काशी में धनतेरस पर खुला मां अन्नपूर्णा का स्वर्णमयी दरबार, पांच दिनों तक भक्तों को मिलेगा खजाना प्रसाद

धनतेरस पर वाराणसी में मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी दरबार के पट खुल गए। 10 नवंबर तक भक्त दर्शन और खजाना प्रसाद पाएंगे। 10 लाख श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है।
काशी में धनतेरस पर खुला मां अन्नपूर्णा का स्वर्णमयी दरबार, पांच दिनों तक भक्तों को मिलेगा खजाना प्रसाद
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वाराणसी। धनतेरस के पावन अवसर पर धर्मनगरी काशी में मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी दरबार के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। शुक्रवार की सुबह से ही मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने लगी। साल में केवल पांच दिनों के लिए होने वाले मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिल रहा है। मंदिर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लग गईं और हर कोई माता के दिव्य स्वरूप की एक झलक पाने के लिए आतुर नजर आया।

अन्नपूर्णा मठ मंदिर के प्रथम तल पर स्थित मां अन्नपूर्णा की स्वर्णमयी प्रतिमा के दर्शन की शुरुआत सुबह विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद हुई। मंदिर के महंत शंकर पुरी महाराज ने सुबह चार बजे षोडशोपचार विधि से माता का पूजन किया। इसके बाद भव्य शृंगार और महाआरती संपन्न हुई। सुबह पांच बजे आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के पट खोल दिए गए। कपाट खुलते ही भक्तों ने माता के जयकारे लगाए और दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि तथा अन्न-धन की खुशहाली की कामना की।

धनतेरस से अन्नकूट महापर्व तक चलने वाला यह विशेष दर्शन आयोजन 10 नवंबर तक जारी रहेगा। इन पांच दिनों में मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के साथ माता लक्ष्मी, भूमि देवी और रजत महादेव के दर्शन भी श्रद्धालु कर सकेंगे। मंदिर में इस बार करीब 10 लाख भक्तों के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। इसी को देखते हुए दर्शन और सुरक्षा की विशेष व्यवस्था की गई है।

इस आयोजन का सबसे खास आकर्षण मां अन्नपूर्णा का खजाना प्रसाद है। दर्शन के बाद श्रद्धालुओं को लावा और खजाने के रूप में सिक्के दिए जा रहे हैं। धार्मिक मान्यता है कि मां का यह प्रसाद घर में रखने से अन्न और धन की कमी नहीं होती तथा परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। कई श्रद्धालु इस प्रसाद को अपने घर की तिजोरी या पूजा स्थल में सहेजकर रखते हैं। भक्तों के लिए यह केवल प्रसाद नहीं बल्कि माता के आशीर्वाद और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

काशी की धार्मिक परंपरा में मां अन्नपूर्णा का विशेष स्थान है। मान्यता है कि मां अन्नपूर्णा ही पूरे संसार को अन्न प्रदान करती हैं। बाबा विश्वनाथ की नगरी में माता का यह स्वरूप अन्न और धन की देवी के रूप में पूजित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्वयं बाबा विश्वनाथ भी याचक के रूप में माता से भिक्षा मांगते हैं। इसी परंपरा से जुड़ा मां अन्नपूर्णा का स्वर्णमयी दरबार हर साल धनतेरस के अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है।

श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मंदिर परिसर और आसपास के रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई है। भक्तों को निर्धारित मार्ग से प्रवेश कराया जा रहा है, जबकि दर्शन के बाद अलग रास्ते से बाहर निकलने की व्यवस्था की गई है। सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जा रही है। इसके अलावा मंदिर परिसर में सेवादारों और मेडिकल टीम की तैनाती भी की गई है, ताकि किसी श्रद्धालु को परेशानी होने पर तत्काल सहायता मिल सके।

पांच दिवसीय आयोजन का समापन 10 नवंबर को अन्नकूट महापर्व के साथ होगा। इस अवसर पर मां अन्नपूर्णा का विशेष शृंगार किया जाएगा और उन्हें विभिन्न प्रकार के पकवान, मिठाइयों तथा पारंपरिक व्यंजनों का भोग अर्पित किया जाएगा। इसी दिन श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में भी विशेष आयोजन होगा और बाबा विश्वनाथ को छप्पन भोग अर्पित किया जाएगा। अन्नकूट महापर्व के बाद मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के कपाट अगले वर्ष तक के लिए बंद कर दिए जाएंगे।

धनतेरस पर शुरू हुए इस विशेष आयोजन ने काशी में दीपावली के उत्सव को और खास बना दिया है। देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु मां अन्नपूर्णा के दर्शन और खजाना प्रसाद पाने के लिए वाराणसी पहुंच रहे हैं। पांच दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक आयोजन में भक्तों को मां के दुर्लभ स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन का अवसर मिलेगा

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