वाराणसी: मौसम में बदलाव के साथ जब अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ रही है, ऐसे समय में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिवपुर की पैथोलॉजी लैब में ताला लगा मिलने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच की जरूरत लेकर सीएचसी पहुंचने वाले मरीजों को उस समय परेशानी का सामना करना पड़ा, जब उन्हें पैथोलॉजी जांच की सुविधा नहीं मिल सकी। कई मरीज और उनके स्वजन जांच कराने के लिए अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन लैब बंद होने के कारण उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा।
शिवपुर क्षेत्र का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आसपास के लोगों के लिए महत्वपूर्ण सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोग इलाज और जांच के लिए पहुंचते हैं। सामान्य बीमारी से लेकर ऐसी स्थितियों में भी मरीज सरकारी अस्पताल का रुख करते हैं, जहां डॉक्टर बीमारी की पुष्टि के लिए खून या दूसरी पैथोलॉजी जांच कराने की सलाह देते हैं। ऐसे में यदि अस्पताल की लैब ही बंद मिल जाए तो मरीजों के इलाज की प्रक्रिया प्रभावित होना स्वाभाविक है।
मौसम बदलने के साथ वायरल बुखार, संक्रमण और अन्य मौसमी बीमारियों के मरीज अस्पतालों में बढ़ते हैं। ऐसे समय में पैथोलॉजी जांच की जरूरत भी बढ़ जाती है, क्योंकि कई बीमारियों में केवल लक्षणों के आधार पर सही बीमारी की पहचान करना मुश्किल होता है। डॉक्टरों को जांच रिपोर्ट के आधार पर उपचार तय करने में मदद मिलती है। इसलिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्र की पैथोलॉजी सेवा का सुचारु रहना मरीजों के लिए बेहद जरूरी माना जाता है।
शिवपुर सीएचसी में लैब बंद मिलने की जानकारी सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में जांच की उम्मीद लेकर पहुंचने के बाद यदि वहां सुविधा उपलब्ध नहीं हो तो उन्हें निजी जांच केंद्रों का सहारा लेना पड़ सकता है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त खर्च का बोझ पड़ सकता है।
खासकर ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के मरीजों के लिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्र इसलिए महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि यहां इलाज और जांच की सुविधाएं अपेक्षाकृत कम खर्च में उपलब्ध होने की उम्मीद रहती है। कई परिवार निजी अस्पताल या पैथोलॉजी सेंटर का खर्च उठाने की स्थिति में नहीं होते। ऐसे में सरकारी अस्पताल की जांच सुविधा बंद होना उनके लिए बड़ी परेशानी बन सकता है।
शिवपुर सीएचसी को लेकर हाल के दिनों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमियों का मुद्दा पहले भी सामने आया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की अपर सचिव अराधना पटनायक ने सितंबर की शुरुआत में सीएचसी का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान सामने आया कि वहां एक्स-रे मशीन करीब एक महीने से बंद थी और टेक्नीशियन की कमी के कारण सेवा प्रभावित थी। मरीजों को एक्स-रे के लिए करीब पांच किलोमीटर दूर दीनदयाल अस्पताल जाना पड़ रहा था।
निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया था कि एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जांच के बाद मरीजों को रिपोर्ट और फिल्म उपलब्ध कराने की व्यवस्था में भी समस्या थी। रिपोर्टिंग सिस्टम को बेहतर करने और स्टाफ की कमी को दूर करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं में सुधार को लेकर प्रशासनिक स्तर पर चर्चा तेज हुई।
ऐसे में अब पैथोलॉजी लैब में ताला मिलने की खबर स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं को लेकर एक और सवाल खड़ा करती है। मरीजों के लिए किसी सरकारी अस्पताल में केवल डॉक्टर की उपलब्धता ही पर्याप्त नहीं होती। डॉक्टर के परामर्श के बाद जरूरी जांच, रिपोर्ट की उपलब्धता और उसके आधार पर समय पर इलाज भी स्वास्थ्य सेवा का अहम हिस्सा है।
अगर किसी मरीज को तेज बुखार, कमजोरी, संक्रमण या अन्य समस्या है और डॉक्टर जांच लिखते हैं, तो उसे जल्द से जल्द रिपोर्ट की जरूरत होती है। जांच में देरी होने पर उपचार शुरू करने में भी देरी हो सकती है। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और गंभीर लक्षण वाले मरीजों के लिए समय पर जांच और इलाज अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।
पैथोलॉजी लैब में ताला मिलने से सबसे ज्यादा परेशानी उन मरीजों को होती है जो दूर-दराज के इलाकों से सरकारी अस्पताल तक पहुंचते हैं। कई मरीज आने-जाने के लिए किराया खर्च करके अस्पताल आते हैं। यदि यहां जांच नहीं होती तो उन्हें दूसरे केंद्र पर जाना पड़ सकता है। इससे समय और पैसा दोनों खर्च होते हैं।
मरीजों की परेशानी केवल जांच तक सीमित नहीं रहती। दूसरे केंद्र पर जाने के बाद वहां पंजीकरण, सैंपल देने और रिपोर्ट मिलने में भी समय लग सकता है। इसके बाद मरीज को दोबारा डॉक्टर के पास रिपोर्ट दिखाने के लिए आना पड़ता है। इस पूरी प्रक्रिया में इलाज लंबा खिंच सकता है।
सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में पैथोलॉजी जैसी मूलभूत सुविधाओं का नियमित संचालन इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य व्यवस्था का उद्देश्य मरीजों को उनके आसपास ही जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। यदि मरीजों को छोटी-छोटी जांच के लिए दूसरे अस्पतालों या निजी केंद्रों की ओर भेजना पड़े तो सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर निर्भर लोगों की परेशानी बढ़ जाती है।
शिवपुर सीएचसी में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने की जरूरत को लेकर हाल में निरीक्षण भी किया गया था। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मरीजों से सीधे फीडबैक लिया था और सीएचसी को फर्स्ट रेफरल यूनिट यानी FRU के रूप में अपग्रेड करने की संभावना पर भी बात हुई थी। साथ ही स्टाफ की कमी दूर करने और रिपोर्टिंग व्यवस्था को बेहतर बनाने के निर्देश दिए गए थे।
ऐसे में अस्पताल की अलग-अलग सेवाओं का नियमित संचालन सुधार की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। एक तरफ स्वास्थ्य केंद्र को बेहतर सुविधाओं से लैस करने की बात हो रही है, वहीं दूसरी तरफ मौजूदा जांच सुविधाओं के प्रभावित होने से मरीजों की परेशानी सामने आ रही है। इससे व्यवस्था के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
मरीजों और उनके स्वजन की अपेक्षा है कि अस्पताल प्रशासन ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करे जिससे पैथोलॉजी जांच नियमित रूप से हो सके। अगर किसी तकनीकी कारण, कर्मचारी की कमी या अन्य वजह से लैब बंद है तो उसके समाधान के लिए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए। मरीजों को पहले से यह जानकारी भी मिलनी चाहिए कि कौन-कौन सी जांच उपलब्ध हैं और कौन सी जांच फिलहाल नहीं हो रही है।
स्वास्थ्य विभाग के लिए यह भी जरूरी है कि अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों की नियमित समीक्षा की जाए। केवल मशीन और भवन की उपलब्धता से स्वास्थ्य सेवा पूरी नहीं होती। प्रशिक्षित कर्मचारी, तकनीकी स्टाफ, जांच सामग्री और रिपोर्ट तैयार करने की व्यवस्था भी समान रूप से जरूरी होती है।
शिवपुर सीएचसी में पैथोलॉजी लैब बंद होने की स्थिति से यह सवाल भी उठता है कि बीमारी के बढ़ते मौसम में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की तैयारियों की कितनी नियमित निगरानी हो रही है। मौसमी बीमारियों के दौरान मरीजों की संख्या अचानक बढ़ सकती है। ऐसे समय में जांच सुविधाएं बंद रहने पर अस्पताल आने वाले मरीजों का दबाव दूसरे केंद्रों पर भी बढ़ सकता है।
वाराणसी में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर लगातार निरीक्षण और समीक्षा की जा रही है। लेकिन इन प्रयासों का वास्तविक फायदा तभी मरीजों को मिलेगा, जब अस्पताल में डॉक्टर, जांच, दवा और जरूरी तकनीकी सेवाएं नियमित रूप से उपलब्ध रहें।
फिलहाल शिवपुर सीएचसी की पैथोलॉजी लैब में ताला लगे होने की खबर ने मरीजों की परेशानी को सामने ला दिया है। बीमारी के मौसम में जब लोगों को समय पर जांच और उपचार की जरूरत है, उस समय सरकारी अस्पताल की जांच सुविधा प्रभावित होना चिंता का विषय है। मरीजों को उम्मीद है कि स्वास्थ्य विभाग इस समस्या का जल्द समाधान करेगा और पैथोलॉजी जांच व्यवस्था को नियमित किया जाएगा, ताकि उन्हें जांच के लिए दूसरे अस्पतालों या निजी केंद्रों की ओर न भटकना पड़े।









