारीख अगले दिन रखे जाने का उद्देश्य सेवा की निर्धारित अवधि पूरी होने को सुनिश्चित करना है। केवल इस वजह से कि कर्मचारी उस अगले दिन पद पर मौजूद नहीं था, पहले से अर्जित लाभ को पूरी तरह नकारने का आधार नहीं बन सकता।

रमाकांत राम के मामले में हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि उन्हें 1 जुलाई 2016 को मिलने वाली वेतन वृद्धि का लाभ दिया जाए और इसके आधार पर पेंशन समेत अन्य रिटायरमेंट लाभों को संशोधित किया जाए। इसका मतलब है कि वेतन वृद्धि केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका असर उन वित्तीय लाभों पर भी पड़ेगा जिनकी गणना अंतिम वेतन के आधार पर की जाती है।

ऐसे मामलों में अंतिम वेतन में होने वाली वृद्धि का असर पेंशन की गणना पर पड़ सकता है। यदि किसी कर्मचारी की पेंशन अंतिम वेतन के आधार पर तय होती है, तो संशोधित अंतिम वेतन के कारण पेंशन और उससे जुड़े अन्य लाभों में भी बदलाव हो सकता है। इसी वजह से हाईकोर्ट ने केवल वेतन वृद्धि देने का निर्देश नहीं दिया, बल्कि पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों को भी दोबारा निर्धारित करने को कहा है।

यह फैसला सरकारी कर्मचारियों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाले लाभ लंबे समय तक उनकी आर्थिक स्थिति से जुड़े रहते हैं। कई कर्मचारी अपनी सेवा के अंतिम वर्षों में मिलने वाली वार्षिक वेतन वृद्धि के आधार पर पेंशन की गणना की उम्मीद करते हैं। यदि केवल सेवानिवृत्ति और वेतन वृद्धि की तारीख के बीच एक दिन का अंतर होने के कारण लाभ रोक दिया जाता है, तो कर्मचारी को उसका असर लंबे समय तक भुगतना पड़ सकता है।

हाईकोर्ट के आदेश में यह भी स्पष्ट है कि सरकार की ओर से 31 दिसंबर 2024 को जारी आदेश को लेकर जो दलील दी गई थी, उससे इस मामले का परिणाम नहीं बदला। अदालत ने माना कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय सीधे तौर पर इस मामले पर लागू होता है। इसलिए संबंधित कर्मचारी के वेतन और सेवानिवृत्ति लाभ को उसी आधार पर संशोधित करने का आदेश दिया गया।

इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि अदालत ने सेवानिवृत्ति की तारीख और वेतन वृद्धि की तारीख के बीच केवल एक दिन के अंतर को कर्मचारी के अर्जित लाभ से इनकार का पर्याप्त आधार नहीं माना। कर्मचारी ने जिस अवधि तक सेवा की और जिस सेवा अवधि के आधार पर वेतन वृद्धि अर्जित हुई, उसे ध्यान में रखते हुए अदालत ने लाभ देने का निर्देश दिया है।

ऐसे कर्मचारियों के लिए यह फैसला विशेष महत्व रख सकता है जिनकी सेवानिवृत्ति वेतन वृद्धि की निर्धारित तारीख से ठीक एक दिन पहले हुई है। हालांकि किसी व्यक्ति को अपने मामले में लाभ मिलेगा या नहीं, यह उसके सेवा रिकॉर्ड, लागू नियमों और संबंधित न्यायिक आदेशों पर निर्भर करेगा। इसलिए व्यक्तिगत मामले में संबंधित विभाग के रिकॉर्ड और लागू नियमों की जांच जरूरी होगी।

उत्तराखंड हाईकोर्ट के इस आदेश ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि सरकारी कर्मचारी की सेवानिवृत्ति की तारीख और वार्षिक वेतन वृद्धि की तारीख के बीच एक दिन का अंतर अपने आप में अर्जित वेतन वृद्धि को खत्म करने का आधार नहीं हो सकता। संबंधित मामले में अदालत ने वेतन वृद्धि देने के साथ-साथ उसके आधार पर पेंशन और अन्य रिटायरमेंट लाभों को संशोधित करने का निर्देश दिया है।

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